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सत्यकथा: मनोज हत्याकांड में पत्नी और उसके प्रेेमी को मिली आजीवन कारावास की सजा
हरदा
उस रोज हरदा की जिला अदालत में पेशी पर आई एक निहायत ही खूबसूरत युवती मनीषा की नजरें लगातार अदालत में आने वाले रास्ते पर टिकी हुई थी। कहते हैं कि नजरें मन की हर बात बयां कर देती है। इसलिए मनीषा नाम की उस युवती की निगाहों में झलक रही बेताबी से जाहिर था कि उसे जिसका इंताजार है, वो जरूर उसके लिए बहुत खास है। इसलिए थोड़ी देर बाद ही उसे सूरज अदालत की तरफ आते दिखाई दिया तो उसके चेहरे पर संतोष की लहर दौड़ गई।
देर कर दी, कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी। सूरज के पास आते ही मनीषा ने उससे कहा।
मंदिर चला गया था यार। मन्नत मांग कर आया हूं। आज बरी होने के बाद सीधे ही हम दोनों मंदिर चलेंगे।
तुम्हें भरोसा है कि हम बरी हो जाएंगे।
पूरा-पूरा। तुम्हें नहीं है क्या?
मुझे तो केवल तुम पर भरोसा है। कहकर मनीषा ने एक लंबी सांस ली। यह देखकर सूरज बोला परेशान न हो मैं वकील से मिलकर आता हूं। यह कहते हुए सूरज उसके कंधे पर हाथ रख मनीषा को सांत्वना देते हुए वकील से मिलने चला गया।
वास्तव में मनीषा और सूरज दोनों पर ही अक्टूबर 2018 में मनीषा के पति मनोज की हत्या करने का आरोप था। पांच साल से अदालत में उनकी सुनवाई चल रही थी जिसके बाद उस रोज अदालत अपना फैसला सुनाने वाली थी। जाहिर सी बात है कि हर आरोपी चाहता है कि उसे निर्दोष माना जाए। चूंकि ऐसे मामलों में फंसने के बाद वह दुनिया भर का दान-धर्म कर चुका है और अदालत से बरी होने के बाद कई कथा-भंडारे करवाने की मान्यता भी मान लेता है। मोटी फीस लेने वाले ज्योतिषाचार्य भी ग्रह स्थिति के अनुसार उनको बरी हो जाने का भरोसा दिला देते हैं। इसलिए सूरज और मनीषा को भी भरोसा था कि आज अदालत उन्हें हत्या के आरोप से बरी कर देगी।
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लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ तय समय पर विशेष न्यायाधीश ने पति की हत्या के आरोप में मनीषा और उसके प्रेमी सूरज उर्फ सीपी को आजीवन कारावास और दो-दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा-201 में दोषी पाए जाने पर तीन-तीन साल का सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा भी सुनाई। जिसके बाद पांच साल पुराना हत्याकांड फिर चर्चा में आ गया जो इस प्रकार है।
12-13 अक्टूबर 2018 की रात के कोई एक बजे का वक्त था। जिला मुख्यालय हरदा की सड़कों के साथ-साथ पुलिस कोतवाली में भी सन्नाटा पसरा हुआ था। इसी दौरान थाने के फोन पर ड्यूटी आफीसर को इलाके की शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले मनोज पर जानलेवा हमले की खबर मिली। पुलिस को सह सूचना पास के गांव में रहने वाले मनोज का भाई दे रहा था, जिसको यह खबर कुछ ही देर पहले उसकी भाभी यानी मनोज की पत्नी मनीषा ने दी थी।
ड्यूटी ऑफीसर ने तुरंत आधी रात को ही यह जानकारी तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी को दी और खुद दलबल लेकर मौके पर पहुंच गए। घटनास्थल शिक्षक कॉलोनी कोतवाली से ज्यादा दूर नहीं था। इसलिए पुलिस जब कॉलोनी में बने मनोज के घर पहुंची तब तक पत्नी की चीख पुकार सुनकर कॉलोनी की खासी भीड़ वहां जमा हो चुकी थी। पास के गांव से मृतक का भाई हरदा पहुंच चुका था। उसने पुलिस को बताया कि रात लगभग एक बजे भाभी मनीषा ने उसको फोन करके बताया था कि कुछ लोग भाई को बुरी तरह से घायल करके भाग गए हैं, जिसके बाद मैंने पुलिस को सूचना दी थी। प्रारंभिक पूछताछ में मनीषा ने भी पुलिस को यही बताया कि उसे नहीं मालूम कि वे लोग कौन थे और उनकी मेरे पति से क्या दुश्मनी थी। मनीषा ने हमलावरों को देखा भी नहीं था। वह तो बाद में उस समय मौके पर पहुंची थी जब मनोज ने चीखकर उसे पुकारा था। अगले दिन तत्कालीन एसपी भी मौके पर पहुंचे, जहां घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने टीआई के नेतृत्व में एक टीम गठित कर मनोज के हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दे दिए।
