सत्यकथा: जिसकी टैक्सी में सवार होकर पति से मिलने जाती थी उसी टैक्सी ड्राइवर के साथ भाग गई बैंक मैनेजर की पत्नी

अलवर

By Rohit.P
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शादीशुदा जोड़े जितना संभव हो सके एक दूसरे के साथ रहें। वर्ना तनहाई के अंधेरे में कभी जवान उम्र बहक जाती है तो कभी जवां दिल।

कहने को तो लोग जयपुर को गुलाबी नगर कहा करते हैं। लेकिन मई की तपती दोपहरी में घर की खिड़की से आती गर्म हवा के थपेड़ों से बेखबर दूर तक फैली रेत को निहारते कर्णव खत्री को अपने जीवन की कहानी भी तपते रेत के टीलों सी नजर आ रही थी।

वह फैसला नहीं कर पा रहे थे कि कल्पना, जिसके साथ उन्होंने जवानी का एक लंबा दौर गुजारा था, के खिलाफ पुलिस में जाएं भी या नहीं।

अनिर्णय की स्थिति में फंसे  कर्णव को अपने उस निर्णय पर भी पछतावा हो रहा था जब उन्होंने कल्पना को उसकी गलती माफ कर दूसरी बार अपनी जिंदगी में वही जगह दी थी जो आठ साल पहले हुई शादी के बाद दी थी। अब कल्पना माफ करने के उनके फैसले को गलत साबित करते हुए एक बार फिर उसी रास्ते पर निकल चुकी थी जिस पर चलने के बाद वह वापस लौटी थी।

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रिपोर्ट दर्ज करवाने और न करवाने के फैसले के बीच कर्णव हफ्ते भर तक पशोपेश में रहे लेकिन अंत में अपने दो बच्चों का भविष्य देखते हुए 7 मार्च को उन्होंने अपनी पत्नी कल्पना ... बदला नाम .... के राजगढ़ इलाका निवासी टैक्सी ड्राइवर त्र्ऋषभ शर्मा के साथ भागने और उन दोनों ने अपनी जान को खतरा होने की रिपोर्ट दर्ज करवा दी।

7 मार्च 2026 को दर्ज करवाई गई अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी घर से भागते समय लगभग 50 लाख रूपए की संपति, जिसमें जेवर और नगदी दोनों शामिल हैं, लेकर गई है। इतना ही नहीं अपने पे्रमी के संग भागने के बाद कल्पना और उसका प्रेमी ऋषभ दोनों बार-बार फोन कर कर्णव को धमकियां भी दे रहे हैं।

पुलिस ने कर्णव की रिपोर्ट दर्ज कर प्रेमी ऋषभ शर्मा के साथ फरार उसकी पत्नी कल्पना की तलाश आरंभ कर दी। लेकिन महीना भर बीत जाने के बाद भी उनकी कोई खबर नहीं लगा। लेकिन इसी बीच अचानक कल्पना और उसका प्रेमी दोनों एसपी जयपुर के सामने पेश हो गए। यह जानकारी लगते ही एनईबी थाना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद कल्पना को जेल भेज दिया गया जबकि उसके प्रेमी ऋषभ को रिमांड पर लेकर पुलिस ने उससे गहराई से पूछताछ की जिसमें पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई।

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एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर के पद पर पदस्थ कर्णव खत्री मूल रूप से अलवर का रहने वाला है। भले स्वभाव का हमेशा शांत रहने वाला कर्णव अपने दोस्तों और रिश्तेदारों का चहेता था। इसलिए जब परिवार वालों ने उसके रिश्ते के लिए लड़की की तलाश शुरू की तो उसके सामने दर्जनों परिवारों के प्रस्ताव की लाइन लग गई। जिनमें से काफी सोच विचार के बाद उसने गोविंदगढ़ निवासी कल्पना अरोड़ा को जीवन साथी के रूप में पसंद किया। कल्पना और उसके परिवार वाले भी इस रिश्ते के लिए पहले से ही राजी थे। इसलिए कर्णव के हां कहते ही 2018 में धूमधाम से दोनों की शादी कर दी गई।

शादी के बाद कुछ महीने तो हंसी खुशी से बीते लेकिन उसके बाद जब कल्पना को अलवर में छोड़कर कर्णव जयपुर अपनी नौकरी पर चला गया तो कल्पना और कर्णव दोनों को ही एक दूसरे से यह दूरी जरा भी पसंद नहीं आ रही थी। खासकर कल्पना बिना कर्णव के बैचेन हो उठी। इसका एक कारण कल्पना की कैमिस्ट्री में अत्यधिक वासना का होना था। उसे पुरूष का संग किए बिना नींद नहीं आती थी। अपितु यह स्थिति शादी से पूर्व नहीं थी लेकिन शादी के बाद महीने दो महीने के साथ में ही कर्णव ने कल्पना को इतना प्यार दिया कि उसके शरीर को पुरूष रोज की जरूरत बन चुका था। कर्णव को भी कल्पना के बिना चैन नहीं पड़ता था इसलिए पहले तो वह हर दो-तीन दिन में जयपुर से अलवर आता और पत्नी के संग रात बिता कर सुबह होते की बैंक के लिए जयपुर निकल जाता।

लेकिन हफ्ते में दो तीन दिन का साथ कर्णव के लिए भले की बहुत था मगर कल्पना को सात में सात रात  पति अपने पास चाहिए होता था। लेकिन मजबूरी आदमी से सब करवा देती है। इसलिए धीरे-धीरे कल्पना ने भी अपने मन को इस परिस्थिती में ढाल लिया था।

समय के साथ कल्पना दो बच्चों की मां बन गए। इसके बावजूद कल्पना के मन से भले की न उतरा हो लेकिन कर्णव के मन से शादी का नशा जो शुरूआती दौर में हर एक के मन में छाया रहता है, उतर चुका था। इसलिए पहले वह जहां हफ्ते में दो-तीन रात अपनी पत्नी के पास अलवर में आकर बिताता था वहीं अब वह केवल रविवार से रविवार अलवर आने लगा। हां इस बीच कभी कोई अन्य तीज-त्यौहार का अवकाश मिल जाए तो कर्णव अलवर आना नहीं भूलता था।

