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सत्यकथा: रास्ते का कांटा बन रहे प्रेमिका के पति को आशिक ने उतारा मौत के घाट
सतना
चार अप्रैल की सुबह मैहर जिले के अमरपाटन थाने की सीमा में पडक्का औद्योगिक इलाके झन्ना नाले के पास किसी युवक की रक्त रंजित लाश पड़ी होने की सूचना पाकर जब अमरपाटन टीआई विजय सिंह परस्ते मौके पर पहुंचे तो शव की स्थिति देखते की उनके सामने यह बात साफ हो गई कि युवक की हत्या की गई है। शव के पेट गर्दन और चेहरे में गहरे घाव थे। घटनास्थल के आसपास खून भी बिखरा पड़ा था जिससे साफ था कि युवक की हत्या मौके पर ही की गई है। टीआई परस्ते ने मौके से ही घटना की जानकारी एसडीओपी ख्याति मिश्रा को दे दी। जिससे सुश्री ख्याति मिश्रा ने इस बात की जानकारी एडीशनल एसपी डॉ. चंचल नागर और एसपी मैहर अवधेश प्रताप सिंह को देकर स्वयं मौके पर पहुंच गई।
पुलिस ने शव की शिनाख्ती का प्रयास किया जिसमें जल्द ही उसकी पहचान मौहरिया जगन्नाथ गांव निवासी 26 वर्षीय राजभान कोल के रूप में हो गई। परिवार ने पूछताछ में बताया कि कल शाम को किसी ने उसे फोन कर बुलाया था जिसके बाद वह रात भर घर नहीं लौटा। पास पड़ोस वालों के अनुसार राजभान भला आदमी था उसकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी। साल भर पहले ही उसकी शादी पास के गांव में रहने वाली निशा कोल से हुई थी।

पुलिस ने निशा से भी पूछताछ की जिसमें उसे कुछ हाथ नहीं लगा। इसी बीच पुलिस को राजभान के मोबाइल की काल डिटेल मिली जिसमें उसके पास आखिरी फोन निशा के मायके में रहने वाले दिलीप पटेल नाम के युवक का मिला। जब इस बारे में पूछा गया तो मृतक के पिता ने बताया कि बहू के गांव का दिलीप अक्सर उसके घर आता था।
इससे पुलिस का शक निशा और दिलीप के बीच अवैध संबंध को लेकर गहरा गया इसलिए पुलिस ने दिलीप को उठाकर सख्ती से पूछताछ की जिसमें कुछ ही देर में दिलीप पटेल टूट गया। उसने राजभान की हत्या की बात स्वीकार करते हुए बताया कि निशा उसके बचपन की प्रेमिका है। शादी के बाद वह निशा को भूल नहीं पा रहा था इसलिए उसने अपने दोस्त विजेन्द्र उर्फ बिज्जू, करन केवट और दो अन्य के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने तुरंत बिज्जू को भी गिरफ्तार कर लिया लेकिन करन और दो अन्य फरार हो गए। जिसके बाद आरोपियों से की गई पूछताछ में कहानी इस प्रकार सामने आई।
भगवान ने निशा को सांवला रंग देकर भी नाक नक्श ऐसे दिए थे कि जो नजर उस पर जाती पर ठहर का रह जाती थी। किशोर उम्र में ही गांव के कई युवक निशा के दीवाने हो चुके थे। जिनमें से एक दिलीप पटेल भी था। दिलीप संपन्न परिवार से था इसलिए उसका रहन सहन भी दूसरे युवकों की तुलना में शहरी और चमक दमक से भरा था। किशोर उम्र अक्सर ऐसी चमक दमक से प्रभावित हो ही जाती है। इसलिए निशा ने जब देखा कि दिलीप उसके आगे-पीछे घूमता रहता है तो उसने दिलीप के प्रति अपने दिल की लगाम ढीली छोड़ दी। यह देख एक रोज साहस करके सुनसान खेत में दिलीप ने निशा की कलाई पकड़ ली।

