देसी बेरी की कोल्ड ड्रिंक, किसान ने बनाया दिमागी और शारीरिक शक्ति देने वाला कॉम्बो

Special News

टीकमगढ़ के किसान ने बनाया देसी बेर से सॉफ्ट ड्रिंक. बाजार में बिकने वाले हानिकारक सॉफ्ट ड्रिंक से स्वाद और स्वास्थ्य में कहीं बेहतर.

टीकमगढ़ के एक सामान्य किसान ने स्थानीय देसी बेर से ऐसा सॉफ्ट ड्रिंक बनाया है, जो दिमागी और शारीरिक शक्ति के लिए लाभदायक है. ये कोल्ड ड्रिंक बाजार में बिक रहे सॉफ्ट ड्रिंक्स से कई गुना बेहतर बताया जा रहा है. किसान का दावा है कि इसका स्वाद भी बाजार में मिनले वाले कई हानिकारक सॉफ्ट ड्रिंक्स से बेहतर है. इस देसी ड्रिंक को एग्री स्टार्टअप योजना के तहत बनाया गया है, जिसमें किसान को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी मदद की है.

ऐसे बनाई बेर से कोल्ड ड्रिंक

टीकमगढ़ जिले के मनमाड़ गांव के रहने वाले रमाकांत राणा के पास रोजगार का कोई स्थाई साधन नहीं था, उनके गांव में बेर के बहुत सारे पेड़ थे. रमाकांत ने तय किया कि वह बेर के माध्यम से ही रोजगार का कोई साधन बनाएंगे. इसके बाद रमाकांत ने बेर को सुखाकर बेचना शुरू किया लेकिन इसमें बहुत अधिक फायदा नहीं हुआ. फिर रमाकांत ने बेर में चुकंदर, काली मिर्च, काला नमक और दूसरे मसाले मिलाकर एक ड्रिंक बनाया. बेर को लेकर ऐसा प्रयोग अब तक किसी ने नहीं किया था.

Berry natural health drink
कृषि मेले में भी स्टॉल लगाकर बेर कोल्ड ड्रिंक बेच रहे रमाकांत 
 

बेर की कोल्ड ड्रिंक चखकर फैन हुए अधिकारी

रमाकांत ने इस ड्रिंक को बनाने के बाद जब टीकमगढ़ के कृषि अधिकारियों को चखाया तो एक परियोजना के तहत रमाकांत को तकनीकी मदद भी दिला दी गई. इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों ने बेर के इस नेचुरल ड्रिंक को छोटी बोतल में पैक करने और बेचने की सहायता मुहैया कराई. इसके साथ ही इसे बनाने के लिए 5 लाख का अनुदान भी रमाकांत राणा को दिया.

berry cold drink mp jabalpur
भारत में बेर की 300 से ज्यादा किस्म पाई जाती हैं 
 

बेर कोल्ड ड्रिंक की हुई लैब टेस्टिंग

रमाकांत राणा का दावा है कि कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से उन्होंने इस ड्रिंक का लैब में प्रशिक्षण भी करवाया है. रमाकांत ने बताया कि लैब से मिली रिपोर्ट में उन्हें पता लगा कि उनकी ड्रिंक में विटामिन सी, आयरन और दूसरे कई मिनरल हैं. दरअसल, बाजार में यदि आपको कोई खाद्य पदार्थ बेचना है तो भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच करानी होती है. इसकी रिपोर्ट भी उत्पादक को अपने पास रखनी पड़ती है और बैच की जानकारी उत्पाद के रेपर पर लिखनी होती है. जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने रमाकांत राणा की लैब रिपोर्ट तैयार करवाने में मदद की.

बेर कोल्ड ड्रिंक में कोई प्रिजर्वेटिव नहीं

रमाकांत राणा कहते हैं, '' जिस तरह इस ड्रिंक को बनाया जाता है, उसमें कई दिनों तक इसे खुले वातावरण मैं रखने में भी कोई खराबी नहीं आती. इसमें कोई प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल नहीं किया गया है. बाजार में जो सॉफ्ट ड्रिंक मिल रहे हैं उनके बारे में आए दिन लैब रिपोर्ट आती हैं और उनके नुकसान के बारे में बताया जाता है लेकिन उनका यह सॉफ्ट ड्रिंक सेहत के लिए फायदेमंद साबित हुआ है. इसे पूरे देश में सभी को उपलब्ध करवाना का प्रयास है.''

