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पन्ना के आदिवासी बन रहे लखपति, मशरूम की खेती ने दिया नवजीवन
Special News
पत्थर की खदानों में काम करते-करते टीबी और सिलिकोसिस के शिकार हुए मजदूरों के परिवार का मशरूम की खेती बदल रही है जीवन.
जिले में पृथ्वी ट्रस्ट ने पत्थर की खादानों में काम करने वाले सिलिकोसिस और टीबी के मरीजों के लिए एक अनोखी पहल की है. पृथ्वी ट्रस्ट द्वारा ऐसे मजदूरों की पत्नी को मशरूम की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है. यह काम उनकी आजीविका सुधारने और पोषण आहार में भारी मात्रा में पोषक तत्व शामिल करने के लिए किया जा रहा है.
मशरूम की खेती में हो रहा बंपर मुनाफा
दरअसल, पत्थर खदानों में काम करने के कारण सिलिकोसिस और टीबी के शिकार हुए मजदूरों की पत्नी को पृथ्वी ट्रस्ट जागरूक कर रही है. इस ट्रस्ट को महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है. इसमें पीड़ित महिलाओं को रोजगार देने और मशरूम की खेती का सुझाव दिया जा रहा है. अब धीरे-धीरे महिलाएं जागरूक हो रही हैं और मशरूम की खेती की ओर अग्रसर हो रही हैं. इसके लिए ट्रस्ट ने ग्राम गांधी में मशरूम सेट बनाया है. जहां पर महिलाएं खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं.
खाने में बढ़ रहा पोषण आहार
पृथ्वी ट्रस्ट की संचालिका समीना युसूफ बेग ने कहा, "जिले में सिलिकोसिस और टीबी के मरीजों को चिन्हित कर उनके इलाज की व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा कराई जाती है. हमारी टीम के द्वारा ग्राम गांधी, माझा, रानीपुर और सुनहरा गांव में मशरूम की खेती के लिए नया आईडिया दिया गया है. सिलिकोसिस और टीबी जैसी बीमारियों से पीड़ित की पत्नियों को खेती करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. वे इसको उगाकर अच्छी कमाई कर रही हैं, साथ ही लोग अपने खाने में पोषण आहार भी सम्मिलित कर रहे हैं."
समीना युसूफ बेग ने आगे कहा, "पृथ्वी ट्रस्ट खुद के द्वारा चलाई जा रही है. इसमें कोई भी सरकारी मदद नहीं मिली है. आदिवासियों ने घर पर लगभग 200 बैगों का सेट बनाया, जिसमें उन्होंने करीब 95 किलो मशरूम उगाया है. उन्होंने कुछ को अपने पोषण आहार में भी सम्मिलित किया है. वहीं थोड़ा आपस में बांटा भी है और साथ ही बाजार में बेचने से अच्छी आमदनी हो गई है."
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जिले में पृथ्वी ट्रस्ट ने पत्थर की खादानों में काम करने वाले सिलिकोसिस और टीबी के मरीजों के लिए एक अनोखी पहल की है. पृथ्वी ट्रस्ट द्वारा ऐसे मजदूरों की पत्नी को मशरूम की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है. यह काम उनकी आजीविका सुधारने और पोषण आहार में भारी मात्रा में पोषक तत्व शामिल करने के लिए किया जा रहा है.
मशरूम की खेती में हो रहा बंपर मुनाफा
दरअसल, पत्थर खदानों में काम करने के कारण सिलिकोसिस और टीबी के शिकार हुए मजदूरों की पत्नी को पृथ्वी ट्रस्ट जागरूक कर रही है. इस ट्रस्ट को महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है. इसमें पीड़ित महिलाओं को रोजगार देने और मशरूम की खेती का सुझाव दिया जा रहा है. अब धीरे-धीरे महिलाएं जागरूक हो रही हैं और मशरूम की खेती की ओर अग्रसर हो रही हैं. इसके लिए ट्रस्ट ने ग्राम गांधी में मशरूम सेट बनाया है. जहां पर महिलाएं खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं.
खाने में बढ़ रहा पोषण आहार
पृथ्वी ट्रस्ट की संचालिका समीना युसूफ बेग ने कहा, "जिले में सिलिकोसिस और टीबी के मरीजों को चिन्हित कर उनके इलाज की व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा कराई जाती है. हमारी टीम के द्वारा ग्राम गांधी, माझा, रानीपुर और सुनहरा गांव में मशरूम की खेती के लिए नया आईडिया दिया गया है. सिलिकोसिस और टीबी जैसी बीमारियों से पीड़ित की पत्नियों को खेती करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. वे इसको उगाकर अच्छी कमाई कर रही हैं, साथ ही लोग अपने खाने में पोषण आहार भी सम्मिलित कर रहे हैं."
समीना युसूफ बेग ने आगे कहा, "पृथ्वी ट्रस्ट खुद के द्वारा चलाई जा रही है. इसमें कोई भी सरकारी मदद नहीं मिली है. आदिवासियों ने घर पर लगभग 200 बैगों का सेट बनाया, जिसमें उन्होंने करीब 95 किलो मशरूम उगाया है. उन्होंने कुछ को अपने पोषण आहार में भी सम्मिलित किया है. वहीं थोड़ा आपस में बांटा भी है और साथ ही बाजार में बेचने से अच्छी आमदनी हो गई है."