छोड़ो कोई देख लेगा तो आफत हो जाएगी। निशा ने घबड़ाकर कहा।
मैं तुम्हारे लिए हर आफत से लड़ने तैयार हूं बस तुम हां कह दो।
तुम रईसों का क्या भरोसा आज मेरा हाथ पकड़ रहे हो कल किसी और का थाम लोगे।
मेरा भरोसा करो निशा कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा, निशा को अपने पास खींचते हुए दिलीप ने कहा ने तो निशा चुपचाप उसके सीने से लग गई।
इसके बाद दोनों की प्रेम कहानी जो शुरू हुई तो सारी मर्यादाएं तोड़ते हुए दोनों आधी रात में भी छुपकर मिलने लगे। दिलीप तो मानो निशा के प्यार करने के अंदाज का दीवाना ही हो गया था। तो दूसरी तरफ किशोर उम्र में ही शारीरिक रिश्ते का सुख पाकर निशा भी दिलीप के लिए पागल हो चुकी थी। लेकिन चंद सालों के बाद ही निशा ने जैसे ही जवानी में पैर रखा उसके परिवार ने निशा की शादी राजभान कोल से कर दी। दिलीप निशा को खोना नहीं चाहता था लेकिन अलग समाज की होने के कारण निशा से शादी नहीं कर सकता था इसलिए अपना मन मारकर रह गया।

निशा का पति राजभान भी उसे बेहद प्यार करता था इसलिए निशा जल्द ही राजभान के प्यार में प्रेमी को भूलने लगी। लेकिन यहां निशा के प्यार का दीवाना दिलीप उसे भूल नहीं पा रहा था। इसलिए एक बार जब राजभान किसी काम से ससुराल आया तो दिलीप ने उससे दोस्ती कर ली और इसी दोस्ती के बहाने वह अक्सर राजभान के घर जाने लगा। निशा ने पुराने प्रेमी को पति के दोस्त के रूप में घर आते देखा तो वह समझ गई कि उसका मकसद क्या है।
उसे डर भी लगा और अपने बचपन के यार की यह दीवानगी अच्छी भी लगी। इसलिए जब भी राजभान आता वह किसी न किसी बहाने उसके साथ दो-चार घड़ी बैठकर बात कर लेती। राजभान भी इस बात का बुरा नहीं मानता था। लेकिन धीरे-धीरे दिलीप का आना-जाना अक्सर होने लगा था इस दौरान उसने निशा का मोबाइल नंबर लेकर उससे बातें करना भी शुरू कर दिया था। निशा नहीं चाहती थी कि उसकी शादीशुदा जिंदगी में कोई तूफान आए इसलिए उसने पहले तो दिलीप को समझाने की कोशिश की लेकिन जब दिलीप ने उसे फोन पर बार-बार अपने प्यार का वास्ता दिया तो निशा उसकी बातों में आ गई। इसके बाद दिलीप चोरी छुपे निशा की ससुराल में आकर उससे मिलने लगा।

लेकिन ऐसा संभव नहीं है कि एक लड़की पति के घर में रहते हुए मायके के प्रेमी से मिलना जारी रखे और किसी को खबर न हो। इसलिए जल्द ही राजभान को समझ में आ गया कि दिलीप का उसके घर आने जाने का कारण क्या है इसलिए वह दिलीप से दूरी बनाने लगा। यह बात दिलीप की समझ में आई तो वह परेशान हो गया। क्योंकि निशा का संग वह भूल नहीं सकता था और न उससे दूर जा सकता था। निशा को भी समझ में आ गया था कि राजभान को शक हो गया है इसलिए उसने दिलीप से दूरी बनाना शुरू कर दिया था।
इससे परेशान होकर दिलीप ने अपने दोस्त विजेन्द्र उर्फ बिज्जू को राजभान की हत्या में साथ देने की योजना बनाकर राजभान को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। राजभान किसी सूरत में जिंदा न रहे इसके लिए करन केवट और उसके दो साथियों को भी पैसे का लालच देकर अपने साथ मिला लिया।
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इसके बाद योजना अनुसार 3 अप्रैल को दिलीप ने बड़ी मात्रा में शराब खरीदी और पडक्का औद्योगिक इलाके में साथियों के साथ जाकर राजभान को फोन कर पार्टी के लिए बुलाया। शराब के लालच में राजभान पार्टी में शामिल होने वहां पहुंच गया तो चारों ने मिलकर उसे पेट भर शराब पिलाई और फिर शराब की खाली बोतल तोड़कर उसकी हत्या कर लाश को नाले के पास पड़ा छोड़कर भाग गए।
आरोपियों को भरोसा था कि उन्हें किसी ने नहीं देखा इसलिए वह कभी नहीं पकड़े जाएंगे लेकिन पुलिस ने 24 घंटे में ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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सतना
चार अप्रैल की सुबह मैहर जिले के अमरपाटन थाने की सीमा में पडक्का औद्योगिक इलाके झन्ना नाले के पास किसी युवक की रक्त रंजित लाश पड़ी होने की सूचना पाकर जब अमरपाटन टीआई विजय सिंह परस्ते मौके पर पहुंचे तो शव की स्थिति देखते की उनके सामने यह बात साफ हो गई कि युवक की हत्या की गई है। शव के पेट गर्दन और चेहरे में गहरे घाव थे। घटनास्थल के आसपास खून भी बिखरा पड़ा था जिससे साफ था कि युवक की हत्या मौके पर ही की गई है। टीआई परस्ते ने मौके से ही घटना की जानकारी एसडीओपी ख्याति मिश्रा को दे दी। जिससे सुश्री ख्याति मिश्रा ने इस बात की जानकारी एडीशनल एसपी डॉ. चंचल नागर और एसपी मैहर अवधेश प्रताप सिंह को देकर स्वयं मौके पर पहुंच गई।
पुलिस ने शव की शिनाख्ती का प्रयास किया जिसमें जल्द ही उसकी पहचान मौहरिया जगन्नाथ गांव निवासी 26 वर्षीय राजभान कोल के रूप में हो गई। परिवार ने पूछताछ में बताया कि कल शाम को किसी ने उसे फोन कर बुलाया था जिसके बाद वह रात भर घर नहीं लौटा। पास पड़ोस वालों के अनुसार राजभान भला आदमी था उसकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी। साल भर पहले ही उसकी शादी पास के गांव में रहने वाली निशा कोल से हुई थी।