पास के गांव का रहने वाला मनोज कई साल पहले गांव छोड़कर हरदा में आकर बस गया था। यहां मनोज ने ं अपना छोटा सा घर भी बना लिया था। मनीषा को मनोज से कोई शिकायत नहीं थी। सिवाए इसके की कलेक्शन के काम में मनोज तो लगभग पूरा दिन ही बाहर रहता था। बच्चे भी स्कूल चले जाते थे। ऐसे में मनीषा दिन भर घर में अकेली खाली बैठी रहती थी। इस बात की शिकायत उसने कई बार मनोज से की तो उसने मनीषा के लिए घर में ही किराना नुमा छोटा सा जनरल स्टोर खोल दिया। सुबह के समय मनोज दुकान में समय देता और खाना बनाने के काम से फुरसत होकर मनीषा स्टोर संभालती एवं मनोज अपनी गाड़ी लेकर दिन भर के लिए काम पर निकल जाता।
कोई तीन किलोमीटर दूर बसे छोटी हरदा गांव में रहने वाले एक युवक से मनीषा की छोटी बहन ने प्रेम विवाह किया था। जिसका एक रिश्तेदार सूरज का हरदा आना-जाना था। एक दिन सूरज घूमते-घूमते ं मनीषा की दुकान पर पहुंचगया। उस समय मनोज अपने काम पर निकल चुका था और दोनों बेटियां स्कूल गई थीं। मनीषा उसको अच्छे से पहचानती थी। उसने सूरज को घर में बैठाकर हालचाल पूछे और चाय पानी पिलाकर विदा कर दिया, लेकिन वह इस बात पर ध्यान नहीं दे पाई कि जब तक सूरज वहां रहा उसकी नजर मनीषा की पतली कमर और भरे हुए बदन पर फिसलती रही थी। इसलिए सूरज उस रोज तो वहां से उठकर आ गया, लेकिन फिर अक्सर मनीषा की दुकान पर छोटा-मोटा सामान खरीदने के बहाने आने-जाने लगा। जिससे दोनों के बीच अपनापन बढ़ने लगा।
वास्तव में सूरज सामान लेने के बहाने मनीषा की सुंदरता के दर्शन करने उसकी दुकान पर जाता था। जब तक मनीषा सामने रहती वह उसे पी जाने वाली नजरों से घूरता रहता। जिससे कुछ ही दिनों में मनीषा, सूरज के बार-बार दुकान पर आने का कारण समझ गई। मनीषा गांव की रहने वाली थी। शहर आने के बाद वह खुद को काफी स्मार्ट समझने लगी थी। ऐसे में जब अपने से उम्र में काफी छोटे सूरज को अपनी तरफ ललचाई नजरों से घूरते देखती तो उसे खुद गर्व होने लगता। इसलिए धीरे-धीरे वह भी सूरज को अपनी सुंदरता की झलक दिखाने की कोशिश करने लगी। जिससे बात धीरे-धीरे आगे बढ़ते-बढ़ते इतने आगे बढ़ गई कि कमलेश के घर से निकलते ही सूरज शिक्षक कॉलोनी पहुंच जाता, जहां सूरज को देखते ही मनीषा उसे अंदर के कमरे में ले जाती और फिर कुछ ही देर में कमरा उन दोनों की सांसों की आवाज से गूंजने लगता। लेकिन ऐसे काम मोहल्ले वालों की नजर से ज्यादा देर तक छुपे नहीं रहते। जल्द ही मनीषा और सूरज के संबंधों की चर्चा होने लगी जो दो साल में मनोज के कान तक भी पहुंच गई।
मनोज अपनी पत्नी को बहुत चाहता था, इसलिए उसने उसे समझा बुझाकर रास्ते पर लाने की कोशिश की, लेकिन अब तक मनीषा पर सूरज का रंग पूरी तरह से चढ़ चुका था। इसलिए मनोज की बात वह एक कान से सुनकर दूसरे से बाहर निकाल देती। मनोज ने उस पर दबाव बनाया तो मनीषा के प्रेमी सूरज ने एक दिन सरेआम मनीषा के सामने ही मनोज को अपनी हद में रहने की हिदायत दे दी। मनोज सीधा-साधा आदमी था सो डरकर रहने लगा, जिससे मनीषा खुलकर अपने प्रेमी के संग अय्याशी करने लगी। इधर मनोज की दोनों बेटियां बड़ी हो रही थीं। वह जानता था कि मनीषा की इन हरकतों का असर बेटियों पर पड़ेगा, इसलिए उसने मनीषा को तलाक देने का मन बना लिया, लेकिन इसमें