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लेकिन वक्त के साथ कर्णव को प्रमोशन मिल जाने से उसकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही थी ऐसे में कई बार रविवार के दिन भी उसे अलवर आकर पत्नी के साथ समय बिताना मुश्किल होने लगा। खासकर क्वार्टरली, हॉफ ईयरी और मार्च क्लोजिंग के दौरान तो उसका बैंक छोड़ना मुश्किल ही रहता था।

कल्पना उससे शिकायत करती तो कर्णव उसे समझाने की कोशिश करता कि यार कब तक वो बीस-बाईस साल के दौर में जीती रहोगी। दो बच्चे है और अब हमारे ऊपर जिम्मेदारियां बढ़ रही है इसलिए खुद पर काबू रखो। लेकिन पति के लाख समझाने पर भी कल्पना को यह बात समझ में नहीं आ रही थी। दरअसल इसमें गलती कल्पना की नहीं उसकी अपनी जैविक कैमिस्ट्री थी जिसके चलते शारीरिक संतुष्टि उसकी पहली जरूरत थी।

कर्णव जानता था कि कल्पना चाह कर भी खुद पर काबू नहीं रख पाती इसलिए यह हल निकाला गया कि अगर कभी कर्णव बैंक की व्यस्तता की वजह से अलवर न आ पाए तो खुद कल्पना अलवर से जयपुर आ जाया करेगी। कल्पना के लिए यह फैसला उसके मन को खुशी देने वाला था और कर्णव कल्पना की खुशी में खुश था। लेकिन दोनों को नहीं मालूम था कि उनका यह फैसला भविष्य में क्या कुछ गुल खिलाने वाला है।

हुआ यह कि कल्पना खुद जयपुर जाने लगी तो कर्णव बेफ्रिक हो गया। वह अब भी समय मिलता तो अलवर आता था लेकिन कल्पना को जयपुर को छूट मिली तो वह आए दिन पति के साथ क्लालिटी टाइम बिताने जयपुर आने लगी। शुरू में कई बार कल्पना ने यह रास्ता बस से तो कभी ट्रेन से तय किया लेकिन जब देखा कि इसमें कई मुश्किलों को सामना करना पड़ता है तो पति की सलाह पर वह टैक्सी बुक कर अलवर से जयपुर आने लगी।

इसी दौरान उसने एक रोज राजगढ़ इलाके में रहने वाले ऋषभ शर्मा की टैक्सी जयपुर जाने के लिए किराये पर ली। लेकिन अजीब संयोग हुआ कि दो दिन बाद ही जब वह फिर जयपुर जाने घर से निकली तो उसे ऋषभ की ही टैक्सी मिली। यह देखकर ऋषभ ने उससे पूछा मैम क्या आप जयपुर में नौकरी करती हैं?

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नहीं मेरे पति वहां बैंक मैनेजर हैं। उनको अक्सर काम की वजह से अलवर आने का समय नहीं मिलता इसलिए मैं जयपुर चली जाती हूं।

पहली बार इससे ज्यादा दोनों के बीच कोई और बात नहीं हुई। लेकिन कोई दस दिन बाद एक बार फिर कल्पना ने ऋषभ की टैक्सी ली तो ऋषभ ने कल्पना को अपना मोबाइल नंबर देते हुए कहा मैम आपको जब भी टैक्सी चाहिए मुझे फोन कर दिया करें। मैं आपकी सुविधा के अनुसार आपको घर से ही ले लिया करूंगा।

यह तो अच्छी बात है कहते हुए कल्पना ने उसका नंबर ले लिया।

आप वापस भी टैक्सी से ही आती हैं क्या?

हां।

अभी कब वापस लौटना होगा?

कल सुबह कोई 9 बजे।

तब ठीक है आप मुझे फोन कर ले। अगर मुझे कोई दूसरी सवारी नहीं मिली तो आपको वापस ले चलूंगा।

ओके तुम क्या अलवर में रहते हो?

जी राजगढ़ इलाके में यहां मेरे नाना रहते हैं उन्हीं के साथ रहता हूं।

और तुम्हारे माता-पिता?

वो दोनों की अब दुनिया में नहीं रहे।

ओह। ऋषभ की बात सुनकर कल्पना ने उससे कहा।

कहना नहीं होगा कि अब कल्पना जब भी जयपुर जाती और जयपुर से अलवर वापस आती हमेशा ऋषभ की टैक्सी का उपयोग करने लगी। इससे धीरे-धीरे उनके बीच बातें औपचारिकता की सीमा से बाहर निकलकर भी होने लगी। ऐसे में एक रोज कल्पना ने उससे पूछा- तुम्हारी शादी हो गई क्या?

नहीं अभी तक तो नहीं।

क्यों, कोई बढ़ा भाई-बहन भी है क्या।

कोई नहीं। लेकिन कोई बात नहीं मैम मैने तो सुना है कि शादी के बाद आदमी की जिंदगी में परेशानियां और भी बढ़ जाती हैं।

गलत सुना है तुमने। मेरा तो मानना है कि आदमी को सही वक्त पर शादी जरूर कर लेना चाहिए। अब मुझे ही देख लो शादी को आठ साल होने को आए लेकिन हम पति-पत्नी में इतना प्यार है कि अभी भी हम दोनों दो-तीन से ज्यादा एक दूसरे से दूर नहीं रहते। कभी वो अलवर आ जाते है तो कभी मैं जयपुर।

भाई साहब किस्मत वाले है जो उनकी शादी आपसे हुई।

क्यों ऐसा क्या है मेरे मैं?

आप अपने पति को इतना प्यार जो करती हैं।

बस या कुछ और भी? कल्पना ने उसे छेड़ा।

सुंदर भी तो हैं आप, ऋषभ ने कुछ डरते हुए कहा।

हूं वो तो ठीक है, तुम्हें कैसी लगती हूं?

