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जयपुर में एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर 20 लाख की ठगी: प्रेमी जोड़े ने बनाया वर्चुअल जाल, साइबर सेल ने किया पर्दाफाश
Satyakatha
‘हॉट सिंगल गर्ल इन जयपुर’ वेबसाइट से चल रहा था फर्जी धंधा; एआई से बनाई गईं नकली तस्वीरें, 13 मोबाइल और लाखों रुपए के लेनदेन के सबूत बरामद
राजस्थान की राजधानी में एक सनसनीखेज साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। जयपुर ग्रामीण पुलिस की साइबर सेल ने एक ऐसे प्रेमी जोड़े और उनके साथियों को गिरफ्तार किया है जो एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर रईस ग्राहकों को झांसा देकर लाखों रुपए ठग रहे थे। जांच में सामने आया कि यह गैंग एक फर्जी वेबसाइट बनाकर “प्रोफेशनल मॉडल्स” की फर्जी प्रोफाइल्स से ग्राहकों को फंसाता था। पिछले एक साल में गिरोह ने करीब 20 लाख रुपए की ठगी की थी।
कैसे चलता था ‘वर्चुअल एस्कॉर्ट रैकेट’
पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी विकास यादव (25) ने “हॉट सिंगल गर्ल इन जयपुर” नाम की वेबसाइट बनाई थी। इस वेबसाइट पर उसने इंस्टाग्राम और इंटरनेट से चुराई गई आकर्षक युवतियों की तस्वीरें अपलोड कीं। ग्राहकों को यह झांसा दिया जाता कि एडवांस पेमेंट करने पर “सर्विस गर्ल” की डिटेल और होटल बुकिंग भेजी जाएगी।
जैसे ही ग्राहक 10 से 25 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करते, संपर्क काट दिया जाता।
आरोपी विकास ने अपने दोस्तों राहुल, दीपक और प्रेमिका नैना को भी इस नेटवर्क में शामिल किया। नैना कॉल सेंटर की तरह कॉल और चैट संभालती थी। वह आवाज और बातों के जरिए ग्राहकों को फुसलाती थी। धीरे-धीरे यह गिरोह इतना संगठित हो गया कि हर शहर के नाम से अलग मोबाइल नंबर और पेमेंट लिंक बनाकर देशभर में ग्राहकों को ठगने लगा।
एआई से बनाते थे लड़कियों की नकली तस्वीरें
साइबर जांच में खुलासा हुआ कि विकास तकनीकी रूप से बेहद सक्षम था। उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सैकड़ों सुंदर चेहरों की नकली तस्वीरें (AI-generated photos) तैयार कीं। इन्हीं फोटोज़ को अलग-अलग नाम और शहरों के साथ शेयर किया जाता था। ग्राहक इन्हें असली मानकर एडवांस पेमेंट भेज देते थे।
साइबर सेल ने ऐसे पकड़ा गिरोह
एक शिकायत उत्तर प्रदेश के एक इंजीनियर ने दर्ज कराई थी, जिसने जयपुर की वेबसाइट पर सर्विस के लिए 25 हजार रुपए भेजे थे। जब लड़की नहीं पहुंची तो उसने तुरंत साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज की।
शिकायत मिलने के बाद जयपुर ग्रामीण पुलिस की साइबर सेल ने डीएसपी खलील अहमद के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन वेबमाया’ शुरू किया। पेमेंट लिंक और क्यूआर कोड ट्रैकिंग से पता चला कि सर्वर जयपुर के चंदवाजी थाना क्षेत्र से ऑपरेट हो रहा था।
26 अगस्त की रात पुलिस टीम ने छापा मारकर विकास, नैना, राहुल और दीपक को गिरफ्तार किया। मौके से 13 मोबाइल, 10 एटीएम कार्ड, कई फर्जी फोटो और डायरी बरामद की गईं।
अपराध से अय्याशी तक
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ने ठगी की रकम से अय्याशी पर लाखों रुपए उड़ाए। किसी के पास अब वकील करने तक के पैसे नहीं बचे। आरोपी विकास और नैना का दावा था कि वे “किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे थे”, पर हकीकत यह थी कि वे देशभर के शौकीन ग्राहकों को ठगने वाला एक संगठित साइबर गैंग चला रहे थे।
आगे की जांच
पुलिस ने अब इस गिरोह के डिजिटल नेटवर्क और अन्य खातों की जांच शुरू कर दी है। यह भी संभावना है कि इनके संपर्क में अन्य राज्यों में सक्रिय फर्जी वेबसाइट संचालक भी हों।