दिक्कत यह थी कि मनोज ने अपना मकान स्वयं के और पत्नी, दोनों के नाम पर बनवाया था। इसलिए तलाक के बाद मनीषा मकान पर अपना हक जता सकती थी। इसलिए सोच विचार के बाद मनोज ने तलाक की कार्रवाई शुरू करने से पहले मकान बेचने का फैसला कर चुपचाप ग्राहक खोजना शुरू कर दिए। इस बात की जानकारी मनीषा को लग गई तो प्रेमी की मदद से वह खुद मकान बेचने के लिए ग्राहक खोजने लगी। उसने चालीस लाख में सौदा कर चार लाख रुपया एडवांस भी ले लिया। इसकी जानकारी लगने पर मनोज ने उसे भला बुरा कहा तो मनीषा ने साफ कह दिया कि चुपचाप दस्तखत कर देना वर्ना तुम्हारे हाथ फिर कभी पेन पकड़ने लायक नहीं बचेंगे, लेकिन मनोज ने सोच लिया कि एक दिन तो मरना ही है फिर डरना कैसा। इससे वह भी विवाद करने पर उताऊ हो गया। यह देखकर मनीषा और सूरज समझ गए कि अब मनोज अगर जिंदा रहा तो उन लोगों को चैन से अय्याशी नहीं करने देगा। इसलिए दोनों ने मिलकर मनोज की हत्या की योजना बना ली।, जिसके चलते १२-१३ अक्टूबर की रात में मनोज के सो जाने के बाद मनीषा के इशारे पर सूरज उसके घर पहुंच गया और चाकू से उसका गलता रेतने के बाद मनीषा के संग अय्याशी कर वापस गांव भाग गया, जिसके बाद मनीषा ने अपने देवर को फोन करके पटना की जानकारी दी।

काल डिटेल से खुला था राज
मनीषा के शक के दायरे में आने के बाद पुलिस ने उसकी मोबाइल काल डिटेल निकाली जिसमें पता चला कि घटना दिनांक को मनीषा और सूरज के बीच कई बार बात हुई थी। इतना ही नहीं घटना वाली रात में भी देर रात को दोनों की बात हुई थी। पुलिस ने सूरज के मोबाइल की लोकेशन निकाली, जिसमें घटना के समय वह मनीषा के घर की पाई गई, जिससे पुलिस ने मनीषा से सघन पूछताछ की तो वह टूट गई और उसने पूरी कहानी सुना दी।
इस तरह फंसी कानून के जाल में
जांच के दौरान पुलिस का पहला शक मनीषा की छोटी बहन के पति पर था जो आरोपी सूरज का छोटा भाई है। जिस समय पुलिस उसके साथ सख्ती से पेश आ रही थी तब मनीषा भी थाने में मौजूद थी। इसलिए अपनी छोटी बहन के पति की तकलीफ उससे देखी नहीं गई। उसने टीआई से कहा कि इसे छोड़ दो, यह मेरे पति पर हमला करने वालों में नहीं था। इससे टीआई चौंक गए क्योंकि अब तक मनीषा पुलिस को यही बता रही थी कि उसने हमला करने वालों को नहीं देखा था। फिर अगर नहीं देखा तो यह कैसे देख लिया कि उसकी बहन का पति साथ नहीं था। इसलिए उन्होंने मनीषा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि अगर तेरी बहन का पति हमला करने वालों में शामिल नहीं था तो बताओ कौन-कौन थे। इस पर मनीषा कानून की गिरफ्त में आ गई। जिसकी जानकारी लगने पर प्रेमी सूरज को गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजक विनोद कुमार अहिरवार ने की।
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सत्यकथा: मनोज हत्याकांड में पत्नी और उसके प्रेेमी को मिली आजीवन कारावास की सजा
हरदा
उस रोज हरदा की जिला अदालत में पेशी पर आई एक निहायत ही खूबसूरत युवती मनीषा की नजरें लगातार अदालत में आने वाले रास्ते पर टिकी हुई थी। कहते हैं कि नजरें मन की हर बात बयां कर देती है। इसलिए मनीषा नाम की उस युवती की निगाहों में झलक रही बेताबी से जाहिर था कि उसे जिसका इंताजार है, वो जरूर उसके लिए बहुत खास है। इसलिए थोड़ी देर बाद ही उसे सूरज अदालत की तरफ आते दिखाई दिया तो उसके चेहरे पर संतोष की लहर दौड़ गई।
देर कर दी, कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी। सूरज के पास आते ही मनीषा ने उससे कहा।
मंदिर चला गया था यार। मन्नत मांग कर आया हूं। आज बरी होने के बाद सीधे ही हम दोनों मंदिर चलेंगे।
तुम्हें भरोसा है कि हम बरी हो जाएंगे।
पूरा-पूरा। तुम्हें नहीं है क्या?