अच्छी।

बस अच्छी?

नहीं मेरा मतलब है बहुत अच्छी। खासकर जब आप वो नीला वाला सूट पहनकर आती है न तब तो लगता है...

क्या लगता है बात पूरी करो न?

आप नाराज तो नहीं होगी?

बिल्कुल नहीं।

लगता है जैसे नीले बादलों में चांद निकला हो।

ऋषभ की बात सुनकर कल्पना जोर से हंस पड़ी। बोली अरे ये चांद तारों वाली बातें बच्चों को अच्छी लगती है। खैर तुम्हारी शादी नहीं हुई न इसलिए तुम अभी केवल चांद तारे देखते हो। खैर तुम्हें नीले सूट में मैं अच्छी लगती हूं तो अगली बार वही पहनकर चलूंगी। सचमुच ही जब चार रोज के बाद कल्पना ने उसे जयपुर जाने के लिए बुलाया तो वही नीला सूट पहना जिसकी तारीफ ऋषभ ने की थी।

इस तरह धीरे-धीरे कल्पना और उस टैक्सी ड्राइवर ऋषभ के बीच बातों ही बातों में दूरी कम होती गई। जिसका नतीजा यह हुआ कि कल्पना जो पहले हमेशा पीछे वाली सीट पर बैठकर सफर करती थी अब आगे ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठकर सफर करने लगी। पूरे सफर के दौरान दोनों बातें करते रहते जिससे सफर भी आसानी से कटने लगा और उनके बीच के रिश्ते दोस्ती में बदलने लगे।

एक दिन जब कल्पना जयपुर से ऋषभ के साथ लौट रही थी तब रास्ते में अचानक की काफी जोर की बारिश होने लगी। कार चलाना मुश्किल था इसलिए ऋषभ ने एक पेड़ के नीचे कार रोक दी।

कितना सुंदर मौसम है, है न। कल्पना ने कहा।

जी।

अच्छा एक बात बताओ तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है।

थी लेकिन अब नहीं।

कहां चली गई?

उसकी शादी हो गई।

तुमने उसके साथ शादी करने की कोशिश नहीं की।

नहीं।

क्यों?

उसे गरीबी पसंद नहीं थी।

क्या यार ये अमीरी गरीबी, अच्छा एक बताओ, सच बताना।

पूछिए।

उस साथ कभी वो सब किया था।

हां, शर्माते हुए ऋषभ ने कहा तो कल्पना बोली बड़े छुपे रुस्तम निकले तुम तो मैं तो समझती थी कि तुम बहुत सीधे हो।

नहीं वो ऐसी बात नहीं है, उसने हकलाते हुए कहा तो कल्पना बीच में ही बोल पड़ी, अरे डरते क्यों हो अच्छा लगा तुमने सही बोला। लेकिन वो चली गई तो जाने दो कोई दूसरी खोज लो। तुम आदमी अच्छे हो हैंडसम भी हो कोई भी लड़की राजी हो जाएगी। भाई मैं तो सच कहती हूं कि मुझे कोई तुम्हारे जैसा लड़का लाईन मारे तो मैं तो आज भी इश्क करने राजी हो जाऊं।

कल्पना की बात सुनकर ऋषभ उसे देखता रह गया तो कल्पना बोला क्या देख रहे हो सचमुच लाईन मारने का इरादा है क्या?

नहीं ... नहीं .. तो।

ऋषभ का डर देख कल्पना बोली पागल कहीं के, और जोर से हंस पड़ी।

उस रोज घर पहुंचकर ऋषभ के कानों में वहीं एक शब्द गूंजता रहा, पागल कहीं के। उसे लगा कि शायद कल्पना तैयार थी उसने मना कर दिया इसीलिए उसने मुझे पागल कहा। अब क्या हो सकता था वक्त हाथ से निकल चुका था लेकिन उसने ठान लिया कि अब कभी ऐसा मौका आया तो वह पीछे नहीं हटेगा।

अगली बार ही कल्पना ने जब उसे जयपुर चलने बुलाया तो उसने वही नीला सूट पहन रखा था ऋषभ की पसंद का। यह देखकर शहर से बाहर निकलते ही ऋषभ ने कल्पना का हाथ थाम लिया। यह देखकर कल्पना ने उसका विरोध नहीं किया उल्टे अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया।

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प्यार की कहानी शुरू हो चुकी थी इसलिए जल्द ही एक रोज जयपुर से वापस आते समय टैक्सी में ही उनके बीच शारीरिक संबंध भी बन गए। जिसके बाद तो यह हर बार की बात हो गई। कभी जयपुर जाते समय तो कभी वहां से वापस आते समय तो कभी आते में भी और जाते मैं भी उनके बीच टैक्सी में ही वासना का खेल खेला जाने लगा।

खुद कर्णव का अभी भी सनडे और दूसरी छुट्टी के दिन अलवर आना जारी था। हां यह जरूर है कि कल्पना को अब पति का अलवर आना पसंद नहीं था। इसलिए ऋषभ के साथ मिलने का मौका मिल सके इसलिए कई बार रविवार को भी कल्पना ही जयपुर चली आती थी।

कल्पना को अपने से उम्र में छोटा और पति की तुलना मैं कहीं बहुत अधिक यंग प्रेमी मिला तो वह उसकी दीवानी हो गई। ऋषभ को तो कल्पना का साथ मिलना लॉटरी लगने जैसा था क्योंकि अब वह उसके ऊपर पैसा भी लुटाने लगी थी। इसलिए एक दूसरे के प्रति उनकी दीवानगी का आलम यह हो गया कि वे दोनों कर्णव को रास्ते से हटाकर एक दूसरे के होकर जीने का सपना ही नहीं देखने लगे बल्कि कर्णव से छुटकारा कैसे मिले इसकी योजना भी बनाने लगे।

लेकिन किसी की हत्या करना आसान तो नहीं होता। इसलिए दोनों मौके की तलाश करने लगे। इसी बीच संयोग से एक दिन रविवार को जब कर्णव जयपुर से अपनी पत्नी और बच्चों के पास अलवर आ रहा था तब संयोग से उसने ऋषभ की टैक्सी किराये पर ली। ऋषभ, कर्णव को और कर्णव ऋषभ को जानता था।

