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आज 10 जुलाई 2025 का पंचांग: श्रावण मास की गुरु पूर्णिमा पर करें देवी लक्ष्मी-सरस्वती की पूजा, मिलेगी शुभ फल की प्राप्ति
Dharam Desk
आज 10 जुलाई 2025, गुरुवार को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जिसे गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर माता लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह दिन धार्मिक अनुष्ठानों, गुरु पूजन और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष फलदायी है।
10 जुलाई 2025 का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
-
मास: आषाढ़
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पक्ष: शुक्ल
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वार: गुरुवार
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तिथि: पूर्णिमा (पूर्ण रात्रि)
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योग: एन्द्र
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नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा
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करण: विष्टि
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: मिथुन
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सूर्योदय: प्रातः 06:00 बजे
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सूर्यास्त: सायं 07:28 बजे
-
चंद्रोदय: सायं 07:20 बजे
-
चंद्रास्त: चंद्रास्त नहीं
गुरु पूर्णिमा विशेष: करें देवी पूजन और गुरु वंदना
-
यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने का पर्व है।
-
गुरु पूजन, ब्राह्मण भोज, और आध्यात्मिक साधना का अत्यंत महत्व है।
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साथ ही इस दिन माता लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती की पूजा करने से धन, विद्या और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: विजय की पूर्व भूमिका
-
आज चंद्रमा धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित है।
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यह नक्षत्र शुभ कार्यों की योजना और आरंभ के लिए उत्तम माना गया है।
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पूर्वाषाढ़ा का शाब्दिक अर्थ होता है—विजय से पहले की तैयारी।
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यह समय लक्ष्मी पूजन, नया कार्य शुरू करने, और संकल्प लेने के लिए आदर्श है।
आज का अशुभ समय (वर्जित काल)
| काल | समय |
|---|---|
| राहुकाल | दोपहर 02:25 बजे से 04:06 बजे तक |
| यमगंड | सुबह 06:00 से 07:41 बजे तक |
| गुलिक काल | 09:22 से 11:03 बजे तक |
उपाय: इन समयों में कोई नया कार्य, यात्रा या पूजन शुरू करने से बचें।
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आज 10 जुलाई 2025 का पंचांग: श्रावण मास की गुरु पूर्णिमा पर करें देवी लक्ष्मी-सरस्वती की पूजा, मिलेगी शुभ फल की प्राप्ति
Dharam Desk
10 जुलाई 2025 का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
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मास: आषाढ़
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पक्ष: शुक्ल
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वार: गुरुवार
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तिथि: पूर्णिमा (पूर्ण रात्रि)
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योग: एन्द्र
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नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा
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करण: विष्टि
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: मिथुन
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सूर्योदय: प्रातः 06:00 बजे
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सूर्यास्त: सायं 07:28 बजे
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चंद्रोदय: सायं 07:20 बजे
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चंद्रास्त: चंद्रास्त नहीं
गुरु पूर्णिमा विशेष: करें देवी पूजन और गुरु वंदना
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यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने का पर्व है।
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गुरु पूजन, ब्राह्मण भोज, और आध्यात्मिक साधना का अत्यंत महत्व है।
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साथ ही इस दिन माता लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती की पूजा करने से धन, विद्या और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: विजय की पूर्व भूमिका
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आज चंद्रमा धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित है।
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यह नक्षत्र शुभ कार्यों की योजना और आरंभ के लिए उत्तम माना गया है।
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पूर्वाषाढ़ा का शाब्दिक अर्थ होता है—विजय से पहले की तैयारी।
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यह समय लक्ष्मी पूजन, नया कार्य शुरू करने, और संकल्प लेने के लिए आदर्श है।
आज का अशुभ समय (वर्जित काल)
| काल | समय |
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| राहुकाल | दोपहर 02:25 बजे से 04:06 बजे तक |
| यमगंड | सुबह 06:00 से 07:41 बजे तक |
| गुलिक काल | 09:22 से 11:03 बजे तक |
उपाय: इन समयों में कोई नया कार्य, यात्रा या पूजन शुरू करने से बचें।
