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Ambedkar Jayanti 2026: डॉ. आंबेडकर ने 2 साल में पूरी की 8 साल की पढ़ाई, हैरान कर देगा उनका भाषा ज्ञान और डिग्रियां!
स्पेशल डेस्क
आंबेडकर जयंती 2026 पर जानें डॉ भीमराव आंबेडकर की शिक्षा, 32 डिग्रियां और प्रेरणादायक जीवन की खास बातें।
Ambedkar Jayanti 2026: हर साल 14 अप्रैल को देशभर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती बड़े सम्मान के साथ मनाई जाती है। वे केवल भारतीय संविधान के शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि शिक्षा, ज्ञान और सामाजिक बदलाव के प्रतीक भी थे। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प से सफलता हासिल की जा सकती है।
जन्म और शुरुआती जीवन
डॉ. आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के डॉ. आंबेडकर नगर में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने सामाजिक भेदभाव और आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया। इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। कम उम्र में ही उनकी शादी रमाबाई से हो गई, जिन्होंने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया।
शिक्षा का असाधारण सफर
डॉ. आंबेडकर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एल्फिंस्टन स्कूल से प्राप्त की और आगे चलकर बॉम्बे विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। उनका ज्ञान अर्जित करने का जुनून उन्हें विदेश तक ले गया। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से पढ़ाई की।
कहा जाता है कि उनके पास लगभग 32 डिग्रियां थीं और वे 9 भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने अर्थशास्त्र, राजनीति, कानून और समाजशास्त्र जैसे कई विषयों में गहरी समझ विकसित की। उनके पास 30 से 35 हजार किताबों का निजी संग्रह भी था, जो उनके ज्ञान प्रेम को दर्शाता है।
लंदन में रचा कीर्तिमान
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे आज भी मिसाल के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने लगभग 8 साल की पढ़ाई को केवल 2 साल 3 महीने में पूरा कर लिया। यह उनकी मेहनत और असाधारण क्षमता का प्रमाण है।
सामाजिक योगदान और विचार
डॉ. आंबेडकर ने केवल शिक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज में समानता और न्याय के लिए भी संघर्ष किया। उन्होंने भारतीय तिरंगे में अशोक चक्र शामिल करने का सुझाव दिया और समाज सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी प्रसिद्ध कृति "Waiting for a Visa" आज भी शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
व्यक्तिगत जीवन और अंतिम समय
रमाबाई के निधन के बाद उन्होंने सविता आंबेडकर से विवाह किया, जिन्होंने उनके जीवन के अंतिम वर्षों में उनका साथ दिया। 6 दिसंबर 1956 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
प्रेरणा का स्रोत
डॉ. आंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। उनका संघर्ष और उपलब्धियां आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती हैं।
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Ambedkar Jayanti 2026: डॉ. आंबेडकर ने 2 साल में पूरी की 8 साल की पढ़ाई, हैरान कर देगा उनका भाषा ज्ञान और डिग्रियां!
स्पेशल डेस्क
Ambedkar Jayanti 2026: हर साल 14 अप्रैल को देशभर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती बड़े सम्मान के साथ मनाई जाती है। वे केवल भारतीय संविधान के शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि शिक्षा, ज्ञान और सामाजिक बदलाव के प्रतीक भी थे। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प से सफलता हासिल की जा सकती है।
जन्म और शुरुआती जीवन
डॉ. आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के डॉ. आंबेडकर नगर में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने सामाजिक भेदभाव और आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया। इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। कम उम्र में ही उनकी शादी रमाबाई से हो गई, जिन्होंने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया।
शिक्षा का असाधारण सफर
डॉ. आंबेडकर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एल्फिंस्टन स्कूल से प्राप्त की और आगे चलकर बॉम्बे विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। उनका ज्ञान अर्जित करने का जुनून उन्हें विदेश तक ले गया। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से पढ़ाई की।
कहा जाता है कि उनके पास लगभग 32 डिग्रियां थीं और वे 9 भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने अर्थशास्त्र, राजनीति, कानून और समाजशास्त्र जैसे कई विषयों में गहरी समझ विकसित की। उनके पास 30 से 35 हजार किताबों का निजी संग्रह भी था, जो उनके ज्ञान प्रेम को दर्शाता है।
लंदन में रचा कीर्तिमान
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे आज भी मिसाल के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने लगभग 8 साल की पढ़ाई को केवल 2 साल 3 महीने में पूरा कर लिया। यह उनकी मेहनत और असाधारण क्षमता का प्रमाण है।
सामाजिक योगदान और विचार
डॉ. आंबेडकर ने केवल शिक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज में समानता और न्याय के लिए भी संघर्ष किया। उन्होंने भारतीय तिरंगे में अशोक चक्र शामिल करने का सुझाव दिया और समाज सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी प्रसिद्ध कृति "Waiting for a Visa" आज भी शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
व्यक्तिगत जीवन और अंतिम समय
रमाबाई के निधन के बाद उन्होंने सविता आंबेडकर से विवाह किया, जिन्होंने उनके जीवन के अंतिम वर्षों में उनका साथ दिया। 6 दिसंबर 1956 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
प्रेरणा का स्रोत
डॉ. आंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। उनका संघर्ष और उपलब्धियां आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती हैं।