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जयपुर में एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर 20 लाख की ठगी: प्रेमी जोड़े ने बनाया वर्चुअल जाल, साइबर सेल ने किया पर्दाफाश
Satyakatha
राजस्थान की राजधानी में एक सनसनीखेज साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। जयपुर ग्रामीण पुलिस की साइबर सेल ने एक ऐसे प्रेमी जोड़े और उनके साथियों को गिरफ्तार किया है जो एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर रईस ग्राहकों को झांसा देकर लाखों रुपए ठग रहे थे। जांच में सामने आया कि यह गैंग एक फर्जी वेबसाइट बनाकर “प्रोफेशनल मॉडल्स” की फर्जी प्रोफाइल्स से ग्राहकों को फंसाता था। पिछले एक साल में गिरोह ने करीब 20 लाख रुपए की ठगी की थी।
कैसे चलता था ‘वर्चुअल एस्कॉर्ट रैकेट’
पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी विकास यादव (25) ने “हॉट सिंगल गर्ल इन जयपुर” नाम की वेबसाइट बनाई थी। इस वेबसाइट पर उसने इंस्टाग्राम और इंटरनेट से चुराई गई आकर्षक युवतियों की तस्वीरें अपलोड कीं। ग्राहकों को यह झांसा दिया जाता कि एडवांस पेमेंट करने पर “सर्विस गर्ल” की डिटेल और होटल बुकिंग भेजी जाएगी।
जैसे ही ग्राहक 10 से 25 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करते, संपर्क काट दिया जाता।
आरोपी विकास ने अपने दोस्तों राहुल, दीपक और प्रेमिका नैना को भी इस नेटवर्क में शामिल किया। नैना कॉल सेंटर की तरह कॉल और चैट संभालती थी। वह आवाज और बातों के जरिए ग्राहकों को फुसलाती थी। धीरे-धीरे यह गिरोह इतना संगठित हो गया कि हर शहर के नाम से अलग मोबाइल नंबर और पेमेंट लिंक बनाकर देशभर में ग्राहकों को ठगने लगा।
एआई से बनाते थे लड़कियों की नकली तस्वीरें
साइबर जांच में खुलासा हुआ कि विकास तकनीकी रूप से बेहद सक्षम था। उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सैकड़ों सुंदर चेहरों की नकली तस्वीरें (AI-generated photos) तैयार कीं। इन्हीं फोटोज़ को अलग-अलग नाम और शहरों के साथ शेयर किया जाता था। ग्राहक इन्हें असली मानकर एडवांस पेमेंट भेज देते थे।
साइबर सेल ने ऐसे पकड़ा गिरोह
एक शिकायत उत्तर प्रदेश के एक इंजीनियर ने दर्ज कराई थी, जिसने जयपुर की वेबसाइट पर सर्विस के लिए 25 हजार रुपए भेजे थे। जब लड़की नहीं पहुंची तो उसने तुरंत साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज की।
शिकायत मिलने के बाद जयपुर ग्रामीण पुलिस की साइबर सेल ने डीएसपी खलील अहमद के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन वेबमाया’ शुरू किया। पेमेंट लिंक और क्यूआर कोड ट्रैकिंग से पता चला कि सर्वर जयपुर के चंदवाजी थाना क्षेत्र से ऑपरेट हो रहा था।
26 अगस्त की रात पुलिस टीम ने छापा मारकर विकास, नैना, राहुल और दीपक को गिरफ्तार किया। मौके से 13 मोबाइल, 10 एटीएम कार्ड, कई फर्जी फोटो और डायरी बरामद की गईं।
अपराध से अय्याशी तक
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ने ठगी की रकम से अय्याशी पर लाखों रुपए उड़ाए। किसी के पास अब वकील करने तक के पैसे नहीं बचे। आरोपी विकास और नैना का दावा था कि वे “किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे थे”, पर हकीकत यह थी कि वे देशभर के शौकीन ग्राहकों को ठगने वाला एक संगठित साइबर गैंग चला रहे थे।
आगे की जांच
पुलिस ने अब इस गिरोह के डिजिटल नेटवर्क और अन्य खातों की जांच शुरू कर दी है। यह भी संभावना है कि इनके संपर्क में अन्य राज्यों में सक्रिय फर्जी वेबसाइट संचालक भी हों।
