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राज्यसभा सांसदों की सैलरी कितनी है? जानिए पूरी जानकारी
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झारखंड और मिजोरम में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद एक बार फिर उच्च सदन यानी राज्यसभा चर्चा में है। झारखंड में हुए चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीत दर्ज की, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। दूसरी ओर, INDIA गठबंधन के तहत मैदान में उतरी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। मिजोरम में भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए, जहां जोरम पीपुल्स मूवमेंट ने पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया। चुनावी नतीजों के बीच लोगों के मन में एक सवाल भी उठ रहा है कि आखिर राज्यसभा सांसदों को कितनी सैलरी मिलती है और क्या उनकी कमाई लोकसभा सांसदों से अलग होती है?
भारत की संसदीय व्यवस्था में लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही संसद के महत्वपूर्ण सदन हैं। लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा सांसदों का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। हालांकि चुनाव की प्रक्रिया अलग होने के बावजूद वेतन और सुविधाओं के मामले में दोनों सदनों के सदस्यों के बीच कोई अंतर नहीं रखा गया है। संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम के तहत दोनों सदनों के सांसदों को समान वेतन और सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
मार्च 2025 में लागू संशोधित प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक सांसद को प्रति माह 1.24 लाख रुपये का मूल वेतन दिया जाता है। यह राशि चाहे सांसद लोकसभा का सदस्य हो या राज्यसभा का, दोनों के लिए समान है। इसके अलावा सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र और जनसंपर्क से जुड़े कार्यों के लिए अलग से भत्ते भी मिलते हैं। सांसदों को हर महीने 87 हजार रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता दिया जाता है ताकि वे जनता से जुड़े कार्यों और क्षेत्रीय गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।
इसके साथ ही कार्यालय संचालन और प्रशासनिक खर्चों के लिए 75 हजार रुपये प्रति माह कार्यालय व्यय भत्ता भी दिया जाता है। इस राशि का उपयोग स्टाफ के वेतन, कार्यालय संचालन, स्टेशनरी और अन्य प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। यदि मूल वेतन और इन दोनों प्रमुख भत्तों को जोड़ दिया जाए तो एक सांसद की मासिक आय करीब 2.86 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि यह केवल निश्चित भुगतान है। इसके अतिरिक्त सांसदों को कई अन्य सुविधाएं और भत्ते भी प्राप्त होते हैं।
संसदीय सत्र या संसदीय समितियों की बैठकों में भाग लेने पर सांसदों को दैनिक भत्ता भी मिलता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत सांसदों को प्रत्येक दिन की उपस्थिति के लिए 2,500 रुपये का दैनिक भत्ता दिया जाता है। संसद के कामकाज में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। संसद सत्र के दौरान यह राशि अलग से प्रदान की जाती है और इसे मासिक वेतन में शामिल नहीं किया जाता।
दिल्ली में रहने की सुविधा भी सांसदों को मिलने वाले प्रमुख लाभों में शामिल है। सांसदों को उनके कार्यकाल के दौरान नई दिल्ली में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है। पात्रता और उपलब्धता के आधार पर उन्हें बंगला या फ्लैट दिया जाता है। राजधानी में महंगे किराए और आवासीय खर्चों को देखते हुए यह सुविधा सांसदों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यात्रा सुविधाओं की बात करें तो सांसदों को हवाई और रेल यात्रा में भी विशेष लाभ मिलता है। उन्हें हर साल 34 मुफ्त घरेलू हवाई यात्राओं की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा भारतीय रेलवे में फर्स्ट एसी श्रेणी में असीमित यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। यही नहीं, सांसदों को विभिन्न आधिकारिक कार्यों के लिए यात्रा भत्ते भी दिए जाते हैं ताकि वे अपने क्षेत्र और राजधानी के बीच नियमित संपर्क बनाए रख सकें।
सांसदों को कई अन्य सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार उन्हें हर साल 50 हजार यूनिट तक मुफ्त बिजली और निर्धारित सीमा तक पानी की सुविधा दी जाती है। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत सांसद और उनके परिवार के सदस्य केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के दायरे में आते हैं, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसदों को दी जाने वाली ये सुविधाएं उनके सार्वजनिक दायित्वों और व्यापक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं। संसद सदस्य केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और विभिन्न विकास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। यही कारण है कि वेतन के साथ-साथ उन्हें कई प्रशासनिक और कार्यगत सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।
कुल मिलाकर यदि सवाल यह है कि राज्यसभा सांसदों को लोकसभा सांसदों से ज्यादा वेतन मिलता है या कम, तो जवाब साफ है। दोनों सदनों के सांसदों को समान वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं। संसद में उनकी भूमिका भले अलग हो, लेकिन आर्थिक लाभ और सरकारी सुविधाओं के मामले में दोनों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
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राज्यसभा सांसदों की सैलरी कितनी है? जानिए पूरी जानकारी
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झारखंड और मिजोरम में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद एक बार फिर उच्च सदन यानी राज्यसभा चर्चा में है। झारखंड में हुए चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीत दर्ज की, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। दूसरी ओर, INDIA गठबंधन के तहत मैदान में उतरी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। मिजोरम में भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए, जहां जोरम पीपुल्स मूवमेंट ने पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया। चुनावी नतीजों के बीच लोगों के मन में एक सवाल भी उठ रहा है कि आखिर राज्यसभा सांसदों को कितनी सैलरी मिलती है और क्या उनकी कमाई लोकसभा सांसदों से अलग होती है?
