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पिच पर दौड़ने की गलती से India A पर 10 रन की पेनल्टी, मैच में बड़ा मोड़
स्पोर्ट्स डेस्क
विपराज निगम की दो बार हुई चूक पड़ी भारी, श्रीलंका ए को बिना खेले मिले 10 रन
भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेले गए त्रिकोणीय सीरीज के मुकाबले में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने मैच का रुख बदल दिया और मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मुकाबले के दौरान भारत ए को 10 रन की पेनल्टी का सामना करना पड़ा। यह दंड बल्लेबाज विपराज निगम द्वारा पिच के संरक्षित हिस्से पर दो बार दौड़ने के कारण लगाया गया। क्रिकेट में इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को नहीं मिलतीं, इसलिए यह मामला पूरे मैच के दौरान चर्चा का विषय बना रहा। यह घटना भारत ए की पारी के दौरान हुई। टीम मुश्किल स्थिति में थी और विकेट लगातार गिर रहे थे। ऐसे समय में विपराज निगम और सूर्यांश शेडगे ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी बन रही थी और भारत ए एक सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था। लेकिन इसी दौरान 34वें और 37वें ओवर में दो ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके कारण टीम को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
मैदान पर मौजूद अंपायर प्रगीथ रामबुकवेला और शांथा फोन्सेका ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए दो बार पांच-पांच रन की पेनल्टी लगाई। पहली घटना तब हुई जब विपराज निगम ने रन लेने के दौरान पिच के संरक्षित क्षेत्र को पार किया। अंपायरों ने उस समय चेतावनी भी दी थी। हालांकि कुछ ओवर बाद फिर से ऐसी ही स्थिति बनी। इस बार निगम ने गेंद को शॉर्ट थर्ड मैन की दिशा में खेला और रन लेने के लिए दौड़े। लेकिन नॉन-स्ट्राइकर एंड पर मौजूद सूर्यांश शेडगे ने उन्हें वापस भेज दिया। क्रीज में लौटने की जल्दबाजी में निगम एक बार फिर पिच के बीच वाले संरक्षित हिस्से से दौड़ते हुए निकल गए। चूंकि टीम को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी, इसलिए अंपायरों ने दूसरी बार भी पांच रन की पेनल्टी दे दी। इस तरह कुल 10 रन श्रीलंका ए के खाते में जोड़ दिए गए। इसका मतलब यह हुआ कि जब श्रीलंका ए लक्ष्य का पीछा करने मैदान पर उतरी तो उसके स्कोरबोर्ड में बिना कोई गेंद खेले ही 10 रन दर्ज थे। क्रिकेट के नियमों के अनुसार पिच के संरक्षित हिस्से को नुकसान पहुंचाने या उस पर अनावश्यक रूप से दौड़ने की अनुमति नहीं होती। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि विकेट की सतह सुरक्षित रहे और मैच के दौरान उसकी गुणवत्ता प्रभावित न हो।
इस विवाद के बीच विपराज निगम ने बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान भी दिया। जब भारत ए का स्कोर 143 रन पर सात विकेट हो गया था, तब टीम दबाव में थी। ऐसे समय में निगम और सूर्यांश शेडगे ने शानदार संयम दिखाया। दोनों बल्लेबाजों ने आठवें विकेट के लिए 104 रन की साझेदारी की और टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला। विपराज निगम ने 49 गेंदों पर 51 रन बनाए, जबकि सूर्यांश शेडगे ने 66 गेंदों में 72 रन की उपयोगी पारी खेली। उनकी इस साझेदारी की बदौलत भारत ए की टीम 265 रन के स्कोर तक पहुंचने में सफल रही। मुकाबले में दिलचस्प बात यह भी रही कि श्रीलंका ए को भी पहले पेनल्टी का सामना करना पड़ा था। भारत ए की पारी के 16वें ओवर में विकेटकीपर निरोशन डिकवेला एक वाइड गेंद को सही तरीके से नहीं रोक सके। गेंद उनके पास से निकलकर पीछे रखे हेलमेट से जा टकराई। क्रिकेट के नियमों के मुताबिक यदि गेंद मैदान पर रखे हेलमेट से टकराती है तो बल्लेबाजी टीम को पांच अतिरिक्त रन दिए जाते हैं। इसी नियम के तहत भारत ए को पांच बोनस रन मिले थे।
मैच में दोनों टीमों को अलग-अलग परिस्थितियों में पेनल्टी रन मिलने और गंवाने का मामला देखने को मिला, जिसने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नियम खिलाड़ियों को खेल के तकनीकी पहलुओं के प्रति अधिक सतर्क रहने की याद दिलाते हैं। खासकर युवा खिलाड़ियों के लिए यह सीख है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में केवल बल्लेबाजी और गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि नियमों की पूरी समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। भारत ए के लिए यह मुकाबला कई मायनों में यादगार रहा। एक तरफ टीम ने मुश्किल हालात से उबरते हुए प्रतिस्पर्धी स्कोर बनाया, वहीं दूसरी तरफ पिच से जुड़े नियमों के उल्लंघन ने उन्हें अतिरिक्त दबाव में डाल दिया। अब इस घटना की चर्चा क्रिकेट जगत में हो रही है और इसे युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में देखा जा रहा है।