पुलिस ने निशा से भी पूछताछ की जिसमें उसे कुछ हाथ नहीं लगा। इसी बीच पुलिस को राजभान के मोबाइल की काल डिटेल मिली जिसमें उसके पास आखिरी फोन निशा के मायके में रहने वाले दिलीप पटेल नाम के युवक का मिला। जब इस बारे में पूछा गया तो मृतक के पिता ने बताया कि बहू के गांव का दिलीप अक्सर उसके घर आता था।
इससे पुलिस का शक निशा और दिलीप के बीच अवैध संबंध को लेकर गहरा गया इसलिए पुलिस ने दिलीप को उठाकर सख्ती से पूछताछ की जिसमें कुछ ही देर में दिलीप पटेल टूट गया। उसने राजभान की हत्या की बात स्वीकार करते हुए बताया कि निशा उसके बचपन की प्रेमिका है। शादी के बाद वह निशा को भूल नहीं पा रहा था इसलिए उसने अपने दोस्त विजेन्द्र उर्फ बिज्जू, करन केवट और दो अन्य के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने तुरंत बिज्जू को भी गिरफ्तार कर लिया लेकिन करन और दो अन्य फरार हो गए। जिसके बाद आरोपियों से की गई पूछताछ में कहानी इस प्रकार सामने आई।
भगवान ने निशा को सांवला रंग देकर भी नाक नक्श ऐसे दिए थे कि जो नजर उस पर जाती पर ठहर का रह जाती थी। किशोर उम्र में ही गांव के कई युवक निशा के दीवाने हो चुके थे। जिनमें से एक दिलीप पटेल भी था। दिलीप संपन्न परिवार से था इसलिए उसका रहन सहन भी दूसरे युवकों की तुलना में शहरी और चमक दमक से भरा था। किशोर उम्र अक्सर ऐसी चमक दमक से प्रभावित हो ही जाती है। इसलिए निशा ने जब देखा कि दिलीप उसके आगे-पीछे घूमता रहता है तो उसने दिलीप के प्रति अपने दिल की लगाम ढीली छोड़ दी। यह देख एक रोज साहस करके सुनसान खेत में दिलीप ने निशा की कलाई पकड़ ली।

