मंदसौर जिले के शामगढ़ कस्बे में नाबालिग छात्रा को ब्लैकमेल कर उसका आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले की जांच पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता 16 वर्षीय छात्रा है और 12वीं कक्षा में अध्ययनरत है। (नाबालिग होने के कारण पहचान गोपनीय रखी गई है।) स्कूल के दौरान उसकी दोस्ती कस्बे की राव कॉलोनी निवासी रिहान अब्बासी से हुई थी। पीड़िता ने उसे अपना भरोसेमंद मित्र समझा, लेकिन जांच में सामने आया है कि रिहान और उसके साथी बाबू शाह ने इसी भरोसे का गलत फायदा उठाया।
घटना 6 नवंबर की बताई जा रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उस दिन किशोरी घर में अकेली थी, तभी रिहान उसके घर पहुंचा। पीड़िता के बयान में कहा गया है कि रिहान ने धमकी देकर उसका आपत्तिजनक वीडियो और कुछ तस्वीरें बना लीं। इसके बाद रिहान और बाबू शाह ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की मांग की।
बदनामी और सामाजिक दबाव के डर से पीड़िता ने घर से चोरी कर किस्तों में दो लाख रुपये से अधिक की रकम आरोपियों को दे दी। इसके बावजूद आरोपियों की मांग जारी रही और वे तीन लाख रुपये और देने का दबाव बनाते रहे। जब पीड़िता आगे पैसा देने में असमर्थ रही, तो आरोपियों ने वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया।
वीडियो वायरल होने की जानकारी मिलने पर पीड़िता ने एक सहेली से मिली सूचना के बाद अपने परिजनों को पूरी घटना बताई। उसी रात परिवार शामगढ़ थाने पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया।
घटना की खबर फैलते ही कस्बे में नाराजगी बढ़ गई। सैकड़ों लोग थाने के बाहर एकत्र होकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। हालात को देखते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
स्थानीय संगठनों और नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यह मामला किसी एक घटना तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय होने की आशंका है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है और गिरोह से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो किन माध्यमों से प्रसारित हुआ और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका तो नहीं रही। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सहयोग से वीडियो को हटाने और आगे प्रसार रोकने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी कानूनी पहलुओं पर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला डिजिटल अपराधों को लेकर सतर्कता और समय पर शिकायत की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।
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