कर्णव को लेकर ऋषभ अलवर की तरफ चला तो देखा के थका-हारा कर्णव पीछे की सीट पर आंख बंद कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद ऋषभ ने देखा कि कर्णव सो गया है तो उसने मोबाइल निकालकर कल्पना को फोन कर बताया कि उसका पति आज उसकी टैक्सी में आ रहा है। सो रहा है कहो तो इसे आज ही ठिकाने लगा दें।

लेकिन जिस कर्णव को ऋषभ सोया हुआ समझ रहा था वह जागा हुआ था इसलिए उसने जब यह बात सुनी तो समझ गया कि ड्राइवर उसकी पत्नी से बात कर रहा है। इसलिए वह और गहरी नींद में सोने का नाटक करने लगा। अपितु फोन पर कल्पना ने अपने प्रेमी को हत्या करने से तो रोक दिया लेकिन यह जानकर की पति टैक्सी में सो रहा है उसके साथ प्यार भरी अश्लील बातें करने लगी। ऋषभ भी अपनी प्रेमिका की बात का जबाव दे रहा था। इसलिए ड्राइवर के साथ पत्नी की अश्लील बातें सुनकर कर्णव सब समझ गया। उसने दोनों की बातें रिकार्ड कर ली। लेकिन घर पहुंचकर कल्पना से कुछ नहीं कहा।

अगले एक महीने तक कर्णव सबूत जुटाने में लगा रहा। उसने दोनों के मोबाइल फोन की डिटेल के अलावा काल रिकार्डिंग भी प्राप्त करने के बाद जब इस बारे में कल्पना से बात की तो कल्पना झगड़ा करने पर उतर आई। उसने कर्णव से 50 लाख की मांग करते हुए तलाक मांग लिया। इतना ही नहीं खुद बीवी का प्रेमी टैक्सी ड्राइवर भी कर्णव को धमकाने लगा। जिससे विवाद बढ़ने लगा तो एक रोज दिसंबर में कल्पना घर छोड़कर ऋषभ के साथ भाग गई।

कर्णव ने अपने स्तर पर उसे खोजने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुआ। लेकिन इसी बीच फरवरी महीने में कल्पना अचानक वापस आ गई तो कर्णव ने उसकी गलती माफ करते हुए अपने साथ रख लिया। लेकिन कल्पना किसी और ही योजना के तहत वापस आई थी। मार्च के महीने में वह घर से लगभग 50 लाख के जेवर और नगदी समेटने के अलावा अपने छोटे बेटे को साथ लेकर फिर प्रेमी के साथ भाग गई।

भागने के बाद कल्पना और ऋषभ ने कर्णव को धमकाते हुए पैसा मांगना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि अगर कर्णव ने पैसा नहीं दिया तो वे छोटे बेटे की हत्या कर उसका आरोप कर्णव पर लगा देंगे। इससे परेशान होकर कर्णव ने पुलिस में रिपोर्ट कर दी। जिसके बाद अब पत्नी के साथ उसका टैक्सी ड्राइवर प्रेमी दोनों जेल में है।

जिस ड्राइवर के साथ भागी उसकी टैक्सी में जाती थी पति से मिलने

कर्णव ने बताया कि वो जयपुर में रहता था जबकि उसकी पत्नी अलवर में। जिसके चलते कभी पत्नी से मिलने कर्णव अलवर आता था तो कभी पत्नी कल्पना पति के पास जयपुर आ जाती थी। कल्पना जयपुर आने-जाने के लिए हमेशा ऋषभ शर्मा नाम के युवक की टैक्सी किराये पर लेती थी। इसलिए लंबे समय तक टैक्सी ड्राइवर के साथ आने-जाने से दोनों में अवैध संबंध बन गए जिसके बाद लाखों रुपए कमाने वाले बैंक मैनेजर पति को छोड़कर कल्पना टैक्सी ड्राइवर के साथ फरार हो गई।

ऐसे खुला राज

एक रोज जयपुर से अलवर आते समय संयोग से कर्णव ने भी ऋषभ शर्मा की टैक्सी किराये पर ली। कर्णव को लेकर ऋषभ अलवर की तरफ चला तो देखा के थका-हारा कर्णव पीछे की सीट पर आंख बंद कर बैठ गया। उसे लगा कि कर्णव सो गया है तो उसने मोबाइल निकालकर कल्पना को फोन कर बताया कि उसका पति आज उसकी टैक्सी में आ रहा है। सो रहा है वो कहो तो इसे आज ही ठिकाने लगा दें। लेकिन जिस कर्णव को ऋषभ सोया हुआ समझ रहा था वह जागा हुआ था इसलिए उसने जब यह बात सुनी तो समझ गया कि ड्राइवर उसकी पत्नी से बात कर रहा है। इसके बाद ड्राइवर कर्णव को सोया जानकर कल्पना के साथ अश्लील बातें करने लगा जिससे पति के सामने ड्राइवर के साथ बीवी के अवैध संबंध का राज खुल गया।

पचास लाख के साथ मांग रही थी तलाक

पति के सामने टैक्सी ड्राइवर के संग अपने अवैध रिश्ते का खुलासा हो जाने के बाद भी कल्पना पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उल्टे वह अपने पति से 50 लाख रुपयों के साथ तलाक की मांग करने लगी।

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दो बार भागी प्रेमी के साथ

पहली बार कल्पना दिसंबर 25 में टैक्सी ड्राइवर के साथ भागकर फरवरी में वापस आई थी। पति ने पत्नी की भूल का माफ कर उसे अपने साथ रख लिया। लेकिन महीने भर बाद ही वह एक बार फिर घर से जेवर और नगदी समेटकर ले जाने के अलावा अपने संग छोटे बेटे को भी ले गई थी। इसी बेटे को निशाना बनाकर कल्पना और उसका प्रेमी बैंक मैनेजर पति को धमका रहा था।