मुझे तो केवल तुम पर भरोसा है। कहकर मनीषा ने एक लंबी सांस ली। यह देखकर सूरज बोला परेशान न हो मैं वकील से मिलकर आता हूं। यह कहते हुए सूरज उसके कंधे पर हाथ रख मनीषा को सांत्वना देते हुए वकील से मिलने चला गया।
वास्तव में मनीषा और सूरज दोनों पर ही अक्टूबर 2018 में मनीषा के पति मनोज की हत्या करने का आरोप था। पांच साल से अदालत में उनकी सुनवाई चल रही थी जिसके बाद उस रोज अदालत अपना फैसला सुनाने वाली थी। जाहिर सी बात है कि हर आरोपी चाहता है कि उसे निर्दोष माना जाए। चूंकि ऐसे मामलों में फंसने के बाद वह दुनिया भर का दान-धर्म कर चुका है और अदालत से बरी होने के बाद कई कथा-भंडारे करवाने की मान्यता भी मान लेता है। मोटी फीस लेने वाले ज्योतिषाचार्य भी ग्रह स्थिति के अनुसार उनको बरी हो जाने का भरोसा दिला देते हैं। इसलिए सूरज और मनीषा को भी भरोसा था कि आज अदालत उन्हें हत्या के आरोप से बरी कर देगी।
1.jpg)
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ तय समय पर विशेष न्यायाधीश ने पति की हत्या के आरोप में मनीषा और उसके प्रेमी सूरज उर्फ सीपी को आजीवन कारावास और दो-दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा-201 में दोषी पाए जाने पर तीन-तीन साल का सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा भी सुनाई। जिसके बाद पांच साल पुराना हत्याकांड फिर चर्चा में आ गया जो इस प्रकार है।
12-13 अक्टूबर 2018 की रात के कोई एक बजे का वक्त था। जिला मुख्यालय हरदा की सड़कों के साथ-साथ पुलिस कोतवाली में भी सन्नाटा पसरा हुआ था। इसी दौरान थाने के फोन पर ड्यूटी आफीसर को इलाके की शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले मनोज पर जानलेवा हमले की खबर मिली। पुलिस को सह सूचना पास के गांव में रहने वाले मनोज का भाई दे रहा था, जिसको यह खबर कुछ ही देर पहले उसकी भाभी यानी मनोज की पत्नी मनीषा ने दी थी।
ड्यूटी ऑफीसर ने तुरंत आधी रात को ही यह जानकारी तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी को दी और खुद दलबल लेकर मौके पर पहुंच गए। घटनास्थल शिक्षक कॉलोनी कोतवाली से ज्यादा दूर नहीं था। इसलिए पुलिस जब कॉलोनी में बने मनोज के घर पहुंची तब तक पत्नी की चीख पुकार सुनकर कॉलोनी की खासी भीड़ वहां जमा हो चुकी थी। पास के गांव से मृतक का भाई हरदा पहुंच चुका था। उसने पुलिस को बताया कि रात लगभग एक बजे भाभी मनीषा ने उसको फोन करके बताया था कि कुछ लोग भाई को बुरी तरह से घायल करके भाग गए हैं, जिसके बाद मैंने पुलिस को सूचना दी थी। प्रारंभिक पूछताछ में मनीषा ने भी पुलिस को यही बताया कि उसे नहीं मालूम कि वे लोग कौन थे और उनकी मेरे पति से क्या दुश्मनी थी। मनीषा ने हमलावरों को देखा भी नहीं था। वह तो बाद में उस समय मौके पर पहुंची थी जब मनोज ने चीखकर उसे पुकारा था। अगले दिन तत्कालीन एसपी भी मौके पर पहुंचे, जहां घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने टीआई के नेतृत्व में एक टीम गठित कर मनोज के हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दे दिए।