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पिच पर दौड़ने की गलती से India A पर 10 रन की पेनल्टी, मैच में बड़ा मोड़
स्पोर्ट्स डेस्क
भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेले गए त्रिकोणीय सीरीज के मुकाबले में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने मैच का रुख बदल दिया और मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मुकाबले के दौरान भारत ए को 10 रन की पेनल्टी का सामना करना पड़ा। यह दंड बल्लेबाज विपराज निगम द्वारा पिच के संरक्षित हिस्से पर दो बार दौड़ने के कारण लगाया गया। क्रिकेट में इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को नहीं मिलतीं, इसलिए यह मामला पूरे मैच के दौरान चर्चा का विषय बना रहा। यह घटना भारत ए की पारी के दौरान हुई। टीम मुश्किल स्थिति में थी और विकेट लगातार गिर रहे थे। ऐसे समय में विपराज निगम और सूर्यांश शेडगे ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी बन रही थी और भारत ए एक सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था। लेकिन इसी दौरान 34वें और 37वें ओवर में दो ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके कारण टीम को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
मैदान पर मौजूद अंपायर प्रगीथ रामबुकवेला और शांथा फोन्सेका ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए दो बार पांच-पांच रन की पेनल्टी लगाई। पहली घटना तब हुई जब विपराज निगम ने रन लेने के दौरान पिच के संरक्षित क्षेत्र को पार किया। अंपायरों ने उस समय चेतावनी भी दी थी। हालांकि कुछ ओवर बाद फिर से ऐसी ही स्थिति बनी। इस बार निगम ने गेंद को शॉर्ट थर्ड मैन की दिशा में खेला और रन लेने के लिए दौड़े। लेकिन नॉन-स्ट्राइकर एंड पर मौजूद सूर्यांश शेडगे ने उन्हें वापस भेज दिया। क्रीज में लौटने की जल्दबाजी में निगम एक बार फिर पिच के बीच वाले संरक्षित हिस्से से दौड़ते हुए निकल गए। चूंकि टीम को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी, इसलिए अंपायरों ने दूसरी बार भी पांच रन की पेनल्टी दे दी। इस तरह कुल 10 रन श्रीलंका ए के खाते में जोड़ दिए गए। इसका मतलब यह हुआ कि जब श्रीलंका ए लक्ष्य का पीछा करने मैदान पर उतरी तो उसके स्कोरबोर्ड में बिना कोई गेंद खेले ही 10 रन दर्ज थे। क्रिकेट के नियमों के अनुसार पिच के संरक्षित हिस्से को नुकसान पहुंचाने या उस पर अनावश्यक रूप से दौड़ने की अनुमति नहीं होती। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि विकेट की सतह सुरक्षित रहे और मैच के दौरान उसकी गुणवत्ता प्रभावित न हो।
इस विवाद के बीच विपराज निगम ने बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान भी दिया। जब भारत ए का स्कोर 143 रन पर सात विकेट हो गया था, तब टीम दबाव में थी। ऐसे समय में निगम और सूर्यांश शेडगे ने शानदार संयम दिखाया। दोनों बल्लेबाजों ने आठवें विकेट के लिए 104 रन की साझेदारी की और टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला। विपराज निगम ने 49 गेंदों पर 51 रन बनाए, जबकि सूर्यांश शेडगे ने 66 गेंदों में 72 रन की उपयोगी पारी खेली। उनकी इस साझेदारी की बदौलत भारत ए की टीम 265 रन के स्कोर तक पहुंचने में सफल रही। मुकाबले में दिलचस्प बात यह भी रही कि श्रीलंका ए को भी पहले पेनल्टी का सामना करना पड़ा था। भारत ए की पारी के 16वें ओवर में विकेटकीपर निरोशन डिकवेला एक वाइड गेंद को सही तरीके से नहीं रोक सके। गेंद उनके पास से निकलकर पीछे रखे हेलमेट से जा टकराई। क्रिकेट के नियमों के मुताबिक यदि गेंद मैदान पर रखे हेलमेट से टकराती है तो बल्लेबाजी टीम को पांच अतिरिक्त रन दिए जाते हैं। इसी नियम के तहत भारत ए को पांच बोनस रन मिले थे।
मैच में दोनों टीमों को अलग-अलग परिस्थितियों में पेनल्टी रन मिलने और गंवाने का मामला देखने को मिला, जिसने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नियम खिलाड़ियों को खेल के तकनीकी पहलुओं के प्रति अधिक सतर्क रहने की याद दिलाते हैं। खासकर युवा खिलाड़ियों के लिए यह सीख है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में केवल बल्लेबाजी और गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि नियमों की पूरी समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। भारत ए के लिए यह मुकाबला कई मायनों में यादगार रहा। एक तरफ टीम ने मुश्किल हालात से उबरते हुए प्रतिस्पर्धी स्कोर बनाया, वहीं दूसरी तरफ पिच से जुड़े नियमों के उल्लंघन ने उन्हें अतिरिक्त दबाव में डाल दिया। अब इस घटना की चर्चा क्रिकेट जगत में हो रही है और इसे युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में देखा जा रहा है।
