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करवा चौथ के बाद करवे का क्या करें? जानिए परंपरा, मान्यता और सही तरीका
Karwa Chauth
पूजा के बाद अक्सर यह सवाल सामने आता है कि करवे का क्या किया जाए। क्या इसे कहीं भी फेंक देना उचित है? धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पूजा में उपयोग किए गए करवे को सम्मानपूर्वक निपटाना चाहिए।
इस साल करवा चौथ का पर्व 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर का उपवास चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पति के हाथों से पानी पीकर खोला जाता है। इस दौरान मिट्टी के करवे का विशेष महत्व होता है, जिससे पूजा की जाती है।
पूजा के बाद अक्सर यह सवाल सामने आता है कि करवे का क्या किया जाए। क्या इसे कहीं भी फेंक देना उचित है? धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पूजा में उपयोग किए गए करवे को सम्मानपूर्वक निपटाना चाहिए। इसे फेंकना अशुभ माना जाता है। आइए जानते हैं करवे से जुड़ी सही परंपरा और मान्यताएं।
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नदी या तालाब में प्रवाहित करें
करवा चौथ की पूजा के बाद मिट्टी के करवे को पवित्र नदी या स्वच्छ तालाब में प्रवाहित करना एक पारंपरिक और शुभ तरीका माना गया है। ध्यान रखें कि करवा टूटे या खंडित न हो। बहाते समय मन में श्रद्धा होनी चाहिए। -
अगले वर्ष तक घर में रखें
कुछ महिलाएं पूजा के बाद करवा को संभालकर अगले करवा चौथ तक घर में रखती हैं। अगर आप भी ऐसा करना चाहें, तो करवे को साफ और पवित्र स्थान पर रखें। इसे घर के मंदिर या किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। -
किसी पवित्र वृक्ष के नीचे रखें
यदि नदी या तालाब उपलब्ध नहीं है, तो करवे को पीपल, नीम, बरगद या आम जैसे किसी पवित्र वृक्ष के नीचे रखा जा सकता है। यह भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है और कई क्षेत्रों में यही प्रचलन है।
हर महिला अपनी सुविधा, स्थानीय परंपरा और श्रद्धा के अनुसार इनमें से किसी भी एक तरीके का पालन कर सकती है। करवे का सम्मानपूर्वक निपटान न केवल धार्मिक दृष्टि से उचित है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण और सांस्कृतिक मूल्यों का भी आदर है।
करवा चौथ केवल उपवास नहीं, बल्कि आस्था और रिश्ते की मजबूती का पर्व है। ऐसे में इससे जुड़ी हर परंपरा को पूरी श्रद्धा और विधि से निभाना चाहिए
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करवा चौथ के बाद करवे का क्या करें? जानिए परंपरा, मान्यता और सही तरीका
Karwa Chauth
इस साल करवा चौथ का पर्व 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर का उपवास चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पति के हाथों से पानी पीकर खोला जाता है। इस दौरान मिट्टी के करवे का विशेष महत्व होता है, जिससे पूजा की जाती है।
पूजा के बाद अक्सर यह सवाल सामने आता है कि करवे का क्या किया जाए। क्या इसे कहीं भी फेंक देना उचित है? धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पूजा में उपयोग किए गए करवे को सम्मानपूर्वक निपटाना चाहिए। इसे फेंकना अशुभ माना जाता है। आइए जानते हैं करवे से जुड़ी सही परंपरा और मान्यताएं।
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नदी या तालाब में प्रवाहित करें
करवा चौथ की पूजा के बाद मिट्टी के करवे को पवित्र नदी या स्वच्छ तालाब में प्रवाहित करना एक पारंपरिक और शुभ तरीका माना गया है। ध्यान रखें कि करवा टूटे या खंडित न हो। बहाते समय मन में श्रद्धा होनी चाहिए। -
अगले वर्ष तक घर में रखें
कुछ महिलाएं पूजा के बाद करवा को संभालकर अगले करवा चौथ तक घर में रखती हैं। अगर आप भी ऐसा करना चाहें, तो करवे को साफ और पवित्र स्थान पर रखें। इसे घर के मंदिर या किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। -
किसी पवित्र वृक्ष के नीचे रखें
यदि नदी या तालाब उपलब्ध नहीं है, तो करवे को पीपल, नीम, बरगद या आम जैसे किसी पवित्र वृक्ष के नीचे रखा जा सकता है। यह भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है और कई क्षेत्रों में यही प्रचलन है।
हर महिला अपनी सुविधा, स्थानीय परंपरा और श्रद्धा के अनुसार इनमें से किसी भी एक तरीके का पालन कर सकती है। करवे का सम्मानपूर्वक निपटान न केवल धार्मिक दृष्टि से उचित है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण और सांस्कृतिक मूल्यों का भी आदर है।
करवा चौथ केवल उपवास नहीं, बल्कि आस्था और रिश्ते की मजबूती का पर्व है। ऐसे में इससे जुड़ी हर परंपरा को पूरी श्रद्धा और विधि से निभाना चाहिए
