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पत्नी के इश्क और पैसे के खेल में पान दुकानदार की हत्या
सत्यकथा
लखनऊ के पारा इलाके में पान दुकानदार नरेश की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया, पत्नी और पति समेत एक दोस्त पर साजिश रचने का आरोप, तीनों गिरफ्तार।
राजधानी लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में सामने आए पान दुकानदार नरेश की हत्या के मामले ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया था। शुरुआत में यह मामला किसी लूट या अज्ञात हमले जैसा लग रहा था, लेकिन पुलिस की गहन जांच में जो सच सामने आया उसने रिश्तों और भरोसे की पूरी कहानी ही बदल दी। जांच के बाद पुलिस ने इस हत्याकांड में मृतक के करीबी दोस्त मोनू, उसकी पत्नी हिना और एक अन्य साथी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यह हत्या किसी अचानक गुस्से का नतीजा नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही आपसी खींचतान, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत संबंधों के उलझे हुए ताने-बाने का परिणाम थी। यह घटना उस समय सामने आई जब नवंबर महीने के अंतिम दिनों में सुबह-सुबह स्थानीय लोगों ने एक सुनसान गली के मोड़ पर एक युवक का शव देखा। शव के गले पर तार से दबाने के निशान स्पष्ट थे और शरीर पर चोटों के संकेत भी मौजूद थे। सबसे अहम बात यह थी कि मृतक के पैरों में जूते-चप्पल नहीं थे, जिससे पुलिस को शक हुआ कि हत्या कहीं और की गई है और बाद में शव को यहां लाकर फेंका गया है। मौके की स्थिति देखकर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और शव की पहचान नरेश के रूप में हुई, जो इलाके में पान की दुकान चलाता था और स्थानीय लोगों के बीच जाना-पहचाना चेहरा था।
शिनाख्त के बाद पुलिस ने नरेश के सामाजिक और निजी संबंधों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि उसका मोनू नाम के व्यक्ति से गहरा दोस्ताना संबंध था और वह अक्सर उसके घर आता-जाता था। इसी दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि नरेश की मोनू की पत्नी हिना से भी नजदीकी बढ़ रही थी। यह जानकारी मिलते ही जांच की दिशा बदल गई और पुलिस ने मोनू को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पूछताछ में मोनू ने स्वीकार किया कि नरेश उसके घर आता था और उसकी उससे दोस्ती थी, लेकिन उसने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया। हालांकि पुलिस को शुरुआती जांच में ही कई विरोधाभास नजर आने लगे। घटनास्थल से मिले सुराग और मोनू के घर के आसपास के हालात मेल खाते दिखाई दे रहे थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले। फुटेज में घटना वाली रात कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं, जिसमें मोनू और एक अन्य व्यक्ति की गतिविधियां शामिल थीं। जब पुलिस ने हिना और मोनू से अलग-अलग पूछताछ की तो दोनों के बयानों में काफी अंतर पाया गया। इसी आधार पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला धीरे-धीरे खुलने लगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मोनू ने बताया कि नरेश और उसकी पत्नी हिना के बीच पिछले कुछ समय से नजदीकियां बढ़ रही थीं। नरेश आर्थिक रूप से मजबूत था, जबकि मोनू मजदूरी करता था और पैसों की तंगी से जूझ रहा था। इसी असंतुलन के बीच नरेश अक्सर मोनू के घर आने लगा था और धीरे-धीरे उसके और हिना के बीच संबंध गहरे होते चले गए। शुरुआत में मोनू इस स्थिति को नजरअंदाज करता रहा क्योंकि उसे नरेश से आर्थिक मदद मिलती थी और घर का खर्च चल रहा था, लेकिन समय के साथ यह स्थिति उसके लिए असहनीय होती गई। जांच में यह भी सामने आया कि हिना को भी नरेश से आर्थिक मदद मिलने लगी थी और धीरे-धीरे वह उसके करीब होती चली गई। नरेश इस पूरे रिश्ते को एकतरफा अधिकार की तरह देखने लगा था, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण होती गई। पुलिस के अनुसार घटना वाले दिन शराब के दौरान विवाद बढ़ा और उसी दौरान मोनू ने अपने एक साथी को बुला लिया। आरोप है कि नरेश को घर के अंदर बुलाकर जब वह हिना के साथ था, तभी पीछे से तार से उसका गला घोंट दिया गया।
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को कुछ समय तक घर में ही छिपाए रखा। इसके बाद देर रात उसे ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई और शव को सुनसान गली में फेंक दिया गया ताकि यह किसी बाहरी वारदात जैसा लगे। पुलिस ने मौके से मिले तार और अन्य भौतिक साक्ष्यों को जब्त कर लिया है और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की रही, जिनके आधार पर पूरी कड़ी जुड़ती गई। शुरुआत में यह मामला अंधी हत्या जैसा लग रहा था, लेकिन जांच ने इसे एक जटिल रिश्तों के विवाद में बदल दिया। पुलिस का यह भी कहना है कि सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की जांच में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
