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खोजी कुत्ते ने खोला कत्ल का राज, प्रेमिका की हत्या कर बोरे में छिपाई थी लाश
सत्यकथा
अकेलेपन और लालच ने लिया खतरनाक मोड़, प्रेमिका की जान गई
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खोजी कुत्ते ने खोला कत्ल का राज, प्रेमिका की हत्या कर बोरे में छिपाई थी लाश
सत्यकथा
राजस्थान की राजधानी जयपुर के शास्त्री नगर इलाके में 23 दिसंबर की सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब एक रिहायशी मकान के पोर्च में रखे सफेद प्लास्टिक के बोरे से महिला का शव बरामद हुआ। शुरुआत में यह मामला रहस्यमय लग रहा था, लेकिन पुलिस के खोजी कुत्ते (डॉग स्क्वायड) ने चंद ही मिनटों में इस जघन्य अपराध की गुत्थी सुलझा दी।
शास्त्री नगर के सुभाष नगर क्षेत्र में रहने वाले ठेकेदार सूरज प्रकाश रोज़ की तरह सुबह अपने घर के पोर्च में पहुंचे, तो उनकी नजर एक बड़े सफेद बोरे पर पड़ी। बोरा वहां पहले नहीं था। पत्नी मुन्नी देवी से पूछताछ और ऊपर रहने वाले किराएदारों से जानकारी लेने के बाद भी जब बोरे के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, तो संदेह गहराने लगा।
रस्सी काटकर जैसे ही बोरे को खोला गया, तेज दुर्गंध फैली और अंदर महिला का शव दिखाई दिया। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई, जिसके बाद कुछ ही देर में इलाके में भीड़ जमा हो गई।
मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट कर दिया कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या का मामला है। महिला के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए फोरेंसिक टीम ने बोरा, रस्सी और अन्य साक्ष्यों को जब्त कर लिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त बजरंग सिंह शेखावत और डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा स्वयं मौके पर पहुंचे।
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि हत्यारे ने शव को इसी पोर्च में क्यों छोड़ा? क्या वह किसी को फंसाना चाहता था या फिर यह महज़ जल्दबाजी में उठाया गया फैसला था?
जांच के दौरान पुलिस ने डॉग स्क्वायड की मदद ली। प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड को शव और घटनास्थल की गंध सूंघाई गई। कुत्ता सीधे घटनास्थल से निकलकर पास की गलियों से होता हुआ करीब सौ मीटर दूर एक मकान के सामने जाकर रुक गया और लगातार भौंकने लगा।
यह मकान 48 वर्षीय जितेंद्र सिंह का था, जो एक निजी कंपनी में क्लर्क के पद पर कार्यरत था और लंबे समय से अकेला रह रहा था।
पुलिस ने मकान की तलाशी ली तो अंदर के फर्श पर हाल ही में की गई असामान्य सफाई और डिटर्जेंट की तेज गंध मिली। इसी दौरान आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में एक व्यक्ति भारी बोरा घसीटते हुए दिखाई दिया, जिसकी कद-काठी और कपड़े जितेंद्र सिंह से मेल खाते थे।
सबूत सामने आने पर जितेंद्र को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में वह बचने की कोशिश करता रहा, लेकिन जब डॉग स्क्वायड, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक संकेतों को सामने रखा गया, तो वह टूट गया।
पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि मृतका कुसुम देवी (बदला नाम) से उसके पिछले कई वर्षों से संबंध थे। दोनों अकेलेपन से जूझ रहे थे और इसी दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आए। समय के साथ यह रिश्ता भावनात्मक और आर्थिक निर्भरता में बदल गया।
जांच में सामने आया कि हाल के महीनों में पैसों को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा था। घटना वाली रात भी इसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो अचानक हिंसक झड़प में बदल गई। धक्का लगने से महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद घबराए आरोपी ने शव को छिपाने और सबूत मिटाने की कोशिश की। उसने बाजार से प्लास्टिक के बोरे और रस्सी खरीदी, शव को उसमें बंद किया और पहचान छिपाने के इरादे से दूसरे के पोर्च में छोड़ दिया। लेकिन उसकी यह चाल पुलिस के खोजी कुत्ते के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने अपराध के बाद जिस तरह सबूत मिटाने की कोशिश की, उससे उसकी मंशा साफ जाहिर होती है। आरोपी के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया गया।
मामले में पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, डॉग स्क्वायड की भूमिका और आरोपी की स्वीकारोक्ति को आधार बनाते हुए अदालत ने जितेंद्र सिंह को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह मामला केवल एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि अकेलेपन, भावनात्मक निर्भरता, आर्थिक दबाव और सामाजिक भय के खतरनाक मेल की तस्वीर भी पेश करता है। एक क्षण का क्रोध और गलत निर्णय दो जिंदगियों को तबाही की ओर ले गया।
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