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इश्क में अंधी पत्नी ने प्रेमी को बनाया हथियार, पति को उतारा मौत के घाट
सत्यकथा,जबलपुर
चार साल का अवैध प्रेम उजागर होते ही रची गई पति की हत्या की साजिश
प्रेम संबंध और व्यक्तिगत विवाद के चलते पति की हत्या करवाने वाली 28 वर्षीय आराधना चौधरी को जबलपुर की एसएसी-एसटी कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने आराधना के प्रेमी धर्मेन्द्र उर्फ धिन्नू और उसके साथी अमित उर्फ चालीसा पटेल को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी।
30 वर्षीय आशीष चौधरी की लाश 25 सितंबर 2022 को मझगंवा थाना क्षेत्र में कुम्ही और परसोल के बीच खेत में पाई गई। उनके सिर पर चोट के निशान थे और मोटर साइकल पास ही गड्डे में गिरी हुई थी। शुरुआती नजर में यह रोड एक्सीडेंट प्रतीत हुआ, लेकिन पुलिस ने मौके की जांच में पाया कि हत्या की आड़ में एक्सीडेंट का दृश्य रचा गया था।
तत्कालीन एडीशनल एसपी शिवेश बघेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना टीम को जांच के लिए निर्देशित किया। प्रारंभिक पूछताछ और ग्रामीण स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि आशीष के पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी, लेकिन उसकी पत्नी आराधना के पास धन था।
जांच में सामने आया कि आराधना ने अपने प्रेमी धर्मेन्द्र के साथ अवैध संबंध बनाए थे। चार साल तक चल रहे इस संबंध के दौरान, आशीष ने अपनी पत्नी के व्यवहार में बदलाव और प्रेमी के साथ संबंध का पता लगाया। इसके बाद आराधना ने अपने पति की हत्या करवाने की योजना बनाई।
धर्मेन्द्र ने अपने साथी अमित उर्फ चालीसा के साथ मिलकर योजना बनाई। उन्होंने आशीष को शराब पीने के लिए बाहर बुलाया और मौका पाकर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी। मृतक की मोटर साइकल को पास के गड्डे में फेंककर हत्या को एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की गई।
पुलिस के अनुसार, हत्या के तुरंत बाद धर्मेन्द्र ने आराधना को फोन कर इस बात की सूचना दी। आराधना ने घटना के बाद अपने प्रेमी से मिलने के लिए उसे घर बुलाया। इस तरह, हत्या की योजना और कार्यान्वयन में आराधना की भूमिका स्पष्ट हो गई।
27 जून को जबलपुर की एसएसी-एसटी कोर्ट में माननीय न्यायाधीश गिरीश दीक्षित ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि हत्या पूरी तरह पूर्वनियोजित और शातिराना थी, जिसमें प्रेम संबंध और आर्थिक स्वार्थ मुख्य कारण थे।
यह मामला स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया। यह घटना साबित करती है कि व्यक्तिगत संबंध और आर्थिक स्वार्थ गंभीर अपराधों की दिशा में ले जा सकते हैं।
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सत्यकथा,जबलपुर
प्रेम संबंध और व्यक्तिगत विवाद के चलते पति की हत्या करवाने वाली 28 वर्षीय आराधना चौधरी को जबलपुर की एसएसी-एसटी कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने आराधना के प्रेमी धर्मेन्द्र उर्फ धिन्नू और उसके साथी अमित उर्फ चालीसा पटेल को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी।
30 वर्षीय आशीष चौधरी की लाश 25 सितंबर 2022 को मझगंवा थाना क्षेत्र में कुम्ही और परसोल के बीच खेत में पाई गई। उनके सिर पर चोट के निशान थे और मोटर साइकल पास ही गड्डे में गिरी हुई थी। शुरुआती नजर में यह रोड एक्सीडेंट प्रतीत हुआ, लेकिन पुलिस ने मौके की जांच में पाया कि हत्या की आड़ में एक्सीडेंट का दृश्य रचा गया था।
तत्कालीन एडीशनल एसपी शिवेश बघेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना टीम को जांच के लिए निर्देशित किया। प्रारंभिक पूछताछ और ग्रामीण स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि आशीष के पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी, लेकिन उसकी पत्नी आराधना के पास धन था।
जांच में सामने आया कि आराधना ने अपने प्रेमी धर्मेन्द्र के साथ अवैध संबंध बनाए थे। चार साल तक चल रहे इस संबंध के दौरान, आशीष ने अपनी पत्नी के व्यवहार में बदलाव और प्रेमी के साथ संबंध का पता लगाया। इसके बाद आराधना ने अपने पति की हत्या करवाने की योजना बनाई।
धर्मेन्द्र ने अपने साथी अमित उर्फ चालीसा के साथ मिलकर योजना बनाई। उन्होंने आशीष को शराब पीने के लिए बाहर बुलाया और मौका पाकर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी। मृतक की मोटर साइकल को पास के गड्डे में फेंककर हत्या को एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की गई।
पुलिस के अनुसार, हत्या के तुरंत बाद धर्मेन्द्र ने आराधना को फोन कर इस बात की सूचना दी। आराधना ने घटना के बाद अपने प्रेमी से मिलने के लिए उसे घर बुलाया। इस तरह, हत्या की योजना और कार्यान्वयन में आराधना की भूमिका स्पष्ट हो गई।
27 जून को जबलपुर की एसएसी-एसटी कोर्ट में माननीय न्यायाधीश गिरीश दीक्षित ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि हत्या पूरी तरह पूर्वनियोजित और शातिराना थी, जिसमें प्रेम संबंध और आर्थिक स्वार्थ मुख्य कारण थे।
यह मामला स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया। यह घटना साबित करती है कि व्यक्तिगत संबंध और आर्थिक स्वार्थ गंभीर अपराधों की दिशा में ले जा सकते हैं।
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