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काम दिलाने वाले फुफेरे भाई की पत्नी से दिल लगाने में मिली मौत: सेप्टिक टैंक में 5 साल तक दबा रहा राज
Satyakatha
विश्वास की आड़ में छल — दतिया के गोविंदा को इंदौर ले गया मौसेरा भाई, पत्नी से बने अवैध संबंध और फिर हत्या कर पांच साल तक छिपाए सबूत
रिश्तों के बीच पनपे अवैध संबंध कभी-कभी ऐसे अंजाम तक पहुंच जाते हैं, जिनकी कल्पना तक भयावह होती है। दतिया जिले के गांव घुघसी के 20 वर्षीय युवक गोविंदा रावत के साथ ऐसा ही हुआ। काम दिलाने के नाम पर उसका मौसेरा भाई हनुमंत रावत उसे इंदौर ले गया। कुछ दिनों तक साथ रहने के दौरान गोविंदा ने हनुमंत की पत्नी से अवैध संबंध बना लिए। बाद में यही रिश्ता उसकी मौत का कारण बन गया। हत्या के बाद हनुमंत ने शव को घर के सेप्टिक टैंक में डालकर सीमेंट से बंद कर दिया, जिसे पुलिस ने पूरे पांच साल बाद बरामद किया।
काम, ‘काम’ और काल
गोविंदा एक छोटे से गांव में रहने वाला महत्वाकांक्षी युवक था, जो शहर जाकर अपनी किस्मत आज़माना चाहता था। जब उसका मौसेरा भाई हनुमंत इंदौर से गांव आया, तो गोविंदा ने नौकरी दिलाने की गुज़ारिश की। हनुमंत ने हामी भरी और गोविंदा को अपने साथ इंदौर ले गया। मां कमला ने आशीर्वाद देते हुए बेटे को रवाना किया, पर उन्हें क्या पता था कि यह उनकी अंतिम विदाई बन जाएगी।
पहली बार इंदौर से लौटने पर गोविंदा बेहद उदास था, पर उसने कुछ नहीं बताया। कुछ महीनों बाद हनुमंत फिर आया और गोविंदा को अपने साथ दूसरी बार ले गया। इसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। जब हनुमंत से बेटे के बारे में पूछा गया, तो उसने हर बार यही कहा — “मुझे क्या पता, वह कहीं चला गया होगा।”
मां की जिद और पुलिस की खोज
पांच साल गुजर गए, पर बेटे की कोई खबर नहीं मिली। 2023 में कमला ने आखिरकार थाने में शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी टीआई दिलीप समाधिया ने मामला “गुम इंसान क्रमांक 27/23” के तहत दर्ज किया और जांच शुरू की।
हनुमंत के जवाब विरोधाभासी निकले। मुखबिर से सूचना मिली कि वह इंदौर के लसुडिया इलाके में रह रहा है। एसपी सूरज वर्मा, एएसपी सुनील कुमार शिवहरे, और एसडीओपी विनायक शुक्ला के निर्देशन में पुलिस टीम ने इंदौर पहुंचकर हनुमंत को गिरफ्तार किया।
कबूली गई साजिश
शुरुआती पूछताछ में हनुमंत बचता रहा, पर साक्ष्यों के दबाव में टूट गया। उसने कबूल किया —
“गोविंदा मेरी पत्नी पर बुरी नजर रखता था। मैंने उसे कई बार समझाया, पर उसने बात नहीं मानी। एक दिन मैंने नशे में गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। फिर डर के मारे शव को टॉयलेट के गड्ढे में डालकर ऊपर से सीमेंट डाल दिया।”
हनुमंत की निशानदेही पर रायसेन जिले के खनपुरा गांव में खुदाई करवाई गई। सेप्टिक टैंक से मानव कंकाल मिला, जिसकी पहचान डीएनए जांच में गोविंदा रावत के रूप में हुई।
15 दिन में बना रिश्ता, मौत तक पीछा नहीं छोड़ा
जांच में सामने आया कि गोविंदा जब काम की तलाश में इंदौर पहुंचा, तो 20 दिन तक हनुमंत के घर में ही रहा। इस दौरान वह दिन में अकेला रहता और हनुमंत की पत्नी से नज़दीकी बढ़ने लगी। अश्लील फिल्में देखने से शुरू हुई बातचीत जल्द ही शारीरिक संबंधों में बदल गई।
एक महीने बाद हनुमंत ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। गोविंदा शर्म के कारण गांव लौट आया, लेकिन फोन पर भाभी से संपर्क बनाए रखा। इस बात ने हनुमंत को भीतर तक झकझोर दिया और उसने बदले की ठानी। योजनाबद्ध तरीके से वह गोविंदा को फिर अपने साथ ले गया और उसकी हत्या कर दी।
टीम की सराहनीय भूमिका
इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करने में थाना प्रभारी दिलीप समाधिया की टीम का अहम योगदान रहा। टीम में एसआई हिमांशु भार्गव, एएसआई मलखान सिंह, प्रधान आरक्षक पुष्पेंद्र परिहार और आरक्षक अंकित शर्मा शामिल थे।
