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गुजरात में ‘रोड मर्डर’ का खुलासा: मिनी ट्रक से चाचा और चचेरे भाई की हत्या, ढाई साल बाद टूटी साजिश की परतें
Satyakatha
मेहसाणा में सामने आया दोहरा हत्या कांड; एक्सीडेंट दिखाकर कराई गई दोनों मौतें, पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और ट्रक की पेंटिंग पैटर्न से खोली गुत्थी
गुजरात के मेहसाणा में एक ऐसा मामला उजागर हुआ है जिसने सड़क दुर्घटना में मौत और हत्या के बीच की महीन रेखा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ढाई साल के अंतराल में चाचा और चचेरे भाई की एक जैसी सड़क दुर्घटनाओं में मौत ने परिवार को तोड़ दिया, लेकिन जब पुलिस ने जांच खोली तो सामने आया कि यह “एक्सीडेंट” नहीं, बल्कि सोची-समझी हत्या थी।
यह मामला आज की ताज़ा ख़बरों में सुर्खियों में है और पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में तेजी से ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया का हिस्सा बन चुका है।
मेहसाणा के नानी कड़ी रोड पर रहने वाले सुदेश पटेल ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि उसने ढाई साल में अपने चाचा और चचेरे भाई राकेश की हत्या कराई। दोनों वारदातों में एक ही तरीका अपनाया गया — मिनी ट्रक से टक्कर मारकर दुर्घटना जैसा दिखाना।
पहली हत्या 2020 में हुई थी जबकि दूसरी घटना इसी साल जनवरी में हुई।
क्यों हुई हत्या?
पुलिस के अनुसार विवाद की जड़ साझा दुकान और संपत्ति थी।
सुदेश का आरोप है कि चाचा और उनका बेटा राकेश उसे दुकान से निकालकर समाज से बहिष्कृत करना चाहते थे। वह दावा करता है कि उसका हिस्सा 60 लाख रुपये बनता था लेकिन परिवार ने उसे केवल पाँच लाख देने की बात कही।
इसी नाराजगी, अपमान और बदले की भावना ने उसे योजनाबद्ध हत्या की तरफ धकेल दिया।
कैसे खुला राज?
चचेरे भाई राकेश की हालिया मौत को परिवार ने संदिग्ध बताते हुए पुलिस को बताया कि ढाई साल में “एक जैसे एक्सीडेंट” में दो मौतें होना सामान्य नहीं है।
मेहसाणा पुलिस ने—
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फोरेंसिक जांच
-
CCTV फुटेज
-
मिनी ट्रक की पेंटिंग स्टाइल
-
उसके पीछे लिखे नाम और डिजाइन पैटर्न
-
तकनीकी निगरानी
—इन सबकी मदद से ट्रक की पहचान की।
एक स्थानीय पेंटर ने पुष्टि की कि उसने यह ट्रक तेलगढ़ क्षेत्र में पेंट किया था। वहां से पुलिस ट्रक मालिक तक पहुंची, जिसने माना कि दुर्घटना वाली रात यह ट्रक सुदेश को किराये पर दिया गया था।
इसके बाद गिरफ्तार किए गए दो शूटरों—राजदीप सिंह और राजूभा झाला—ने कबूल किया कि सुदेश ने राकेश की हत्या के लिए उन्हें पांच लाख रुपये दिए थे।
आरोपी का कबूलनामा
पुलिस कस्टडी में सुदेश ने बिना किसी पछतावे के कहा— “मैंने जो किया, सही किया।”
उसने यह भी बताया कि चाचा को नहर के पास मारा गया था और वहां CCTV न होने से वह बच गया। लेकिन दूसरी बार उसी चाल के बावजूद वह पुलिस की नजर से नहीं बच सका।
परिवार की प्रतिक्रिया
मृतक राकेश की पत्नी भूमि पटेल ने कहा,
“मेरे पति बहुत अच्छे ड्राइवर थे, दुर्घटना की आशंका ही नहीं थी। हमें भरोसा था कि यह हत्या है, लेकिन हत्यारा अपने ही परिवार का होगा—यह कल्पना भी नहीं थी।”
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने साजिश और हत्या के आरोप में सुदेश पटेल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मामला अब गुजरात पुलिस की सबसे संवेदनशील जांचों में शामिल हो चुका है और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचार अपडेट में भी चर्चा का विषय है।
