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विवाह से पहले दुल्हन को क्यों बांधी जाती है हल्दी की गांठ, जानें इसका कारण और लाभ, क्या है इसका महत्व?
Dharm Desk
शादी से पहले दुल्हन को हल्दी की गांठ बांधी जाती है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है लेकिन इसका कारण क्या है यह आप इस खबर में जानेंगे.
हिन्दू धर्म में विवाह में अनगिनत रस्मों और रिवाजों को निभाया जाता है. इनमें से कई तो क्षेत्रों के हिसाब से अलग भी होते हैं. लेकिन, इनका रीति रिवाजों और रस्मों का निभाया जाना भी जरूरी होता है, क्योंकि इसके बिना विवाह अधूरा माना जाता है. आपको बता दें कि, शादी की रस्में शुरू होने के साथ ही दुल्हन को हल्दी की गांठ बांधी जाती है. ऐसा कहा जाता है कि हल्दी की गांठ बांधना शुभ होता है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसके पीछे कई सारे कारण हैं, लेकिन यह बांधी क्यों जाती है और इसके लाभ क्या हैं? यह हम जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित योगेश चौरे से.
क्यों बांधी जाती है हल्दी की गठान?
सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि हल्दी की गठान सिर्फ दुल्हन को नहीं बांधी जाती. यह दूल्हे को भी बांधी जाती है, क्योंकि यह शुभता का प्रतीक है. इससे सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है. पंडित जी के अनुसार, दुल्हन की कलाई पर हल्दी की गांठ बांधी जाती है और शादी के बाद ही इसे खोला जाता है और यह काम पति को करना होता है वो भी एक हाथ से.
ऐसा माना जाता है कि जब पति बिना किसी सहायता से दुल्हन के हाथ में बंधी हल्दी की गठान को एक हाथ से खोल देता है तो उसके तालमेल अपनी पत्नी से अच्छे होते हैं. साथ ही दोनों के बीच मधुर रिश्ते बनते हैं और जीवन भी सुखमय होता है.
हल्दी की गांठ बांधने के लाभ
ऐसी मान्यता है कि हल्दी की गठान बांधने से नकारत्मक ऊर्जा आसपास नहीं रहती. हल्दी की गठान बांधन आपको बुरी नजर से बचाती है और ग्रहों को भी शांत रखने में मदद करती है. हल्दी को संपन्नता का प्रतीक माना जाता है और दुल्हन जब ससुराल जाती है तो वहां भी सुख-समृद्धि बनी रहे, इसलिए हल्दी की गठान बांधी जाती है.
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विवाह से पहले दुल्हन को क्यों बांधी जाती है हल्दी की गांठ, जानें इसका कारण और लाभ, क्या है इसका महत्व?
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हिन्दू धर्म में विवाह में अनगिनत रस्मों और रिवाजों को निभाया जाता है. इनमें से कई तो क्षेत्रों के हिसाब से अलग भी होते हैं. लेकिन, इनका रीति रिवाजों और रस्मों का निभाया जाना भी जरूरी होता है, क्योंकि इसके बिना विवाह अधूरा माना जाता है. आपको बता दें कि, शादी की रस्में शुरू होने के साथ ही दुल्हन को हल्दी की गांठ बांधी जाती है. ऐसा कहा जाता है कि हल्दी की गांठ बांधना शुभ होता है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसके पीछे कई सारे कारण हैं, लेकिन यह बांधी क्यों जाती है और इसके लाभ क्या हैं? यह हम जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित योगेश चौरे से.
क्यों बांधी जाती है हल्दी की गठान?
सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि हल्दी की गठान सिर्फ दुल्हन को नहीं बांधी जाती. यह दूल्हे को भी बांधी जाती है, क्योंकि यह शुभता का प्रतीक है. इससे सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है. पंडित जी के अनुसार, दुल्हन की कलाई पर हल्दी की गांठ बांधी जाती है और शादी के बाद ही इसे खोला जाता है और यह काम पति को करना होता है वो भी एक हाथ से.
ऐसा माना जाता है कि जब पति बिना किसी सहायता से दुल्हन के हाथ में बंधी हल्दी की गठान को एक हाथ से खोल देता है तो उसके तालमेल अपनी पत्नी से अच्छे होते हैं. साथ ही दोनों के बीच मधुर रिश्ते बनते हैं और जीवन भी सुखमय होता है.
हल्दी की गांठ बांधने के लाभ
ऐसी मान्यता है कि हल्दी की गठान बांधने से नकारत्मक ऊर्जा आसपास नहीं रहती. हल्दी की गठान बांधन आपको बुरी नजर से बचाती है और ग्रहों को भी शांत रखने में मदद करती है. हल्दी को संपन्नता का प्रतीक माना जाता है और दुल्हन जब ससुराल जाती है तो वहां भी सुख-समृद्धि बनी रहे, इसलिए हल्दी की गठान बांधी जाती है.