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21 May 2026 By Rohit.P

सत्यकथा: जिसकी टैक्सी में सवार होकर पति से मिलने जाती थी उसी टैक्सी ड्राइवर के साथ भाग गई बैंक मैनेजर की पत्नी

अलवर

कहने को तो लोग जयपुर को गुलाबी नगर कहा करते हैं। लेकिन मई की तपती दोपहरी में घर की खिड़की से आती गर्म हवा के थपेड़ों से बेखबर दूर तक फैली रेत को निहारते कर्णव खत्री को अपने जीवन की कहानी भी तपते रेत के टीलों सी नजर आ रही थी।

वह फैसला नहीं कर पा रहे थे कि कल्पना, जिसके साथ उन्होंने जवानी का एक लंबा दौर गुजारा था, के खिलाफ पुलिस में जाएं भी या नहीं।

अनिर्णय की स्थिति में फंसे  कर्णव को अपने उस निर्णय पर भी पछतावा हो रहा था जब उन्होंने कल्पना को उसकी गलती माफ कर दूसरी बार अपनी जिंदगी में वही जगह दी थी जो आठ साल पहले हुई शादी के बाद दी थी। अब कल्पना माफ करने के उनके फैसले को गलत साबित करते हुए एक बार फिर उसी रास्ते पर निकल चुकी थी जिस पर चलने के बाद वह वापस लौटी थी।

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रिपोर्ट दर्ज करवाने और न करवाने के फैसले के बीच कर्णव हफ्ते भर तक पशोपेश में रहे लेकिन अंत में अपने दो बच्चों का भविष्य देखते हुए 7 मार्च को उन्होंने अपनी पत्नी कल्पना ... बदला नाम .... के राजगढ़ इलाका निवासी टैक्सी ड्राइवर त्र्ऋषभ शर्मा के साथ भागने और उन दोनों ने अपनी जान को खतरा होने की रिपोर्ट दर्ज करवा दी।

7 मार्च 2026 को दर्ज करवाई गई अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी घर से भागते समय लगभग 50 लाख रूपए की संपति, जिसमें जेवर और नगदी दोनों शामिल हैं, लेकर गई है। इतना ही नहीं अपने पे्रमी के संग भागने के बाद कल्पना और उसका प्रेमी ऋषभ दोनों बार-बार फोन कर कर्णव को धमकियां भी दे रहे हैं।

पुलिस ने कर्णव की रिपोर्ट दर्ज कर प्रेमी ऋषभ शर्मा के साथ फरार उसकी पत्नी कल्पना की तलाश आरंभ कर दी। लेकिन महीना भर बीत जाने के बाद भी उनकी कोई खबर नहीं लगा। लेकिन इसी बीच अचानक कल्पना और उसका प्रेमी दोनों एसपी जयपुर के सामने पेश हो गए। यह जानकारी लगते ही एनईबी थाना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद कल्पना को जेल भेज दिया गया जबकि उसके प्रेमी ऋषभ को रिमांड पर लेकर पुलिस ने उससे गहराई से पूछताछ की जिसमें पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई।

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एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर के पद पर पदस्थ कर्णव खत्री मूल रूप से अलवर का रहने वाला है। भले स्वभाव का हमेशा शांत रहने वाला कर्णव अपने दोस्तों और रिश्तेदारों का चहेता था। इसलिए जब परिवार वालों ने उसके रिश्ते के लिए लड़की की तलाश शुरू की तो उसके सामने दर्जनों परिवारों के प्रस्ताव की लाइन लग गई। जिनमें से काफी सोच विचार के बाद उसने गोविंदगढ़ निवासी कल्पना अरोड़ा को जीवन साथी के रूप में पसंद किया। कल्पना और उसके परिवार वाले भी इस रिश्ते के लिए पहले से ही राजी थे। इसलिए कर्णव के हां कहते ही 2018 में धूमधाम से दोनों की शादी कर दी गई।

शादी के बाद कुछ महीने तो हंसी खुशी से बीते लेकिन उसके बाद जब कल्पना को अलवर में छोड़कर कर्णव जयपुर अपनी नौकरी पर चला गया तो कल्पना और कर्णव दोनों को ही एक दूसरे से यह दूरी जरा भी पसंद नहीं आ रही थी। खासकर कल्पना बिना कर्णव के बैचेन हो उठी। इसका एक कारण कल्पना की कैमिस्ट्री में अत्यधिक वासना का होना था। उसे पुरूष का संग किए बिना नींद नहीं आती थी। अपितु यह स्थिति शादी से पूर्व नहीं थी लेकिन शादी के बाद महीने दो महीने के साथ में ही कर्णव ने कल्पना को इतना प्यार दिया कि उसके शरीर को पुरूष रोज की जरूरत बन चुका था। कर्णव को भी कल्पना के बिना चैन नहीं पड़ता था इसलिए पहले तो वह हर दो-तीन दिन में जयपुर से अलवर आता और पत्नी के संग रात बिता कर सुबह होते की बैंक के लिए जयपुर निकल जाता।

लेकिन हफ्ते में दो तीन दिन का साथ कर्णव के लिए भले की बहुत था मगर कल्पना को सात में सात रात  पति अपने पास चाहिए होता था। लेकिन मजबूरी आदमी से सब करवा देती है। इसलिए धीरे-धीरे कल्पना ने भी अपने मन को इस परिस्थिती में ढाल लिया था।

समय के साथ कल्पना दो बच्चों की मां बन गए। इसके बावजूद कल्पना के मन से भले की न उतरा हो लेकिन कर्णव के मन से शादी का नशा जो शुरूआती दौर में हर एक के मन में छाया रहता है, उतर चुका था। इसलिए पहले वह जहां हफ्ते में दो-तीन रात अपनी पत्नी के पास अलवर में आकर बिताता था वहीं अब वह केवल रविवार से रविवार अलवर आने लगा। हां इस बीच कभी कोई अन्य तीज-त्यौहार का अवकाश मिल जाए तो कर्णव अलवर आना नहीं भूलता था।