छोड़ो कोई देख लेगा तो आफत हो जाएगी। निशा ने घबड़ाकर कहा।
मैं तुम्हारे लिए हर आफत से लड़ने तैयार हूं बस तुम हां कह दो।
तुम रईसों का क्या भरोसा आज मेरा हाथ पकड़ रहे हो कल किसी और का थाम लोगे।
मेरा भरोसा करो निशा कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा, निशा को अपने पास खींचते हुए दिलीप ने कहा ने तो निशा चुपचाप उसके सीने से लग गई।
इसके बाद दोनों की प्रेम कहानी जो शुरू हुई तो सारी मर्यादाएं तोड़ते हुए दोनों आधी रात में भी छुपकर मिलने लगे। दिलीप तो मानो निशा के प्यार करने के अंदाज का दीवाना ही हो गया था। तो दूसरी तरफ किशोर उम्र में ही शारीरिक रिश्ते का सुख पाकर निशा भी दिलीप के लिए पागल हो चुकी थी। लेकिन चंद सालों के बाद ही निशा ने जैसे ही जवानी में पैर रखा उसके परिवार ने निशा की शादी राजभान कोल से कर दी। दिलीप निशा को खोना नहीं चाहता था लेकिन अलग समाज की होने के कारण निशा से शादी नहीं कर सकता था इसलिए अपना मन मारकर रह गया।

निशा का पति राजभान भी उसे बेहद प्यार करता था इसलिए निशा जल्द ही राजभान के प्यार में प्रेमी को भूलने लगी। लेकिन यहां निशा के प्यार का दीवाना दिलीप उसे भूल नहीं पा रहा था। इसलिए एक बार जब राजभान किसी काम से ससुराल आया तो दिलीप ने उससे दोस्ती कर ली और इसी दोस्ती के बहाने वह अक्सर राजभान के घर जाने लगा। निशा ने पुराने प्रेमी को पति के दोस्त के रूप में घर आते देखा तो वह समझ गई कि उसका मकसद क्या है।
उसे डर भी लगा और अपने बचपन के यार की यह दीवानगी अच्छी भी लगी। इसलिए जब भी राजभान आता वह किसी न किसी बहाने उसके साथ दो-चार घड़ी बैठकर बात कर लेती। राजभान भी इस बात का बुरा नहीं मानता था। लेकिन धीरे-धीरे दिलीप का आना-जाना अक्सर होने लगा था इस दौरान उसने निशा का मोबाइल नंबर लेकर उससे बातें करना भी शुरू कर दिया था। निशा नहीं चाहती थी कि उसकी शादीशुदा जिंदगी में कोई तूफान आए इसलिए उसने पहले तो दिलीप को समझाने की कोशिश की लेकिन जब दिलीप ने उसे फोन पर बार-बार अपने प्यार का वास्ता दिया तो निशा उसकी बातों में आ गई। इसके बाद दिलीप चोरी छुपे निशा की ससुराल में आकर उससे मिलने लगा।

लेकिन ऐसा संभव नहीं है कि एक लड़की पति के घर में रहते हुए मायके के प्रेमी से मिलना जारी रखे और किसी को खबर न हो। इसलिए जल्द ही राजभान को समझ में आ गया कि दिलीप का उसके घर आने जाने का कारण क्या है इसलिए वह दिलीप से दूरी बनाने लगा। यह बात दिलीप की समझ में आई तो वह परेशान हो गया। क्योंकि निशा का संग वह भूल नहीं सकता था और न उससे दूर जा सकता था। निशा को भी समझ में आ गया था कि राजभान को शक हो गया है इसलिए उसने दिलीप से दूरी बनाना शुरू कर दिया था।
इससे परेशान होकर दिलीप ने अपने दोस्त विजेन्द्र उर्फ बिज्जू को राजभान की हत्या में साथ देने की योजना बनाकर राजभान को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। राजभान किसी सूरत में जिंदा न रहे इसके लिए करन केवट और उसके दो साथियों को भी पैसे का लालच देकर अपने साथ मिला लिया।
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इसके बाद योजना अनुसार 3 अप्रैल को दिलीप ने बड़ी मात्रा में शराब खरीदी और पडक्का औद्योगिक इलाके में साथियों के साथ जाकर राजभान को फोन कर पार्टी के लिए बुलाया। शराब के लालच में राजभान पार्टी में शामिल होने वहां पहुंच गया तो चारों ने मिलकर उसे पेट भर शराब पिलाई और फिर शराब की खाली बोतल तोड़कर उसकी हत्या कर लाश को नाले के पास पड़ा छोड़कर भाग गए।
आरोपियों को भरोसा था कि उन्हें किसी ने नहीं देखा इसलिए वह कभी नहीं पकड़े जाएंगे लेकिन पुलिस ने 24 घंटे में ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
