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पति की मौत के कुछ सेकंड बाद ही पत्नी ने भी तोड़ा दम, एक साथ उठी अर्थी, एक ही चिता पर अंतिम संस्कार
JAGRAN DESK
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बुजुर्ग दंपति, 94 वर्षीय देवव्रत प्रसाद और उनकी 89 वर्षीय पत्नी चंद्रलेखा श्रीवास्तव, ने एक साथ प्राण त्याग दिए। पति की मृत्यु के कुछ सेकंड बाद ही पत्नी का निधन हो गया। बेटों ने माता-पिता का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया। गांव के लोगों ने प्रेम की इस मिसाल को सराहा।
बिहार के मुजफ्फरपुर से एक अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बुजुर्ग दंपति ने जीवनभर साथ निभाने का वादा अपनी अंतिम सांस तक पूरा किया। पति की मृत्यु के कुछ सेकंड बाद ही पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। यह दंपति विवाह के समय लिए गए 'सात जन्मों तक साथ निभाने' के वचन को सच कर गया। बुजुर्ग दंपति का प्रेम अब गांव में चर्चा का विषय बन गया है।
साढ़े छह दशक तक साथ और फिर एक साथ विदाई
मिली जानकारी के मुताबिक, मुशहरी प्रखंड के गोवरसाही निवासी 94 वर्षीय सेवानिवृत्त एडीएम देवव्रत प्रसाद और उनकी 89 वर्षीय पत्नी चंद्रलेखा श्रीवास्तव ने लगभग 65 वर्षों तक एक साथ जीवन व्यतीत किया। जीवनभर एक-दूसरे के साथी रहे इस दंपति ने अंतिम यात्रा भी साथ ही तय की। दोनों ने चंद सेकंड के अंतराल में प्राण त्याग दिए, जिससे उनके प्रेम और अटूट बंधन की मिसाल बन गई।
एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
इस दंपति के निधन के बाद उनके बेटों ने माता-पिता के प्रेम को और मजबूत कर दिया। उन्होंने माता-पिता का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर मुजफ्फरपुर के मुक्तिधाम में किया। दोनों बेटों ने संयुक्त रूप से अपने माता-पिता को मुखाग्नि दी। इस अनोखे और मार्मिक पल को देखने के लिए गांव के सैकड़ों लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
सुबह जागे तो पिता नहीं रहे, मां ने भी त्याग दिए प्राण: बेटा
दंपति के छोटे बेटे विजय व्रत श्रीवास्तव ने बताया कि उनके बड़े भाई धर्मव्रत श्रीवास्तव जब सुबह पिता को जगाने गए, तो उन्होंने पाया कि उनका निधन हो चुका है। जैसे ही उन्होंने मां को यह दुखद समाचार देने के लिए देखा, तो उन्होंने भी अपनी आंखें मूंद लीं और प्राण त्याग दिए। परिवार अभी भी माता-पिता के अचानक चले जाने के सदमे में है।
गांव-शहर में चर्चा का विषय बनी प्रेम की यह अनोखी कहानी
पति-पत्नी की एक साथ मृत्यु और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार की यह घटना पूरे गांव और शहर में चर्चा का विषय बन गई। ग्रामीण संजय ओझा ने कहा कि ऐसा दृश्य अक्सर फिल्मों में देखने को मिलता है, लेकिन यहां यह वास्तविक जीवन में घटित हुआ है।
दंपति के पुत्रों का मानना है कि माता-पिता के प्रेम से उन्हें पूरे परिवार को प्रेरणा मिली है। पूरे परिवार में आज भी वही आपसी प्रेम और सम्मान कायम है, जो उनके माता-पिता ने उन्हें विरासत में दिया। यह अनोखी प्रेम कहानी एक मिसाल बन गई, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
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पति की मौत के कुछ सेकंड बाद ही पत्नी ने भी तोड़ा दम, एक साथ उठी अर्थी, एक ही चिता पर अंतिम संस्कार
JAGRAN DESK
बिहार के मुजफ्फरपुर से एक अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बुजुर्ग दंपति ने जीवनभर साथ निभाने का वादा अपनी अंतिम सांस तक पूरा किया। पति की मृत्यु के कुछ सेकंड बाद ही पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। यह दंपति विवाह के समय लिए गए 'सात जन्मों तक साथ निभाने' के वचन को सच कर गया। बुजुर्ग दंपति का प्रेम अब गांव में चर्चा का विषय बन गया है।
साढ़े छह दशक तक साथ और फिर एक साथ विदाई
मिली जानकारी के मुताबिक, मुशहरी प्रखंड के गोवरसाही निवासी 94 वर्षीय सेवानिवृत्त एडीएम देवव्रत प्रसाद और उनकी 89 वर्षीय पत्नी चंद्रलेखा श्रीवास्तव ने लगभग 65 वर्षों तक एक साथ जीवन व्यतीत किया। जीवनभर एक-दूसरे के साथी रहे इस दंपति ने अंतिम यात्रा भी साथ ही तय की। दोनों ने चंद सेकंड के अंतराल में प्राण त्याग दिए, जिससे उनके प्रेम और अटूट बंधन की मिसाल बन गई।
एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
इस दंपति के निधन के बाद उनके बेटों ने माता-पिता के प्रेम को और मजबूत कर दिया। उन्होंने माता-पिता का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर मुजफ्फरपुर के मुक्तिधाम में किया। दोनों बेटों ने संयुक्त रूप से अपने माता-पिता को मुखाग्नि दी। इस अनोखे और मार्मिक पल को देखने के लिए गांव के सैकड़ों लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
सुबह जागे तो पिता नहीं रहे, मां ने भी त्याग दिए प्राण: बेटा
दंपति के छोटे बेटे विजय व्रत श्रीवास्तव ने बताया कि उनके बड़े भाई धर्मव्रत श्रीवास्तव जब सुबह पिता को जगाने गए, तो उन्होंने पाया कि उनका निधन हो चुका है। जैसे ही उन्होंने मां को यह दुखद समाचार देने के लिए देखा, तो उन्होंने भी अपनी आंखें मूंद लीं और प्राण त्याग दिए। परिवार अभी भी माता-पिता के अचानक चले जाने के सदमे में है।
गांव-शहर में चर्चा का विषय बनी प्रेम की यह अनोखी कहानी
पति-पत्नी की एक साथ मृत्यु और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार की यह घटना पूरे गांव और शहर में चर्चा का विषय बन गई। ग्रामीण संजय ओझा ने कहा कि ऐसा दृश्य अक्सर फिल्मों में देखने को मिलता है, लेकिन यहां यह वास्तविक जीवन में घटित हुआ है।
दंपति के पुत्रों का मानना है कि माता-पिता के प्रेम से उन्हें पूरे परिवार को प्रेरणा मिली है। पूरे परिवार में आज भी वही आपसी प्रेम और सम्मान कायम है, जो उनके माता-पिता ने उन्हें विरासत में दिया। यह अनोखी प्रेम कहानी एक मिसाल बन गई, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
