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आज का पंचांग : वैशाख कृष्ण चतुर्दशी पर बन रहा शुभ संयोग, जानें पूजा मुहूर्त और राहुकाल का समय
धर्म डेस्क
गुरुवार को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, इन्द्र योग और मासिक शिवरात्रि का संयोग; दिनभर रहेंगे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष मुहूर्त
16 अप्रैल 2026, गुरुवार को वैशाख कृष्ण चतुर्दशी तिथि के साथ धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन मासिक शिवरात्रि का पर्व भी मनाया जा रहा है, जिसे शिव उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दिनभर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, इन्द्र योग और बाद में वैधृति योग का प्रभाव रहेगा, जिससे धार्मिक अनुष्ठानों और साधना के लिए यह दिन विशेष माना जा रहा है।
पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि सायं 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि का आरंभ होगा। चंद्रमा दिन-रात मीन राशि में संचरण करेगा, जबकि दोपहर 1 बजकर 59 मिनट के बाद रेवती नक्षत्र का प्रभाव शुरू हो जाएगा। सूर्योदय सुबह 5:55 बजे और सूर्यास्त शाम 6:47 बजे दर्ज किया गया है।
दिन के महत्वपूर्ण मुहूर्तों में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए अनुकूल समय है। अमृत काल सुबह 9 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
वहीं, अशुभ काल में राहुकाल दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा, इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक और यमगंड सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसके स्वामी शनिदेव माने जाते हैं। यह नक्षत्र शांत, आध्यात्मिक और एकांतप्रिय प्रवृत्ति का प्रतीक है। इसके बाद रेवती नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा, जिसका संबंध समृद्धि और यात्रा से जोड़ा जाता है।
धार्मिक दृष्टि से आज का दिन शिव उपासना के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इसके साथ ही चने की दाल का दान करने से जीवन में सकारात्मकता और संतुलन आने की मान्यता है।
कुल मिलाकर, आज का पंचांग धार्मिक गतिविधियों, व्रत-उपवास और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण संयोग प्रस्तुत कर रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
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आज का पंचांग : वैशाख कृष्ण चतुर्दशी पर बन रहा शुभ संयोग, जानें पूजा मुहूर्त और राहुकाल का समय
धर्म डेस्क
16 अप्रैल 2026, गुरुवार को वैशाख कृष्ण चतुर्दशी तिथि के साथ धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन मासिक शिवरात्रि का पर्व भी मनाया जा रहा है, जिसे शिव उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दिनभर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, इन्द्र योग और बाद में वैधृति योग का प्रभाव रहेगा, जिससे धार्मिक अनुष्ठानों और साधना के लिए यह दिन विशेष माना जा रहा है।
पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि सायं 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि का आरंभ होगा। चंद्रमा दिन-रात मीन राशि में संचरण करेगा, जबकि दोपहर 1 बजकर 59 मिनट के बाद रेवती नक्षत्र का प्रभाव शुरू हो जाएगा। सूर्योदय सुबह 5:55 बजे और सूर्यास्त शाम 6:47 बजे दर्ज किया गया है।
दिन के महत्वपूर्ण मुहूर्तों में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए अनुकूल समय है। अमृत काल सुबह 9 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
वहीं, अशुभ काल में राहुकाल दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा, इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक और यमगंड सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसके स्वामी शनिदेव माने जाते हैं। यह नक्षत्र शांत, आध्यात्मिक और एकांतप्रिय प्रवृत्ति का प्रतीक है। इसके बाद रेवती नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा, जिसका संबंध समृद्धि और यात्रा से जोड़ा जाता है।
धार्मिक दृष्टि से आज का दिन शिव उपासना के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इसके साथ ही चने की दाल का दान करने से जीवन में सकारात्मकता और संतुलन आने की मान्यता है।
कुल मिलाकर, आज का पंचांग धार्मिक गतिविधियों, व्रत-उपवास और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण संयोग प्रस्तुत कर रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