कृषि स्टार्टअप योजना का मिला फायदा

जवाहर राबी योजना जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा चलाई जा रही एक योजना है, इसमें कृषि आधारित स्टार्टअप को मदद दी जाती हैं. इसके तहत स्टार्टअप को अपने उद्योग को विकसित करने के लिए तकनीकी मदद दी जाती है. जब उत्पाद तैयार हो जाता है तो व्यापार के लिए आर्थिक मदद दी जाती है. इसके बाद उत्पाद को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध करवाने का काम भी योजना के माध्यम से करवाया जा रहा है. रमाकांत राणा ने भी इसका फायदा उठाया है. इसके तहत उन्हें टीकमगढ़ में एक दुकान भी मिल गई जिसमें वे अपना सामान बेच रहे हैं.

Tikamgarh farmer made berry drink
बेर कोल्ड ड्रिंक की लैब टेस्टिंग करा चुके हैं रमाकांत 
 

भारत में पाई जाने वाली बेर की प्रजातियां

भारत में बेर की 300 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं. कुछ बेर बहुत मीठे होते हैं, कुछ बहुत खट्टे. बेर का पेड़ (Ziziphus mauritiana) एक बहुत ही अनुकूलनीय पौधा है, जो लगभग किसी भी जलवायु में पनप सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बेर के पौधे ज्यादा पाए जाते हैं. भारत में बेर मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक और तमिलनाडु में ज्यादा पाए जाते हैं. बेर एक ऐसी प्रजाति है जो किसी भी किस्म की मिट्टी में पैदा हो सकती है. बेर के पेड़ के लिए बलुई दोमट (sandy loam) से लेकर चिकनी दोमट (clay loam) मिट्टी तक उपयुक्त होती है. बेर के पौधे को बहुत पानी की जरूरत भी नहीं होती.

बेर की उन्नत किस्म

रमाकांत राणा ने जिस बेर का इस्तेमाल किया है वह शुद्ध देसी बेर है. इसके पेड़ अपने आप उग जाते हैं. अभी तक इसकी कोई अलग से खेती नहीं करता. वहीं बेर की कुछ उन्नत किस्म भी हैं, जैसे - बनारसी बेर, एप्पल बेर आदि. इनकी अलग से खेती भी की जाती है और लोग अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं.

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03 Apr 2025 By दैनिक जागरण

देसी बेरी की कोल्ड ड्रिंक, किसान ने बनाया दिमागी और शारीरिक शक्ति देने वाला कॉम्बो

Special News

टीकमगढ़ के एक सामान्य किसान ने स्थानीय देसी बेर से ऐसा सॉफ्ट ड्रिंक बनाया है, जो दिमागी और शारीरिक शक्ति के लिए लाभदायक है. ये कोल्ड ड्रिंक बाजार में बिक रहे सॉफ्ट ड्रिंक्स से कई गुना बेहतर बताया जा रहा है. किसान का दावा है कि इसका स्वाद भी बाजार में मिनले वाले कई हानिकारक सॉफ्ट ड्रिंक्स से बेहतर है. इस देसी ड्रिंक को एग्री स्टार्टअप योजना के तहत बनाया गया है, जिसमें किसान को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी मदद की है.

ऐसे बनाई बेर से कोल्ड ड्रिंक

टीकमगढ़ जिले के मनमाड़ गांव के रहने वाले रमाकांत राणा के पास रोजगार का कोई स्थाई साधन नहीं था, उनके गांव में बेर के बहुत सारे पेड़ थे. रमाकांत ने तय किया कि वह बेर के माध्यम से ही रोजगार का कोई साधन बनाएंगे. इसके बाद रमाकांत ने बेर को सुखाकर बेचना शुरू किया लेकिन इसमें बहुत अधिक फायदा नहीं हुआ. फिर रमाकांत ने बेर में चुकंदर, काली मिर्च, काला नमक और दूसरे मसाले मिलाकर एक ड्रिंक बनाया. बेर को लेकर ऐसा प्रयोग अब तक किसी ने नहीं किया था.

