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आज का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण नवमी पर सीमित शुभ मुहूर्त, राहुकाल में बड़े निर्णय टालने की सलाह
धर्म डेस्क
वृश्चिक राशि में चंद्रमा का गोचर, अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव; पूजा, यात्रा और निवेश के समय को लेकर ज्योतिषीय निर्देश जारी
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर बुधवार को जारी पंचांग के अनुसार देशभर में धार्मिक अनुष्ठान, व्रत और संकल्प से जुड़े कार्यों के लिए समय-चयन को विशेष महत्व दिया गया है। सूर्योदय 07:03 बजे हुआ, जबकि चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार राहुकाल दोपहर 12:36 से 01:59 बजे तक रहेगा, जिसे परंपरागत रूप से नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
पंचांग के अनुसार कृष्ण नवमी तिथि प्रातः 09:58 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके पश्चात दिन के अन्य करणों का प्रभाव आरंभ होगा। सूर्य और मंगल मकर राशि में स्थित हैं, जबकि बुध, शुक्र और राहु का योग कुंभ राशि में बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह ग्रह-संयोग अनुशासन, धैर्य और योजनाबद्ध प्रयासों को प्रोत्साहित करता है, जिससे कार्यों में स्थिरता आने की संभावना रहती है।
आज चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में प्रातः 10:53 बजे तक स्थित रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह नक्षत्र समर्पण, संयम और संबंधों में संतुलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक विद्वानों का मत है कि इस अवधि में ध्यान, जप और संकल्प से जुड़े कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।
धार्मिक परंपराओं में नवमी तिथि आत्मचिंतन और आंतरिक अनुशासन से जुड़ी मानी जाती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धालु इस दिन प्रार्थना, व्रत और शांत मन से दिनचर्या का पालन करते हैं। कई स्थानों पर विशेष पूजा-अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है, जिन्हें सार्वजनिक आस्था से जुड़ी गतिविधियों के रूप में देखा जा रहा है।
दिन में अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, जबकि अमृत काल 12 फरवरी की भोर 03:52 से 05:39 बजे तक रहेगा। कार्य-संचालन के लिए दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक का समय अपेक्षाकृत अनुकूल बताया गया है। वहीं यमगण्ड सुबह 08:26 से 09:49 बजे तक और गुलिकाल 11:12 से 12:36 बजे तक रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान ग्रह-स्थिति भावनात्मक संतुलन और धैर्य की परीक्षा ले सकती है। परंपरागत ज्योतिषीय मत के अनुसार समय की शुद्धता के साथ किया गया कार्य अधिक स्थायी फल देता है। इसी कारण पंचांग आधारित समय-निर्धारण को धार्मिक जीवन की महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका माना जाता है।
आने वाले दिनों में फाल्गुन मास के अन्य पर्व और ग्रह-परिवर्तन भी धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। पंचांग विशेषज्ञों ने संयम, अनुशासन और विवेकपूर्ण निर्णय को इस अवधि की प्रमुख आवश्यकता बताया है।
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