पास के गांव का रहने वाला मनोज कई साल पहले गांव छोड़कर हरदा में आकर बस गया था। यहां मनोज ने ं अपना छोटा सा घर भी बना लिया था। मनीषा को मनोज से कोई शिकायत नहीं थी। सिवाए इसके की कलेक्शन के काम में मनोज तो लगभग पूरा दिन ही बाहर रहता था। बच्चे भी स्कूल चले जाते थे। ऐसे में मनीषा दिन भर घर में अकेली खाली बैठी रहती थी। इस बात की शिकायत उसने कई बार मनोज से की तो उसने मनीषा के लिए घर में ही किराना नुमा छोटा सा जनरल स्टोर खोल दिया। सुबह के समय मनोज दुकान में समय देता और खाना बनाने के काम से फुरसत होकर मनीषा स्टोर संभालती एवं मनोज अपनी गाड़ी लेकर दिन भर के लिए काम पर निकल जाता।
कोई तीन किलोमीटर दूर बसे छोटी हरदा गांव में रहने वाले एक युवक से मनीषा की छोटी बहन ने प्रेम विवाह किया था। जिसका एक रिश्तेदार सूरज का हरदा आना-जाना था। एक दिन सूरज घूमते-घूमते ं मनीषा की दुकान पर पहुंचगया। उस समय मनोज अपने काम पर निकल चुका था और दोनों बेटियां स्कूल गई थीं। मनीषा उसको अच्छे से पहचानती थी। उसने सूरज को घर में बैठाकर हालचाल पूछे और चाय पानी पिलाकर विदा कर दिया, लेकिन वह इस बात पर ध्यान नहीं दे पाई कि जब तक सूरज वहां रहा उसकी नजर मनीषा की पतली कमर और भरे हुए बदन पर फिसलती रही थी। इसलिए सूरज उस रोज तो वहां से उठकर आ गया, लेकिन फिर अक्सर मनीषा की दुकान पर छोटा-मोटा सामान खरीदने के बहाने आने-जाने लगा। जिससे दोनों के बीच अपनापन बढ़ने लगा।
वास्तव में सूरज सामान लेने के बहाने मनीषा की सुंदरता के दर्शन करने उसकी दुकान पर जाता था। जब तक मनीषा सामने रहती वह उसे पी जाने वाली नजरों से घूरता रहता। जिससे कुछ ही दिनों में मनीषा, सूरज के बार-बार दुकान पर आने का कारण समझ गई। मनीषा गांव की रहने वाली थी। शहर आने के बाद वह खुद को काफी स्मार्ट समझने लगी थी। ऐसे में जब अपने से उम्र में काफी छोटे सूरज को अपनी तरफ ललचाई नजरों से घूरते देखती तो उसे खुद गर्व होने लगता। इसलिए धीरे-धीरे वह भी सूरज को अपनी सुंदरता की झलक दिखाने की कोशिश करने लगी। जिससे बात धीरे-धीरे आगे बढ़ते-बढ़ते इतने आगे बढ़ गई कि कमलेश के घर से निकलते ही सूरज शिक्षक कॉलोनी पहुंच जाता, जहां सूरज को देखते ही मनीषा उसे अंदर के कमरे में ले जाती और फिर कुछ ही देर में कमरा उन दोनों की सांसों की आवाज से गूंजने लगता। लेकिन ऐसे काम मोहल्ले वालों की नजर से ज्यादा देर तक छुपे नहीं रहते। जल्द ही मनीषा और सूरज के संबंधों की चर्चा होने लगी जो दो साल में मनोज के कान तक भी पहुंच गई।
