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झज्जर की बेटी तपस्या बनीं जूनियर वर्ल्ड चैंपियन: मां ने रोका, पिता ने सपना देखा; अब तिरंगे से गूंजी बुल्गारिया
Sports
हरियाणा के झज्जर की 18 वर्षीय रेसलर तपस्या गहलावत ने बुल्गारिया में आयोजित जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में 57 किलो वर्ग का गोल्ड मेडल जीतकर भारत का मान बढ़ाया।
तपस्या 24 अगस्त (रविवार) को स्वदेश लौट रही हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
पिता का सपना, मां की चिंता
तपस्या के पिता परमेश गहलावत खुद नेशनल लेवल के पहलवान रहे हैं। पेट की समस्या के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी, लेकिन बेटी के जरिए ओलंपिक तक पहुंचने का सपना देखा। वहीं मां डॉ. नवीन गहलावत, जो सोनीपत के जीवीएम गर्ल्स कॉलेज में संस्कृत की प्रोफेसर हैं, हमेशा चाहती थीं कि बेटी पढ़ाई में करियर बनाए। अखाड़े में जाने को लेकर घर में कई बार नोकझोंक तक हुई।
जापान की 40 मैच अजेय खिलाड़ी को हराया
तपस्या ने सेमीफाइनल में जापान की सोवाका उचिदा को हराकर बड़ा उलटफेर किया। उचिदा लगातार 40 मुकाबले जीत चुकी थीं। फाइनल में तपस्या ने नॉर्वे की फेलिसिटास डोमजेवा को मात देकर गोल्ड अपने नाम किया।
दादा की मौत की खबर छिपाई गई
14 अगस्त को दादा सूबेदार राममेहर सिंह का निधन हुआ, लेकिन परिवार ने यह खबर तपस्या से छिपा ली ताकि उसका ध्यान न भटके। 20 अगस्त को उसने गोल्ड जीतकर पूरे गांव का मान बढ़ा दिया।
5 साल की उम्र से अखाड़े में
तपस्या का जन्म 19 नवंबर 2006 को हुआ। बचपन में मोटापा कम करने के लिए जब उसे ग्राउंड भेजा गया तो कुश्ती से लगाव हो गया। 10 साल की उम्र में उसने पहला नेशनल मेडल जीता और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
परिवार की खेल विरासत
तपस्या के परदादा हजारी लाल पहलवान रहे, चाचा गुलाब गहलावत एथलेटिक्स में नेशनल सिल्वर मेडलिस्ट हैं। छोटा भाई दक्ष गहलावत भी कुश्ती में स्कूल स्तर पर मेडल जीत चुका है।
अब तक कई बड़े गोल्ड
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नोएडा जूनियर नेशनल – गोल्ड
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बेंगलुरु सीनियर नेशनल – गोल्ड
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हरिद्वार नेशनल गेम्स – गोल्ड
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जूनियर एशियन चैंपियनशिप (किर्गिस्तान) – गोल्ड
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अब जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप (बुल्गारिया) – गोल्ड
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झज्जर की बेटी तपस्या बनीं जूनियर वर्ल्ड चैंपियन: मां ने रोका, पिता ने सपना देखा; अब तिरंगे से गूंजी बुल्गारिया
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तपस्या 24 अगस्त (रविवार) को स्वदेश लौट रही हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
पिता का सपना, मां की चिंता
तपस्या के पिता परमेश गहलावत खुद नेशनल लेवल के पहलवान रहे हैं। पेट की समस्या के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी, लेकिन बेटी के जरिए ओलंपिक तक पहुंचने का सपना देखा। वहीं मां डॉ. नवीन गहलावत, जो सोनीपत के जीवीएम गर्ल्स कॉलेज में संस्कृत की प्रोफेसर हैं, हमेशा चाहती थीं कि बेटी पढ़ाई में करियर बनाए। अखाड़े में जाने को लेकर घर में कई बार नोकझोंक तक हुई।
जापान की 40 मैच अजेय खिलाड़ी को हराया
तपस्या ने सेमीफाइनल में जापान की सोवाका उचिदा को हराकर बड़ा उलटफेर किया। उचिदा लगातार 40 मुकाबले जीत चुकी थीं। फाइनल में तपस्या ने नॉर्वे की फेलिसिटास डोमजेवा को मात देकर गोल्ड अपने नाम किया।
दादा की मौत की खबर छिपाई गई
14 अगस्त को दादा सूबेदार राममेहर सिंह का निधन हुआ, लेकिन परिवार ने यह खबर तपस्या से छिपा ली ताकि उसका ध्यान न भटके। 20 अगस्त को उसने गोल्ड जीतकर पूरे गांव का मान बढ़ा दिया।
5 साल की उम्र से अखाड़े में
तपस्या का जन्म 19 नवंबर 2006 को हुआ। बचपन में मोटापा कम करने के लिए जब उसे ग्राउंड भेजा गया तो कुश्ती से लगाव हो गया। 10 साल की उम्र में उसने पहला नेशनल मेडल जीता और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
परिवार की खेल विरासत
तपस्या के परदादा हजारी लाल पहलवान रहे, चाचा गुलाब गहलावत एथलेटिक्स में नेशनल सिल्वर मेडलिस्ट हैं। छोटा भाई दक्ष गहलावत भी कुश्ती में स्कूल स्तर पर मेडल जीत चुका है।
अब तक कई बड़े गोल्ड
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नोएडा जूनियर नेशनल – गोल्ड
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बेंगलुरु सीनियर नेशनल – गोल्ड
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हरिद्वार नेशनल गेम्स – गोल्ड
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जूनियर एशियन चैंपियनशिप (किर्गिस्तान) – गोल्ड
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अब जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप (बुल्गारिया) – गोल्ड