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लेकिन वक्त के साथ कर्णव को प्रमोशन मिल जाने से उसकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही थी ऐसे में कई बार रविवार के दिन भी उसे अलवर आकर पत्नी के साथ समय बिताना मुश्किल होने लगा। खासकर क्वार्टरली, हॉफ ईयरी और मार्च क्लोजिंग के दौरान तो उसका बैंक छोड़ना मुश्किल ही रहता था।

कल्पना उससे शिकायत करती तो कर्णव उसे समझाने की कोशिश करता कि यार कब तक वो बीस-बाईस साल के दौर में जीती रहोगी। दो बच्चे है और अब हमारे ऊपर जिम्मेदारियां बढ़ रही है इसलिए खुद पर काबू रखो। लेकिन पति के लाख समझाने पर भी कल्पना को यह बात समझ में नहीं आ रही थी। दरअसल इसमें गलती कल्पना की नहीं उसकी अपनी जैविक कैमिस्ट्री थी जिसके चलते शारीरिक संतुष्टि उसकी पहली जरूरत थी।

कर्णव जानता था कि कल्पना चाह कर भी खुद पर काबू नहीं रख पाती इसलिए यह हल निकाला गया कि अगर कभी कर्णव बैंक की व्यस्तता की वजह से अलवर न आ पाए तो खुद कल्पना अलवर से जयपुर आ जाया करेगी। कल्पना के लिए यह फैसला उसके मन को खुशी देने वाला था और कर्णव कल्पना की खुशी में खुश था। लेकिन दोनों को नहीं मालूम था कि उनका यह फैसला भविष्य में क्या कुछ गुल खिलाने वाला है।

हुआ यह कि कल्पना खुद जयपुर जाने लगी तो कर्णव बेफ्रिक हो गया। वह अब भी समय मिलता तो अलवर आता था लेकिन कल्पना को जयपुर को छूट मिली तो वह आए दिन पति के साथ क्लालिटी टाइम बिताने जयपुर आने लगी। शुरू में कई बार कल्पना ने यह रास्ता बस से तो कभी ट्रेन से तय किया लेकिन जब देखा कि इसमें कई मुश्किलों को सामना करना पड़ता है तो पति की सलाह पर वह टैक्सी बुक कर अलवर से जयपुर आने लगी।

इसी दौरान उसने एक रोज राजगढ़ इलाके में रहने वाले ऋषभ शर्मा की टैक्सी जयपुर जाने के लिए किराये पर ली। लेकिन अजीब संयोग हुआ कि दो दिन बाद ही जब वह फिर जयपुर जाने घर से निकली तो उसे ऋषभ की ही टैक्सी मिली। यह देखकर ऋषभ ने उससे पूछा मैम क्या आप जयपुर में नौकरी करती हैं?

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नहीं मेरे पति वहां बैंक मैनेजर हैं। उनको अक्सर काम की वजह से अलवर आने का समय नहीं मिलता इसलिए मैं जयपुर चली जाती हूं।

पहली बार इससे ज्यादा दोनों के बीच कोई और बात नहीं हुई। लेकिन कोई दस दिन बाद एक बार फिर कल्पना ने ऋषभ की टैक्सी ली तो ऋषभ ने कल्पना को अपना मोबाइल नंबर देते हुए कहा मैम आपको जब भी टैक्सी चाहिए मुझे फोन कर दिया करें। मैं आपकी सुविधा के अनुसार आपको घर से ही ले लिया करूंगा।

यह तो अच्छी बात है कहते हुए कल्पना ने उसका नंबर ले लिया।

आप वापस भी टैक्सी से ही आती हैं क्या?

हां।

अभी कब वापस लौटना होगा?

कल सुबह कोई 9 बजे।

तब ठीक है आप मुझे फोन कर ले। अगर मुझे कोई दूसरी सवारी नहीं मिली तो आपको वापस ले चलूंगा।

ओके तुम क्या अलवर में रहते हो?

जी राजगढ़ इलाके में यहां मेरे नाना रहते हैं उन्हीं के साथ रहता हूं।

और तुम्हारे माता-पिता?

वो दोनों की अब दुनिया में नहीं रहे।

ओह। ऋषभ की बात सुनकर कल्पना ने उससे कहा।

कहना नहीं होगा कि अब कल्पना जब भी जयपुर जाती और जयपुर से अलवर वापस आती हमेशा ऋषभ की टैक्सी का उपयोग करने लगी। इससे धीरे-धीरे उनके बीच बातें औपचारिकता की सीमा से बाहर निकलकर भी होने लगी। ऐसे में एक रोज कल्पना ने उससे पूछा- तुम्हारी शादी हो गई क्या?

नहीं अभी तक तो नहीं।

क्यों, कोई बढ़ा भाई-बहन भी है क्या।

कोई नहीं। लेकिन कोई बात नहीं मैम मैने तो सुना है कि शादी के बाद आदमी की जिंदगी में परेशानियां और भी बढ़ जाती हैं।

गलत सुना है तुमने। मेरा तो मानना है कि आदमी को सही वक्त पर शादी जरूर कर लेना चाहिए। अब मुझे ही देख लो शादी को आठ साल होने को आए लेकिन हम पति-पत्नी में इतना प्यार है कि अभी भी हम दोनों दो-तीन से ज्यादा एक दूसरे से दूर नहीं रहते। कभी वो अलवर आ जाते है तो कभी मैं जयपुर।

भाई साहब किस्मत वाले है जो उनकी शादी आपसे हुई।

क्यों ऐसा क्या है मेरे मैं?

आप अपने पति को इतना प्यार जो करती हैं।

बस या कुछ और भी? कल्पना ने उसे छेड़ा।

सुंदर भी तो हैं आप, ऋषभ ने कुछ डरते हुए कहा।

हूं वो तो ठीक है, तुम्हें कैसी लगती हूं?

अच्छी।

बस अच्छी?

नहीं मेरा मतलब है बहुत अच्छी। खासकर जब आप वो नीला वाला सूट पहनकर आती है न तब तो लगता है...

