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इस बार ऐसे खेलें होली, मन हो जाए प्रसन्न और ग्रह हो जाऐं शांत
Dharm Desk
प्रत्येक ग्रह का अपना प्रिय और अप्रिय रंग होता है, ऐसे में व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बैठे इन ग्रहों को अगर थोड़ा ध्यान दिया जाए, तो इनकी नाराजगी झेले बिना ही जीवन में सुख-समृद्धि के साथ होली की मस्ती का भरपूर लुत्फ उठाया जा सकता है। यदि ग्रहों को ध्यान में रखकर होली के रंग खेले जाएं, तो होली की मस्ती दोगुनी हो सकती है। राशि व ग्रहों के अनुसार रंगों का महत्व होता है।
रंगों का प्रभाव मानव जीवन पर अपनी अमिट छाप छोड़ता है। हर रंग का अपना महत्व है। होली की मस्ती में रंग तो चेहरों को बदरंग करेंगें ही। ऐसे में यदि राहु, केतु और शनि जैसे क्रूर ग्रह अपना रंग जमाए बैठे हों तो कुछ सोच समझकर ही रंगों का इस्तेमाल करें। जमाना ‘एस्ट्रोकलर’ का है, रंगों का संबंध ग्रहों से और ग्रहों का संबंध मानव के सुख-दुःख से है। रंगों का सही चयन जीवन को बेरंग होने से बचाता है।
यदि आपका सूर्य खराब चल रहा हो तो लाल रंग, अबीर गुलाल का ज्यादा प्रयोग करें।
- चन्द्रमा ठीक न हो तो सफेदा का इस्तेमाल अधिक करें।
- मंगल से तारतम्य न हो तो लाल रंग से खेलें।
- बुध खराब हो तो हरा रंग प्रयोग करें।
- बृहस्पति बिगड़ा होने पर पीले रंग का प्रयोग करना चाहिए।
- यदि शुक्र ठीक नहीं तो चमकदार सफेद रंग का इस्तेमाल करें।
- शनि से प्रभावित लोगों के लिए काला रंग प्रयोग की छूट जरूर है।
- राहु के शिकार लोग गुब्बारे में रंग भरकर होली का लुत्फ उठा सकते हैं।
- जिनके ग्रह में केतु महाराज गड़बड़ी कर रहे हों, वे दो रंगों का इस्तेमाल कर अपने ग्रह को शांत बनाए रख सकते हैं।
किसी राशि वाले किस रंग से खेलें होली ताकि जीवन में खुशियों का रंग भरे - मेष-लाल, वृष-सफेद, मिथुन-हरा गुलाल, कर्क-सफेदा, सिंह-लाल और नारंगी रंग, कन्या-हरा, तुला-सफेद, वृश्चिक-लाल, धनु-पीला और सुनहरा, मकर व कुम्भ-काला, मीन-पीला रंग फायदेमद होगा।
होलिका की परिक्रमा से दूर होते हैं कष्ट - शत्रुबाधा निवारण तथा स्वास्थ्य लाभ हेतु 11 फेरे, धनहानि से बचने के लिए 21 फेरे, राज्यकार्य में सफलता के लिए उल्टे सात फेरे, दुर्घटना से बचने के लिए होलिका की 5 परिक्रमा करनी चाहिए।
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इस बार ऐसे खेलें होली, मन हो जाए प्रसन्न और ग्रह हो जाऐं शांत
Dharm Desk
प्रत्येक ग्रह का अपना प्रिय और अप्रिय रंग होता है, ऐसे में व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बैठे इन ग्रहों को अगर थोड़ा ध्यान दिया जाए, तो इनकी नाराजगी झेले बिना ही जीवन में सुख-समृद्धि के साथ होली की मस्ती का भरपूर लुत्फ उठाया जा सकता है। यदि ग्रहों को ध्यान में रखकर होली के रंग खेले जाएं, तो होली की मस्ती दोगुनी हो सकती है। राशि व ग्रहों के अनुसार रंगों का महत्व होता है।
रंगों का प्रभाव मानव जीवन पर अपनी अमिट छाप छोड़ता है। हर रंग का अपना महत्व है। होली की मस्ती में रंग तो चेहरों को बदरंग करेंगें ही। ऐसे में यदि राहु, केतु और शनि जैसे क्रूर ग्रह अपना रंग जमाए बैठे हों तो कुछ सोच समझकर ही रंगों का इस्तेमाल करें। जमाना ‘एस्ट्रोकलर’ का है, रंगों का संबंध ग्रहों से और ग्रहों का संबंध मानव के सुख-दुःख से है। रंगों का सही चयन जीवन को बेरंग होने से बचाता है।
यदि आपका सूर्य खराब चल रहा हो तो लाल रंग, अबीर गुलाल का ज्यादा प्रयोग करें।
- चन्द्रमा ठीक न हो तो सफेदा का इस्तेमाल अधिक करें।
- मंगल से तारतम्य न हो तो लाल रंग से खेलें।
- बुध खराब हो तो हरा रंग प्रयोग करें।
- बृहस्पति बिगड़ा होने पर पीले रंग का प्रयोग करना चाहिए।
- यदि शुक्र ठीक नहीं तो चमकदार सफेद रंग का इस्तेमाल करें।
- शनि से प्रभावित लोगों के लिए काला रंग प्रयोग की छूट जरूर है।
- राहु के शिकार लोग गुब्बारे में रंग भरकर होली का लुत्फ उठा सकते हैं।
- जिनके ग्रह में केतु महाराज गड़बड़ी कर रहे हों, वे दो रंगों का इस्तेमाल कर अपने ग्रह को शांत बनाए रख सकते हैं।
किसी राशि वाले किस रंग से खेलें होली ताकि जीवन में खुशियों का रंग भरे - मेष-लाल, वृष-सफेद, मिथुन-हरा गुलाल, कर्क-सफेदा, सिंह-लाल और नारंगी रंग, कन्या-हरा, तुला-सफेद, वृश्चिक-लाल, धनु-पीला और सुनहरा, मकर व कुम्भ-काला, मीन-पीला रंग फायदेमद होगा।
होलिका की परिक्रमा से दूर होते हैं कष्ट - शत्रुबाधा निवारण तथा स्वास्थ्य लाभ हेतु 11 फेरे, धनहानि से बचने के लिए 21 फेरे, राज्यकार्य में सफलता के लिए उल्टे सात फेरे, दुर्घटना से बचने के लिए होलिका की 5 परिक्रमा करनी चाहिए।