मनोज अपनी पत्नी को बहुत चाहता था, इसलिए उसने उसे समझा बुझाकर रास्ते पर लाने की कोशिश की, लेकिन अब तक मनीषा पर सूरज का रंग पूरी तरह से चढ़ चुका था। इसलिए मनोज की बात वह एक कान से सुनकर दूसरे से बाहर निकाल देती। मनोज ने उस पर दबाव बनाया तो मनीषा के प्रेमी सूरज ने एक दिन सरेआम मनीषा के सामने ही मनोज को अपनी हद में रहने की हिदायत दे दी। मनोज सीधा-साधा आदमी था सो डरकर रहने लगा, जिससे मनीषा खुलकर अपने प्रेमी के संग अय्याशी करने लगी। इधर मनोज की दोनों बेटियां बड़ी हो रही थीं। वह जानता था कि मनीषा की इन हरकतों का असर बेटियों पर पड़ेगा, इसलिए उसने मनीषा को तलाक देने का मन बना लिया, लेकिन इसमें दिक्कत यह थी कि मनोज ने अपना मकान स्वयं के और पत्नी, दोनों के नाम पर बनवाया था। इसलिए तलाक के बाद मनीषा मकान पर अपना हक जता सकती थी। इसलिए सोच विचार के बाद मनोज ने तलाक की कार्रवाई शुरू करने से पहले मकान बेचने का फैसला कर चुपचाप ग्राहक खोजना शुरू कर दिए। इस बात की जानकारी मनीषा को लग गई तो प्रेमी की मदद से वह खुद मकान बेचने के लिए ग्राहक खोजने लगी। उसने चालीस लाख में सौदा कर चार लाख रुपया एडवांस भी ले लिया। इसकी जानकारी लगने पर मनोज ने उसे भला बुरा कहा तो मनीषा ने साफ कह दिया कि चुपचाप दस्तखत कर देना वर्ना तुम्हारे हाथ फिर कभी पेन पकड़ने लायक नहीं बचेंगे, लेकिन मनोज ने सोच लिया कि एक दिन तो मरना ही है फिर डरना कैसा। इससे वह भी विवाद करने पर उताऊ हो गया। यह देखकर मनीषा और सूरज समझ गए कि अब मनोज अगर जिंदा रहा तो उन लोगों को चैन से अय्याशी नहीं करने देगा। इसलिए दोनों ने मिलकर मनोज की हत्या की योजना बना ली।, जिसके चलते १२-१३ अक्टूबर की रात में मनोज के सो जाने के बाद मनीषा के इशारे पर सूरज उसके घर पहुंच गया और चाकू से उसका गलता रेतने के बाद मनीषा के संग अय्याशी कर वापस गांव भाग गया, जिसके बाद मनीषा ने अपने देवर को फोन करके पटना की जानकारी दी।

काल डिटेल से खुला था राज
मनीषा के शक के दायरे में आने के बाद पुलिस ने उसकी मोबाइल काल डिटेल निकाली जिसमें पता चला कि घटना दिनांक को मनीषा और सूरज के बीच कई बार बात हुई थी। इतना ही नहीं घटना वाली रात में भी देर रात को दोनों की बात हुई थी। पुलिस ने सूरज के मोबाइल की लोकेशन निकाली, जिसमें घटना के समय वह मनीषा के घर की पाई गई, जिससे पुलिस ने मनीषा से सघन पूछताछ की तो वह टूट गई और उसने पूरी कहानी सुना दी।
इस तरह फंसी कानून के जाल में
जांच के दौरान पुलिस का पहला शक मनीषा की छोटी बहन के पति पर था जो आरोपी सूरज का छोटा भाई है। जिस समय पुलिस उसके साथ सख्ती से पेश आ रही थी तब मनीषा भी थाने में मौजूद थी। इसलिए अपनी छोटी बहन के पति की तकलीफ उससे देखी नहीं गई। उसने टीआई से कहा कि इसे छोड़ दो, यह मेरे पति पर हमला करने वालों में नहीं था। इससे टीआई चौंक गए क्योंकि अब तक मनीषा पुलिस को यही बता रही थी कि उसने हमला करने वालों को नहीं देखा था। फिर अगर नहीं देखा तो यह कैसे देख लिया कि उसकी बहन का पति साथ नहीं था। इसलिए उन्होंने मनीषा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि अगर तेरी बहन का पति हमला करने वालों में शामिल नहीं था तो बताओ कौन-कौन थे। इस पर मनीषा कानून की गिरफ्त में आ गई। जिसकी जानकारी लगने पर प्रेमी सूरज को गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजक विनोद कुमार अहिरवार ने की।