क्या लगता है बात पूरी करो न?

आप नाराज तो नहीं होगी?

बिल्कुल नहीं।

लगता है जैसे नीले बादलों में चांद निकला हो।

ऋषभ की बात सुनकर कल्पना जोर से हंस पड़ी। बोली अरे ये चांद तारों वाली बातें बच्चों को अच्छी लगती है। खैर तुम्हारी शादी नहीं हुई न इसलिए तुम अभी केवल चांद तारे देखते हो। खैर तुम्हें नीले सूट में मैं अच्छी लगती हूं तो अगली बार वही पहनकर चलूंगी। सचमुच ही जब चार रोज के बाद कल्पना ने उसे जयपुर जाने के लिए बुलाया तो वही नीला सूट पहना जिसकी तारीफ ऋषभ ने की थी।

इस तरह धीरे-धीरे कल्पना और उस टैक्सी ड्राइवर ऋषभ के बीच बातों ही बातों में दूरी कम होती गई। जिसका नतीजा यह हुआ कि कल्पना जो पहले हमेशा पीछे वाली सीट पर बैठकर सफर करती थी अब आगे ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठकर सफर करने लगी। पूरे सफर के दौरान दोनों बातें करते रहते जिससे सफर भी आसानी से कटने लगा और उनके बीच के रिश्ते दोस्ती में बदलने लगे।

एक दिन जब कल्पना जयपुर से ऋषभ के साथ लौट रही थी तब रास्ते में अचानक की काफी जोर की बारिश होने लगी। कार चलाना मुश्किल था इसलिए ऋषभ ने एक पेड़ के नीचे कार रोक दी।

कितना सुंदर मौसम है, है न। कल्पना ने कहा।

जी।

अच्छा एक बात बताओ तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है।

थी लेकिन अब नहीं।

कहां चली गई?

उसकी शादी हो गई।

तुमने उसके साथ शादी करने की कोशिश नहीं की।

नहीं।

क्यों?

उसे गरीबी पसंद नहीं थी।

क्या यार ये अमीरी गरीबी, अच्छा एक बताओ, सच बताना।

पूछिए।

उस साथ कभी वो सब किया था।

हां, शर्माते हुए ऋषभ ने कहा तो कल्पना बोली बड़े छुपे रुस्तम निकले तुम तो मैं तो समझती थी कि तुम बहुत सीधे हो।

नहीं वो ऐसी बात नहीं है, उसने हकलाते हुए कहा तो कल्पना बीच में ही बोल पड़ी, अरे डरते क्यों हो अच्छा लगा तुमने सही बोला। लेकिन वो चली गई तो जाने दो कोई दूसरी खोज लो। तुम आदमी अच्छे हो हैंडसम भी हो कोई भी लड़की राजी हो जाएगी। भाई मैं तो सच कहती हूं कि मुझे कोई तुम्हारे जैसा लड़का लाईन मारे तो मैं तो आज भी इश्क करने राजी हो जाऊं।

कल्पना की बात सुनकर ऋषभ उसे देखता रह गया तो कल्पना बोला क्या देख रहे हो सचमुच लाईन मारने का इरादा है क्या?

नहीं ... नहीं .. तो।

ऋषभ का डर देख कल्पना बोली पागल कहीं के, और जोर से हंस पड़ी।

उस रोज घर पहुंचकर ऋषभ के कानों में वहीं एक शब्द गूंजता रहा, पागल कहीं के। उसे लगा कि शायद कल्पना तैयार थी उसने मना कर दिया इसीलिए उसने मुझे पागल कहा। अब क्या हो सकता था वक्त हाथ से निकल चुका था लेकिन उसने ठान लिया कि अब कभी ऐसा मौका आया तो वह पीछे नहीं हटेगा।

अगली बार ही कल्पना ने जब उसे जयपुर चलने बुलाया तो उसने वही नीला सूट पहन रखा था ऋषभ की पसंद का। यह देखकर शहर से बाहर निकलते ही ऋषभ ने कल्पना का हाथ थाम लिया। यह देखकर कल्पना ने उसका विरोध नहीं किया उल्टे अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया।

alwar satyakatha (2)

प्यार की कहानी शुरू हो चुकी थी इसलिए जल्द ही एक रोज जयपुर से वापस आते समय टैक्सी में ही उनके बीच शारीरिक संबंध भी बन गए। जिसके बाद तो यह हर बार की बात हो गई। कभी जयपुर जाते समय तो कभी वहां से वापस आते समय तो कभी आते में भी और जाते मैं भी उनके बीच टैक्सी में ही वासना का खेल खेला जाने लगा।

खुद कर्णव का अभी भी सनडे और दूसरी छुट्टी के दिन अलवर आना जारी था। हां यह जरूर है कि कल्पना को अब पति का अलवर आना पसंद नहीं था। इसलिए ऋषभ के साथ मिलने का मौका मिल सके इसलिए कई बार रविवार को भी कल्पना ही जयपुर चली आती थी।

कल्पना को अपने से उम्र में छोटा और पति की तुलना मैं कहीं बहुत अधिक यंग प्रेमी मिला तो वह उसकी दीवानी हो गई। ऋषभ को तो कल्पना का साथ मिलना लॉटरी लगने जैसा था क्योंकि अब वह उसके ऊपर पैसा भी लुटाने लगी थी। इसलिए एक दूसरे के प्रति उनकी दीवानगी का आलम यह हो गया कि वे दोनों कर्णव को रास्ते से हटाकर एक दूसरे के होकर जीने का सपना ही नहीं देखने लगे बल्कि कर्णव से छुटकारा कैसे मिले इसकी योजना भी बनाने लगे।

लेकिन किसी की हत्या करना आसान तो नहीं होता। इसलिए दोनों मौके की तलाश करने लगे। इसी बीच संयोग से एक दिन रविवार को जब कर्णव जयपुर से अपनी पत्नी और बच्चों के पास अलवर आ रहा था तब संयोग से उसने ऋषभ की टैक्सी किराये पर ली। ऋषभ, कर्णव को और कर्णव ऋषभ को जानता था।