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कृषि मेले में भी स्टॉल लगाकर बेर कोल्ड ड्रिंक बेच रहे रमाकांत 
 

बेर की कोल्ड ड्रिंक चखकर फैन हुए अधिकारी

रमाकांत ने इस ड्रिंक को बनाने के बाद जब टीकमगढ़ के कृषि अधिकारियों को चखाया तो एक परियोजना के तहत रमाकांत को तकनीकी मदद भी दिला दी गई. इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों ने बेर के इस नेचुरल ड्रिंक को छोटी बोतल में पैक करने और बेचने की सहायता मुहैया कराई. इसके साथ ही इसे बनाने के लिए 5 लाख का अनुदान भी रमाकांत राणा को दिया.

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भारत में बेर की 300 से ज्यादा किस्म पाई जाती हैं 
 

बेर कोल्ड ड्रिंक की हुई लैब टेस्टिंग

रमाकांत राणा का दावा है कि कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से उन्होंने इस ड्रिंक का लैब में प्रशिक्षण भी करवाया है. रमाकांत ने बताया कि लैब से मिली रिपोर्ट में उन्हें पता लगा कि उनकी ड्रिंक में विटामिन सी, आयरन और दूसरे कई मिनरल हैं. दरअसल, बाजार में यदि आपको कोई खाद्य पदार्थ बेचना है तो भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच करानी होती है. इसकी रिपोर्ट भी उत्पादक को अपने पास रखनी पड़ती है और बैच की जानकारी उत्पाद के रेपर पर लिखनी होती है. जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने रमाकांत राणा की लैब रिपोर्ट तैयार करवाने में मदद की.

बेर कोल्ड ड्रिंक में कोई प्रिजर्वेटिव नहीं

रमाकांत राणा कहते हैं, '' जिस तरह इस ड्रिंक को बनाया जाता है, उसमें कई दिनों तक इसे खुले वातावरण मैं रखने में भी कोई खराबी नहीं आती. इसमें कोई प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल नहीं किया गया है. बाजार में जो सॉफ्ट ड्रिंक मिल रहे हैं उनके बारे में आए दिन लैब रिपोर्ट आती हैं और उनके नुकसान के बारे में बताया जाता है लेकिन उनका यह सॉफ्ट ड्रिंक सेहत के लिए फायदेमंद साबित हुआ है. इसे पूरे देश में सभी को उपलब्ध करवाना का प्रयास है.''

कृषि स्टार्टअप योजना का मिला फायदा

जवाहर राबी योजना जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा चलाई जा रही एक योजना है, इसमें कृषि आधारित स्टार्टअप को मदद दी जाती हैं. इसके तहत स्टार्टअप को अपने उद्योग को विकसित करने के लिए तकनीकी मदद दी जाती है. जब उत्पाद तैयार हो जाता है तो व्यापार के लिए आर्थिक मदद दी जाती है. इसके बाद उत्पाद को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध करवाने का काम भी योजना के माध्यम से करवाया जा रहा है. रमाकांत राणा ने भी इसका फायदा उठाया है. इसके तहत उन्हें टीकमगढ़ में एक दुकान भी मिल गई जिसमें वे अपना सामान बेच रहे हैं.

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बेर कोल्ड ड्रिंक की लैब टेस्टिंग करा चुके हैं रमाकांत 
 

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भारत में बेर की 300 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं. कुछ बेर बहुत मीठे होते हैं, कुछ बहुत खट्टे. बेर का पेड़ (Ziziphus mauritiana) एक बहुत ही अनुकूलनीय पौधा है, जो लगभग किसी भी जलवायु में पनप सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बेर के पौधे ज्यादा पाए जाते हैं. भारत में बेर मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक और तमिलनाडु में ज्यादा पाए जाते हैं. बेर एक ऐसी प्रजाति है जो किसी भी किस्म की मिट्टी में पैदा हो सकती है. बेर के पेड़ के लिए बलुई दोमट (sandy loam) से लेकर चिकनी दोमट (clay loam) मिट्टी तक उपयुक्त होती है. बेर के पौधे को बहुत पानी की जरूरत भी नहीं होती.

बेर की उन्नत किस्म

रमाकांत राणा ने जिस बेर का इस्तेमाल किया है वह शुद्ध देसी बेर है. इसके पेड़ अपने आप उग जाते हैं. अभी तक इसकी कोई अलग से खेती नहीं करता. वहीं बेर की कुछ उन्नत किस्म भी हैं, जैसे - बनारसी बेर, एप्पल बेर आदि. इनकी अलग से खेती भी की जाती है और लोग अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं.

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