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भारत की धरती से ही कर सकेंगे कैलाश पर्वत के दर्शन, उत्तराखंड सरकार की पहल
Jagran Desk
उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने राज्य की धरती से कैलाश पर्वत के दर्शन कराने की शुरुआत कर दी है. इसके तहत तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे ने बुधवार को दर्शन किए
अगर आप भी कैलाश पर्वत के दर्शन करना चाहते हैं तो आपकी ये ख्वाहिश अब उत्तराखंड में ही पूरी हो सकती है. क्योंकि उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने 'भारतीय धरती से माउंट कैलाश दर्शन' तीर्थयात्रा शुरू की है, जिसके तहत तीर्थयात्री अब राज्य के पिथौरागढ़ जिले में ओम पर्वत के साथ-साथ पुरानी लिपुलेख चोटी से कैलाश पर्वत का दर्शन कर सकते हैं.
2 अक्टूबर को रवाना हुआ पहला जत्था
इस तीर्थयात्रा के तहत तीर्थयात्रियों का पहला जत्था गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के दिन रवाना हुआ. इसके बाद इस जत्थे ने 3 अक्टूबर को ओम पर्वत के साथ पुराने लिपुलेख शिखर से राजसी कैलाश पर्वत के दर्शन किया. मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, तीर्थयात्री 4 अक्टूबर को पिथौरागढ लौटने से पहले गुंजी पिथौरागढ से आदि कैलाश के दर्शन करेंगे. सीएमओ ने कहा कि पैकेज में केएमवीएन या होमस्टे में आवास के साथ पिथौरागढ़ से गुंजी और वापसी के लिए हेलीकॉप्टर टिकट शामिल हैं.
पहले जत्थे में शामिल हुए पांच तीर्थ यात्री
जानकारी के मुताबिक, इस तीर्थयात्रा के पहले जत्थे में पांच तीर्थयात्रियों ने कैलाश पर्वत के दर्शन किए. इन पांच तीर्थयात्रियों में भोपाल के नीरज मनोहर लाल चौकसे और मोहिनी नीरज चौकसे अपने देवता के निवास को देखकर अभिभूत हो गए. नीरज चौकसे ने इस मार्ग को खोलने के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह दुनिया भर के शिव भक्तों के लिए वरदान साबित होगा. चंडीगढ़ के अमनदीप कुमार जिंदल ने अपने सौभाग्य को धन्यवाद देते हुए कहा कि मौसम साफ होने के कारण उन्हें पुराने लिपुलेख से कैलाश पर्वत के बिल्कुल स्पष्ट दर्शन हो सके.
कैसे हुई इस बिन्दु की खोज
बता दें कि वह बिंदु जहां से कैलाश पर्वत साफ दिखाई देता है, उसे कुछ महीने पहले उत्तराखंड पर्यटन, बीआरओ और आईटीबीपी के अधिकारियों की एक टीम ने खोजा था; जिसके बाद उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय धरती से कैलाश पर्वत, आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन को कवर करने वाला एक पैकेज टूर शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारी की गई.
क्या है धार्मिक मान्यता
पवित्र ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव के पांच निवास स्थान हैं, जिनमें से तीन- किन्नौर कैलाश, मणिमहेश और श्रीखंड महादेव हिमाचल प्रदेश में हैं, आदि कैलाश उत्तराखंड में है और कैलाश पर्वत चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है. उत्तराखंड पर्यटन ने पहली सफल यात्रा का आयोजन बुधवार को किया. जिसमें भारतीय धरती से कैलाश पर्वत, आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन शामिल थे. कैलाश पर्वत के दर्शन पुरानी लिपुलेख चोटी से किए गए, जहां से तीर्थयात्री भारतीय धरती से अपने पूज्य देवता को नमन कर सकेंगे.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा
मुख्यमंत्री शपुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारतीय धरती से कैलाश पर्वत के दर्शन की शुरुआत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी विभागों को बधाई दी। उन्होंने आगे कहा कि अब शिव भक्तों को कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के लिए अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे भारतीय क्षेत्र से ही अपने दर्शन कर सकेंगे।
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भारत की धरती से ही कर सकेंगे कैलाश पर्वत के दर्शन, उत्तराखंड सरकार की पहल
Jagran Desk
अगर आप भी कैलाश पर्वत के दर्शन करना चाहते हैं तो आपकी ये ख्वाहिश अब उत्तराखंड में ही पूरी हो सकती है. क्योंकि उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने 'भारतीय धरती से माउंट कैलाश दर्शन' तीर्थयात्रा शुरू की है, जिसके तहत तीर्थयात्री अब राज्य के पिथौरागढ़ जिले में ओम पर्वत के साथ-साथ पुरानी लिपुलेख चोटी से कैलाश पर्वत का दर्शन कर सकते हैं.