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राजधानी लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में सामने आए पान दुकानदार नरेश की हत्या के मामले ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया था। शुरुआत में यह मामला किसी लूट या अज्ञात हमले जैसा लग रहा था, लेकिन पुलिस की गहन जांच में जो सच सामने आया उसने रिश्तों और भरोसे की पूरी कहानी ही बदल दी। जांच के बाद पुलिस ने इस हत्याकांड में मृतक के करीबी दोस्त मोनू, उसकी पत्नी हिना और एक अन्य साथी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यह हत्या किसी अचानक गुस्से का नतीजा नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही आपसी खींचतान, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत संबंधों के उलझे हुए ताने-बाने का परिणाम थी। यह घटना उस समय सामने आई जब नवंबर महीने के अंतिम दिनों में सुबह-सुबह स्थानीय लोगों ने एक सुनसान गली के मोड़ पर एक युवक का शव देखा। शव के गले पर तार से दबाने के निशान स्पष्ट थे और शरीर पर चोटों के संकेत भी मौजूद थे। सबसे अहम बात यह थी कि मृतक के पैरों में जूते-चप्पल नहीं थे, जिससे पुलिस को शक हुआ कि हत्या कहीं और की गई है और बाद में शव को यहां लाकर फेंका गया है। मौके की स्थिति देखकर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और शव की पहचान नरेश के रूप में हुई, जो इलाके में पान की दुकान चलाता था और स्थानीय लोगों के बीच जाना-पहचाना चेहरा था।
शिनाख्त के बाद पुलिस ने नरेश के सामाजिक और निजी संबंधों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि उसका मोनू नाम के व्यक्ति से गहरा दोस्ताना संबंध था और वह अक्सर उसके घर आता-जाता था। इसी दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि नरेश की मोनू की पत्नी हिना से भी नजदीकी बढ़ रही थी। यह जानकारी मिलते ही जांच की दिशा बदल गई और पुलिस ने मोनू को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पूछताछ में मोनू ने स्वीकार किया कि नरेश उसके घर आता था और उसकी उससे दोस्ती थी, लेकिन उसने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया। हालांकि पुलिस को शुरुआती जांच में ही कई विरोधाभास नजर आने लगे। घटनास्थल से मिले सुराग और मोनू के घर के आसपास के हालात मेल खाते दिखाई दे रहे थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले। फुटेज में घटना वाली रात कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं, जिसमें मोनू और एक अन्य व्यक्ति की गतिविधियां शामिल थीं। जब पुलिस ने हिना और मोनू से अलग-अलग पूछताछ की तो दोनों के बयानों में काफी अंतर पाया गया। इसी आधार पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला धीरे-धीरे खुलने लगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मोनू ने बताया कि नरेश और उसकी पत्नी हिना के बीच पिछले कुछ समय से नजदीकियां बढ़ रही थीं। नरेश आर्थिक रूप से मजबूत था, जबकि मोनू मजदूरी करता था और पैसों की तंगी से जूझ रहा था। इसी असंतुलन के बीच नरेश अक्सर मोनू के घर आने लगा था और धीरे-धीरे उसके और हिना के बीच संबंध गहरे होते चले गए। शुरुआत में मोनू इस स्थिति को नजरअंदाज करता रहा क्योंकि उसे नरेश से आर्थिक मदद मिलती थी और घर का खर्च चल रहा था, लेकिन समय के साथ यह स्थिति उसके लिए असहनीय होती गई। जांच में यह भी सामने आया कि हिना को भी नरेश से आर्थिक मदद मिलने लगी थी और धीरे-धीरे वह उसके करीब होती चली गई। नरेश इस पूरे रिश्ते को एकतरफा अधिकार की तरह देखने लगा था, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण होती गई। पुलिस के अनुसार घटना वाले दिन शराब के दौरान विवाद बढ़ा और उसी दौरान मोनू ने अपने एक साथी को बुला लिया। आरोप है कि नरेश को घर के अंदर बुलाकर जब वह हिना के साथ था, तभी पीछे से तार से उसका गला घोंट दिया गया।
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को कुछ समय तक घर में ही छिपाए रखा। इसके बाद देर रात उसे ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई और शव को सुनसान गली में फेंक दिया गया ताकि यह किसी बाहरी वारदात जैसा लगे। पुलिस ने मौके से मिले तार और अन्य भौतिक साक्ष्यों को जब्त कर लिया है और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की रही, जिनके आधार पर पूरी कड़ी जुड़ती गई। शुरुआत में यह मामला अंधी हत्या जैसा लग रहा था, लेकिन जांच ने इसे एक जटिल रिश्तों के विवाद में बदल दिया। पुलिस का यह भी कहना है कि सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की जांच में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
