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प्रेम संबंध में विश्वासघात बना हत्या की वजह: शेरोन राज हत्याकांड में कॉलेज छात्रा को फांसी
सत्यकथा, तिरुवनंतपुरम
नेय्यातिनकारा अदालत ने ढाई साल पुराने मामले में सुनाया ऐतिहासिक फैसला, अपराध को ‘दुर्लभतम’ की श्रेणी में रखा
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प्रेम संबंध में विश्वासघात बना हत्या की वजह: शेरोन राज हत्याकांड में कॉलेज छात्रा को फांसी
सत्यकथा, तिरुवनंतपुरम
केरल के बहुचर्चित शेरोन राज हत्याकांड में नेय्यातिनकारा की अतिरिक्त जिला अदालत ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए 24 वर्षीय कॉलेज छात्रा ग्रीष्मा नायर को मौत की सजा दी। अदालत ने माना कि यह अपराध न केवल सुनियोजित था, बल्कि इसमें प्रेम और भरोसे का घोर दुरुपयोग हुआ, जो इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में रखता है।
यह फैसला 20 जनवरी को सुनाया गया। सुबह से ही अदालत परिसर में भारी भीड़ मौजूद थी। करीब ढाई साल पुराने इस मामले ने राज्य ही नहीं, बल्कि देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की थी।
क्या है मामला
अभियोजन के अनुसार, 10 अक्टूबर 2022 को ग्रीष्मा ने अपने प्रेमी शेरोन राज को कन्याकुमारी स्थित अपने घर बुलाया। वहां उसने आयुर्वेदिक शरबत में खरपतवार नाशक जहरीला रसायन मिलाकर उसे पिला दिया। कुछ ही घंटों में शेरोन की हालत बिगड़ने लगी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 15 दिनों तक इलाज चला, लेकिन 25 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर दिए जाने की पुष्टि के बाद 28 अक्टूबर 2022 को ग्रीष्मा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया और 31 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
कौन थे शेरोन और ग्रीष्मा
शेरोन राज, 25 वर्ष का था और तिरुवनंतपुरम जिले के वारसाला गांव का निवासी था। वह कन्याकुमारी के एक निजी कॉलेज में रेडियोलॉजी की पढ़ाई कर रहा था। ग्रीष्मा उसी कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य की छात्रा थी। ट्रेन से कॉलेज आने-जाने के दौरान दोनों की पहचान हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई।
क्यों बना रिश्ता हत्या की वजह
मार्च 2022 में ग्रीष्मा के परिवार ने उसकी सगाई नागरकोइल निवासी एक सैन्य अधिकारी से तय कर दी। इसके बाद उसने शेरोन से दूरी बनानी शुरू की। अभियोजन के मुताबिक, शेरोन रिश्ता खत्म करने को तैयार नहीं था। ग्रीष्मा को आशंका थी कि उसका अतीत सामने आने से उसकी होने वाली शादी टूट सकती है। इसी डर ने उसे हत्या की ओर धकेला।
पहले भी हो चुका था प्रयास
जांच में सामने आया कि ग्रीष्मा ने पहले भी शेरोन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। उसने पानी और दूध में नींद की गोलियां और दवाइयां मिलाकर देने का प्रयास किया, लेकिन तब शेरोन बच गया।
अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने 586 पन्नों के फैसले में कहा कि आरोपी की उम्र, शिक्षा, सामाजिक पृष्ठभूमि या पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड का न होना इस अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान लगाए गए यौन शोषण के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिले।
अन्य आरोपियों पर फैसला
मामले में सबूत नष्ट करने के आरोप में ग्रीष्मा के मामा निर्मलाकुमारन नायर को आईपीसी की धारा 201 के तहत तीन साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। वहीं, ग्रीष्मा की मां सिंधु को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
यह फैसला केरल की आपराधिक न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है और इसने प्रेम संबंधों में अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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