2 अक्टूबर को रवाना हुआ पहला जत्था
इस तीर्थयात्रा के तहत तीर्थयात्रियों का पहला जत्था गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के दिन रवाना हुआ. इसके बाद इस जत्थे ने 3 अक्टूबर को ओम पर्वत के साथ पुराने लिपुलेख शिखर से राजसी कैलाश पर्वत के दर्शन किया. मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, तीर्थयात्री 4 अक्टूबर को पिथौरागढ लौटने से पहले गुंजी पिथौरागढ से आदि कैलाश के दर्शन करेंगे. सीएमओ ने कहा कि पैकेज में केएमवीएन या होमस्टे में आवास के साथ पिथौरागढ़ से गुंजी और वापसी के लिए हेलीकॉप्टर टिकट शामिल हैं.
पहले जत्थे में शामिल हुए पांच तीर्थ यात्री
जानकारी के मुताबिक, इस तीर्थयात्रा के पहले जत्थे में पांच तीर्थयात्रियों ने कैलाश पर्वत के दर्शन किए. इन पांच तीर्थयात्रियों में भोपाल के नीरज मनोहर लाल चौकसे और मोहिनी नीरज चौकसे अपने देवता के निवास को देखकर अभिभूत हो गए. नीरज चौकसे ने इस मार्ग को खोलने के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह दुनिया भर के शिव भक्तों के लिए वरदान साबित होगा. चंडीगढ़ के अमनदीप कुमार जिंदल ने अपने सौभाग्य को धन्यवाद देते हुए कहा कि मौसम साफ होने के कारण उन्हें पुराने लिपुलेख से कैलाश पर्वत के बिल्कुल स्पष्ट दर्शन हो सके.
कैसे हुई इस बिन्दु की खोज
बता दें कि वह बिंदु जहां से कैलाश पर्वत साफ दिखाई देता है, उसे कुछ महीने पहले उत्तराखंड पर्यटन, बीआरओ और आईटीबीपी के अधिकारियों की एक टीम ने खोजा था; जिसके बाद उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय धरती से कैलाश पर्वत, आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन को कवर करने वाला एक पैकेज टूर शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारी की गई.
क्या है धार्मिक मान्यता
पवित्र ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव के पांच निवास स्थान हैं, जिनमें से तीन- किन्नौर कैलाश, मणिमहेश और श्रीखंड महादेव हिमाचल प्रदेश में हैं, आदि कैलाश उत्तराखंड में है और कैलाश पर्वत चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है. उत्तराखंड पर्यटन ने पहली सफल यात्रा का आयोजन बुधवार को किया. जिसमें भारतीय धरती से कैलाश पर्वत, आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन शामिल थे. कैलाश पर्वत के दर्शन पुरानी लिपुलेख चोटी से किए गए, जहां से तीर्थयात्री भारतीय धरती से अपने पूज्य देवता को नमन कर सकेंगे.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा
मुख्यमंत्री शपुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारतीय धरती से कैलाश पर्वत के दर्शन की शुरुआत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी विभागों को बधाई दी। उन्होंने आगे कहा कि अब शिव भक्तों को कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के लिए अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे भारतीय क्षेत्र से ही अपने दर्शन कर सकेंगे।