एसपी सूरज वर्मा ने कहा कि यह एक “मां की उम्मीद को सच्चाई में बदलने वाली जांच” थी, भले ही वह सच्चाई दिल दहला देने वाली निकली।
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Satyakatha
रिश्तों के बीच पनपे अवैध संबंध कभी-कभी ऐसे अंजाम तक पहुंच जाते हैं, जिनकी कल्पना तक भयावह होती है। दतिया जिले के गांव घुघसी के 20 वर्षीय युवक गोविंदा रावत के साथ ऐसा ही हुआ। काम दिलाने के नाम पर उसका मौसेरा भाई हनुमंत रावत उसे इंदौर ले गया। कुछ दिनों तक साथ रहने के दौरान गोविंदा ने हनुमंत की पत्नी से अवैध संबंध बना लिए। बाद में यही रिश्ता उसकी मौत का कारण बन गया। हत्या के बाद हनुमंत ने शव को घर के सेप्टिक टैंक में डालकर सीमेंट से बंद कर दिया, जिसे पुलिस ने पूरे पांच साल बाद बरामद किया।
काम, ‘काम’ और काल
गोविंदा एक छोटे से गांव में रहने वाला महत्वाकांक्षी युवक था, जो शहर जाकर अपनी किस्मत आज़माना चाहता था। जब उसका मौसेरा भाई हनुमंत इंदौर से गांव आया, तो गोविंदा ने नौकरी दिलाने की गुज़ारिश की। हनुमंत ने हामी भरी और गोविंदा को अपने साथ इंदौर ले गया। मां कमला ने आशीर्वाद देते हुए बेटे को रवाना किया, पर उन्हें क्या पता था कि यह उनकी अंतिम विदाई बन जाएगी।
पहली बार इंदौर से लौटने पर गोविंदा बेहद उदास था, पर उसने कुछ नहीं बताया। कुछ महीनों बाद हनुमंत फिर आया और गोविंदा को अपने साथ दूसरी बार ले गया। इसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। जब हनुमंत से बेटे के बारे में पूछा गया, तो उसने हर बार यही कहा — “मुझे क्या पता, वह कहीं चला गया होगा।”
मां की जिद और पुलिस की खोज
पांच साल गुजर गए, पर बेटे की कोई खबर नहीं मिली। 2023 में कमला ने आखिरकार थाने में शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी टीआई दिलीप समाधिया ने मामला “गुम इंसान क्रमांक 27/23” के तहत दर्ज किया और जांच शुरू की।
हनुमंत के जवाब विरोधाभासी निकले। मुखबिर से सूचना मिली कि वह इंदौर के लसुडिया इलाके में रह रहा है। एसपी सूरज वर्मा, एएसपी सुनील कुमार शिवहरे, और एसडीओपी विनायक शुक्ला के निर्देशन में पुलिस टीम ने इंदौर पहुंचकर हनुमंत को गिरफ्तार किया।
कबूली गई साजिश
शुरुआती पूछताछ में हनुमंत बचता रहा, पर साक्ष्यों के दबाव में टूट गया। उसने कबूल किया —
“गोविंदा मेरी पत्नी पर बुरी नजर रखता था। मैंने उसे कई बार समझाया, पर उसने बात नहीं मानी। एक दिन मैंने नशे में गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। फिर डर के मारे शव को टॉयलेट के गड्ढे में डालकर ऊपर से सीमेंट डाल दिया।”
हनुमंत की निशानदेही पर रायसेन जिले के खनपुरा गांव में खुदाई करवाई गई। सेप्टिक टैंक से मानव कंकाल मिला, जिसकी पहचान डीएनए जांच में गोविंदा रावत के रूप में हुई।
15 दिन में बना रिश्ता, मौत तक पीछा नहीं छोड़ा
जांच में सामने आया कि गोविंदा जब काम की तलाश में इंदौर पहुंचा, तो 20 दिन तक हनुमंत के घर में ही रहा। इस दौरान वह दिन में अकेला रहता और हनुमंत की पत्नी से नज़दीकी बढ़ने लगी। अश्लील फिल्में देखने से शुरू हुई बातचीत जल्द ही शारीरिक संबंधों में बदल गई।
एक महीने बाद हनुमंत ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। गोविंदा शर्म के कारण गांव लौट आया, लेकिन फोन पर भाभी से संपर्क बनाए रखा। इस बात ने हनुमंत को भीतर तक झकझोर दिया और उसने बदले की ठानी। योजनाबद्ध तरीके से वह गोविंदा को फिर अपने साथ ले गया और उसकी हत्या कर दी।
टीम की सराहनीय भूमिका
इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करने में थाना प्रभारी दिलीप समाधिया की टीम का अहम योगदान रहा। टीम में एसआई हिमांशु भार्गव, एएसआई मलखान सिंह, प्रधान आरक्षक पुष्पेंद्र परिहार और आरक्षक अंकित शर्मा शामिल थे।
एसपी सूरज वर्मा ने कहा कि यह एक “मां की उम्मीद को सच्चाई में बदलने वाली जांच” थी, भले ही वह सच्चाई दिल दहला देने वाली निकली।
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