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Satyakatha
गुजरात के मेहसाणा में एक ऐसा मामला उजागर हुआ है जिसने सड़क दुर्घटना में मौत और हत्या के बीच की महीन रेखा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ढाई साल के अंतराल में चाचा और चचेरे भाई की एक जैसी सड़क दुर्घटनाओं में मौत ने परिवार को तोड़ दिया, लेकिन जब पुलिस ने जांच खोली तो सामने आया कि यह “एक्सीडेंट” नहीं, बल्कि सोची-समझी हत्या थी।
यह मामला आज की ताज़ा ख़बरों में सुर्खियों में है और पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में तेजी से ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया का हिस्सा बन चुका है।
मेहसाणा के नानी कड़ी रोड पर रहने वाले सुदेश पटेल ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि उसने ढाई साल में अपने चाचा और चचेरे भाई राकेश की हत्या कराई। दोनों वारदातों में एक ही तरीका अपनाया गया — मिनी ट्रक से टक्कर मारकर दुर्घटना जैसा दिखाना।
पहली हत्या 2020 में हुई थी जबकि दूसरी घटना इसी साल जनवरी में हुई।
क्यों हुई हत्या?
पुलिस के अनुसार विवाद की जड़ साझा दुकान और संपत्ति थी।
सुदेश का आरोप है कि चाचा और उनका बेटा राकेश उसे दुकान से निकालकर समाज से बहिष्कृत करना चाहते थे। वह दावा करता है कि उसका हिस्सा 60 लाख रुपये बनता था लेकिन परिवार ने उसे केवल पाँच लाख देने की बात कही।
इसी नाराजगी, अपमान और बदले की भावना ने उसे योजनाबद्ध हत्या की तरफ धकेल दिया।
कैसे खुला राज?
चचेरे भाई राकेश की हालिया मौत को परिवार ने संदिग्ध बताते हुए पुलिस को बताया कि ढाई साल में “एक जैसे एक्सीडेंट” में दो मौतें होना सामान्य नहीं है।
मेहसाणा पुलिस ने—
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फोरेंसिक जांच
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CCTV फुटेज
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मिनी ट्रक की पेंटिंग स्टाइल
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उसके पीछे लिखे नाम और डिजाइन पैटर्न
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तकनीकी निगरानी
—इन सबकी मदद से ट्रक की पहचान की।
एक स्थानीय पेंटर ने पुष्टि की कि उसने यह ट्रक तेलगढ़ क्षेत्र में पेंट किया था। वहां से पुलिस ट्रक मालिक तक पहुंची, जिसने माना कि दुर्घटना वाली रात यह ट्रक सुदेश को किराये पर दिया गया था।
इसके बाद गिरफ्तार किए गए दो शूटरों—राजदीप सिंह और राजूभा झाला—ने कबूल किया कि सुदेश ने राकेश की हत्या के लिए उन्हें पांच लाख रुपये दिए थे।
आरोपी का कबूलनामा
पुलिस कस्टडी में सुदेश ने बिना किसी पछतावे के कहा— “मैंने जो किया, सही किया।”
उसने यह भी बताया कि चाचा को नहर के पास मारा गया था और वहां CCTV न होने से वह बच गया। लेकिन दूसरी बार उसी चाल के बावजूद वह पुलिस की नजर से नहीं बच सका।
परिवार की प्रतिक्रिया
मृतक राकेश की पत्नी भूमि पटेल ने कहा,
“मेरे पति बहुत अच्छे ड्राइवर थे, दुर्घटना की आशंका ही नहीं थी। हमें भरोसा था कि यह हत्या है, लेकिन हत्यारा अपने ही परिवार का होगा—यह कल्पना भी नहीं थी।”
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने साजिश और हत्या के आरोप में सुदेश पटेल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मामला अब गुजरात पुलिस की सबसे संवेदनशील जांचों में शामिल हो चुका है और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचार अपडेट में भी चर्चा का विषय है।