भारत की संसदीय व्यवस्था में लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही संसद के महत्वपूर्ण सदन हैं। लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा सांसदों का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। हालांकि चुनाव की प्रक्रिया अलग होने के बावजूद वेतन और सुविधाओं के मामले में दोनों सदनों के सदस्यों के बीच कोई अंतर नहीं रखा गया है। संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम के तहत दोनों सदनों के सांसदों को समान वेतन और सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
मार्च 2025 में लागू संशोधित प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक सांसद को प्रति माह 1.24 लाख रुपये का मूल वेतन दिया जाता है। यह राशि चाहे सांसद लोकसभा का सदस्य हो या राज्यसभा का, दोनों के लिए समान है। इसके अलावा सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र और जनसंपर्क से जुड़े कार्यों के लिए अलग से भत्ते भी मिलते हैं। सांसदों को हर महीने 87 हजार रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता दिया जाता है ताकि वे जनता से जुड़े कार्यों और क्षेत्रीय गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।
इसके साथ ही कार्यालय संचालन और प्रशासनिक खर्चों के लिए 75 हजार रुपये प्रति माह कार्यालय व्यय भत्ता भी दिया जाता है। इस राशि का उपयोग स्टाफ के वेतन, कार्यालय संचालन, स्टेशनरी और अन्य प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। यदि मूल वेतन और इन दोनों प्रमुख भत्तों को जोड़ दिया जाए तो एक सांसद की मासिक आय करीब 2.86 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि यह केवल निश्चित भुगतान है। इसके अतिरिक्त सांसदों को कई अन्य सुविधाएं और भत्ते भी प्राप्त होते हैं।
संसदीय सत्र या संसदीय समितियों की बैठकों में भाग लेने पर सांसदों को दैनिक भत्ता भी मिलता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत सांसदों को प्रत्येक दिन की उपस्थिति के लिए 2,500 रुपये का दैनिक भत्ता दिया जाता है। संसद के कामकाज में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। संसद सत्र के दौरान यह राशि अलग से प्रदान की जाती है और इसे मासिक वेतन में शामिल नहीं किया जाता।
दिल्ली में रहने की सुविधा भी सांसदों को मिलने वाले प्रमुख लाभों में शामिल है। सांसदों को उनके कार्यकाल के दौरान नई दिल्ली में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है। पात्रता और उपलब्धता के आधार पर उन्हें बंगला या फ्लैट दिया जाता है। राजधानी में महंगे किराए और आवासीय खर्चों को देखते हुए यह सुविधा सांसदों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यात्रा सुविधाओं की बात करें तो सांसदों को हवाई और रेल यात्रा में भी विशेष लाभ मिलता है। उन्हें हर साल 34 मुफ्त घरेलू हवाई यात्राओं की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा भारतीय रेलवे में फर्स्ट एसी श्रेणी में असीमित यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। यही नहीं, सांसदों को विभिन्न आधिकारिक कार्यों के लिए यात्रा भत्ते भी दिए जाते हैं ताकि वे अपने क्षेत्र और राजधानी के बीच नियमित संपर्क बनाए रख सकें।
सांसदों को कई अन्य सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार उन्हें हर साल 50 हजार यूनिट तक मुफ्त बिजली और निर्धारित सीमा तक पानी की सुविधा दी जाती है। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत सांसद और उनके परिवार के सदस्य केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के दायरे में आते हैं, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसदों को दी जाने वाली ये सुविधाएं उनके सार्वजनिक दायित्वों और व्यापक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं। संसद सदस्य केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और विभिन्न विकास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। यही कारण है कि वेतन के साथ-साथ उन्हें कई प्रशासनिक और कार्यगत सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।
कुल मिलाकर यदि सवाल यह है कि राज्यसभा सांसदों को लोकसभा सांसदों से ज्यादा वेतन मिलता है या कम, तो जवाब साफ है। दोनों सदनों के सांसदों को समान वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं। संसद में उनकी भूमिका भले अलग हो, लेकिन आर्थिक लाभ और सरकारी सुविधाओं के मामले में दोनों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