कर्णव को लेकर ऋषभ अलवर की तरफ चला तो देखा के थका-हारा कर्णव पीछे की सीट पर आंख बंद कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद ऋषभ ने देखा कि कर्णव सो गया है तो उसने मोबाइल निकालकर कल्पना को फोन कर बताया कि उसका पति आज उसकी टैक्सी में आ रहा है। सो रहा है कहो तो इसे आज ही ठिकाने लगा दें।

लेकिन जिस कर्णव को ऋषभ सोया हुआ समझ रहा था वह जागा हुआ था इसलिए उसने जब यह बात सुनी तो समझ गया कि ड्राइवर उसकी पत्नी से बात कर रहा है। इसलिए वह और गहरी नींद में सोने का नाटक करने लगा। अपितु फोन पर कल्पना ने अपने प्रेमी को हत्या करने से तो रोक दिया लेकिन यह जानकर की पति टैक्सी में सो रहा है उसके साथ प्यार भरी अश्लील बातें करने लगी। ऋषभ भी अपनी प्रेमिका की बात का जबाव दे रहा था। इसलिए ड्राइवर के साथ पत्नी की अश्लील बातें सुनकर कर्णव सब समझ गया। उसने दोनों की बातें रिकार्ड कर ली। लेकिन घर पहुंचकर कल्पना से कुछ नहीं कहा।

अगले एक महीने तक कर्णव सबूत जुटाने में लगा रहा। उसने दोनों के मोबाइल फोन की डिटेल के अलावा काल रिकार्डिंग भी प्राप्त करने के बाद जब इस बारे में कल्पना से बात की तो कल्पना झगड़ा करने पर उतर आई। उसने कर्णव से 50 लाख की मांग करते हुए तलाक मांग लिया। इतना ही नहीं खुद बीवी का प्रेमी टैक्सी ड्राइवर भी कर्णव को धमकाने लगा। जिससे विवाद बढ़ने लगा तो एक रोज दिसंबर में कल्पना घर छोड़कर ऋषभ के साथ भाग गई।

कर्णव ने अपने स्तर पर उसे खोजने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुआ। लेकिन इसी बीच फरवरी महीने में कल्पना अचानक वापस आ गई तो कर्णव ने उसकी गलती माफ करते हुए अपने साथ रख लिया। लेकिन कल्पना किसी और ही योजना के तहत वापस आई थी। मार्च के महीने में वह घर से लगभग 50 लाख के जेवर और नगदी समेटने के अलावा अपने छोटे बेटे को साथ लेकर फिर प्रेमी के साथ भाग गई।

भागने के बाद कल्पना और ऋषभ ने कर्णव को धमकाते हुए पैसा मांगना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि अगर कर्णव ने पैसा नहीं दिया तो वे छोटे बेटे की हत्या कर उसका आरोप कर्णव पर लगा देंगे। इससे परेशान होकर कर्णव ने पुलिस में रिपोर्ट कर दी। जिसके बाद अब पत्नी के साथ उसका टैक्सी ड्राइवर प्रेमी दोनों जेल में है।

जिस ड्राइवर के साथ भागी उसकी टैक्सी में जाती थी पति से मिलने

कर्णव ने बताया कि वो जयपुर में रहता था जबकि उसकी पत्नी अलवर में। जिसके चलते कभी पत्नी से मिलने कर्णव अलवर आता था तो कभी पत्नी कल्पना पति के पास जयपुर आ जाती थी। कल्पना जयपुर आने-जाने के लिए हमेशा ऋषभ शर्मा नाम के युवक की टैक्सी किराये पर लेती थी। इसलिए लंबे समय तक टैक्सी ड्राइवर के साथ आने-जाने से दोनों में अवैध संबंध बन गए जिसके बाद लाखों रुपए कमाने वाले बैंक मैनेजर पति को छोड़कर कल्पना टैक्सी ड्राइवर के साथ फरार हो गई।

ऐसे खुला राज

एक रोज जयपुर से अलवर आते समय संयोग से कर्णव ने भी ऋषभ शर्मा की टैक्सी किराये पर ली। कर्णव को लेकर ऋषभ अलवर की तरफ चला तो देखा के थका-हारा कर्णव पीछे की सीट पर आंख बंद कर बैठ गया। उसे लगा कि कर्णव सो गया है तो उसने मोबाइल निकालकर कल्पना को फोन कर बताया कि उसका पति आज उसकी टैक्सी में आ रहा है। सो रहा है वो कहो तो इसे आज ही ठिकाने लगा दें। लेकिन जिस कर्णव को ऋषभ सोया हुआ समझ रहा था वह जागा हुआ था इसलिए उसने जब यह बात सुनी तो समझ गया कि ड्राइवर उसकी पत्नी से बात कर रहा है। इसके बाद ड्राइवर कर्णव को सोया जानकर कल्पना के साथ अश्लील बातें करने लगा जिससे पति के सामने ड्राइवर के साथ बीवी के अवैध संबंध का राज खुल गया।

पचास लाख के साथ मांग रही थी तलाक

पति के सामने टैक्सी ड्राइवर के संग अपने अवैध रिश्ते का खुलासा हो जाने के बाद भी कल्पना पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उल्टे वह अपने पति से 50 लाख रुपयों के साथ तलाक की मांग करने लगी।

alwar satyakatha (5)

दो बार भागी प्रेमी के साथ

पहली बार कल्पना दिसंबर 25 में टैक्सी ड्राइवर के साथ भागकर फरवरी में वापस आई थी। पति ने पत्नी की भूल का माफ कर उसे अपने साथ रख लिया। लेकिन महीने भर बाद ही वह एक बार फिर घर से जेवर और नगदी समेटकर ले जाने के अलावा अपने संग छोटे बेटे को भी ले गई थी। इसी बेटे को निशाना बनाकर कल्पना और उसका प्रेमी बैंक मैनेजर पति को धमका रहा था।

https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/bank-managers-wife-ran-away-with-the-same-taxi-driver/article-53877

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