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आज का पंचांग: शनि अमावस्या पर बन रहा द्विपुष्कर योग, शुभ कार्यों के लिए चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें
Dharm Desk
आज मंगलवार, 27 मई 2025 को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि है, जिसे हिन्दू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है।
इसे शनि अमावस्या भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन शनि देव की जयंती भी मनाई जाती है। इसके साथ ही रोहिणी व्रत, द्विपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग इसे और अधिक फलदायी बना देता है। हालांकि, यह तिथि अंधकार से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए शुभ कार्यों के लिए चंद्रोदय की प्रतीक्षा करना उचित होगा।
ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व:
यह तिथि पूर्वजों के तर्पण, ध्यान, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस दिन माता काली की उपासना विशेष फलदायी होती है। साथ ही, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या भोजन देने से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
टिप: इस दिन विवाह, मुंडन या नए कार्य की शुरुआत से बचें।
आज का पंचांग – 27 मई 2025, मंगलवार
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विक्रम संवत: 2081
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माह: ज्येष्ठ
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: अमावस्या (प्रातः 8:31 बजे तक)
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वार: मंगलवार
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योग: सुकर्म
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नक्षत्र: कृतिका
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करण: नाग
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चंद्र राशि: वृषभ
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सूर्य राशि: वृषभ
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सूर्योदय: 05:54 AM
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सूर्यास्त: 07:18 PM
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चंद्रोदय: नहीं
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चंद्रास्त: 07:49 PM
आज के वर्जित समय:
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राहुकाल: 15:57 बजे से 17:38 बजे तक
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यमगंड: 10:56 बजे से 12:36 बजे तक
इन समयों में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
विशेष योग:
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द्विपुष्कर योग – एक ऐसा संयोग जब किए गए कार्य दोहरा फल देते हैं।
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सर्वार्थ सिद्धि योग – यह योग सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला होता है।
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शनि जयंती – न्याय के देवता शनि महाराज की जयंती पर उनकी उपासना करने से पापों का नाश होता है।
कृतिका नक्षत्र में न करें ये कार्य:
कृतिका नक्षत्र में चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहता है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं। यह नक्षत्र मिश्रित गुणों वाला होता है और नई शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि, प्रतिस्पर्धात्मक कार्य, धातु से जुड़े व्यापार या साहसिक निर्णयों के लिए यह समय अच्छा हो सकता है।
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आज का पंचांग: शनि अमावस्या पर बन रहा द्विपुष्कर योग, शुभ कार्यों के लिए चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें
Dharm Desk
इसे शनि अमावस्या भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन शनि देव की जयंती भी मनाई जाती है। इसके साथ ही रोहिणी व्रत, द्विपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग इसे और अधिक फलदायी बना देता है। हालांकि, यह तिथि अंधकार से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए शुभ कार्यों के लिए चंद्रोदय की प्रतीक्षा करना उचित होगा।
ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व:
यह तिथि पूर्वजों के तर्पण, ध्यान, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस दिन माता काली की उपासना विशेष फलदायी होती है। साथ ही, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या भोजन देने से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
टिप: इस दिन विवाह, मुंडन या नए कार्य की शुरुआत से बचें।
आज का पंचांग – 27 मई 2025, मंगलवार
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विक्रम संवत: 2081
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माह: ज्येष्ठ
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: अमावस्या (प्रातः 8:31 बजे तक)
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वार: मंगलवार
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योग: सुकर्म
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नक्षत्र: कृतिका
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करण: नाग
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चंद्र राशि: वृषभ
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सूर्य राशि: वृषभ
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सूर्योदय: 05:54 AM
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सूर्यास्त: 07:18 PM
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चंद्रोदय: नहीं
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चंद्रास्त: 07:49 PM
आज के वर्जित समय:
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राहुकाल: 15:57 बजे से 17:38 बजे तक
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यमगंड: 10:56 बजे से 12:36 बजे तक
इन समयों में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
विशेष योग:
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द्विपुष्कर योग – एक ऐसा संयोग जब किए गए कार्य दोहरा फल देते हैं।
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सर्वार्थ सिद्धि योग – यह योग सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला होता है।
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शनि जयंती – न्याय के देवता शनि महाराज की जयंती पर उनकी उपासना करने से पापों का नाश होता है।
कृतिका नक्षत्र में न करें ये कार्य:
कृतिका नक्षत्र में चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहता है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं। यह नक्षत्र मिश्रित गुणों वाला होता है और नई शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि, प्रतिस्पर्धात्मक कार्य, धातु से जुड़े व्यापार या साहसिक निर्णयों के लिए यह समय अच्छा हो सकता है।
