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झज्जर के ओलिंपियन अमन सहरावत ने सीनियर नेशनल में जीता स्वर्ण पदक
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दाहिनी आंख में चोट के बावजूद दमदार प्रदर्शन; संघर्ष और विश्वास की वापसी का प्रतीक बने पहलवान
झज्जर के युवा ओलिंपियन और पेरिस 2024 कांस्य पदक विजेता अमन सहरावत ने अहमदाबाद में आयोजित सीनियर नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में पुरुष फ्रीस्टाइल 61 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर में महत्वपूर्ण वापसी की। दाहिनी आंख में चोट लगने और पिछले एक साल की असफलताओं के बावजूद उन्होंने फाइनल में निखिल को 10-0 से हराकर खिताब अपने नाम किया।
अमन के इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास किसी भी कठिनाई को मात दे सकता है। उन्होंने पहले राउंड में अधित नारायण को 12-1, क्वार्टरफाइनल में ललित को 10-0, और सेमीफाइनल में अनुज कुमार को 13-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।
इस वर्ष क्रोएशिया में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान वेट-इन में ओवरवेट पाए जाने पर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया था और भारतीय कुश्ती महासंघ ने उन्हें एक साल के लिए निलंबित किया था। निलंबन हटने के बाद यह स्वर्ण पदक उनके लिए संघर्ष और विश्वास की वापसी का प्रतीक बन गया।
अमन ने इंस्टाग्राम पर पांच तस्वीरों के साथ भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने सपोर्ट स्टाफ, प्रशिक्षकों और साथियों का आभार जताया। उन्होंने लिखा, “यह जीत मेरे लिए गर्व का क्षण है। पिछले एक साल की गिरावट और आत्म-संदेह के बाद यह केवल एक जीत नहीं, बल्कि कभी हार न मानने वाले विश्वास की वापसी है। जब हालात मेरे खिलाफ थे, तब भी कुछ लोगों का भरोसा मेरे साथ रहा।’’
अमन ने इस प्रतियोगिता में वजन घटाने के दबाव से बचने के लिए 61 किलोग्राम वर्ग में उतरने का फैसला किया और इसी निर्णय के बावजूद उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि घरेलू सपोर्ट और सकारात्मक लोगों का साथ उनके लिए अतिरिक्त ताकत साबित हुआ।
इस स्वर्ण पदक ने अमन सहरावत को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर फिर से मजबूत किया है, बल्कि देश के युवा पहलवानों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनाया है। सीनियर नेशनल कुश्ती उनके करियर का पहला बड़ा राष्ट्रीय मंच है, जो पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद उनके लिए सफलता की नई शुरुआत है।
इंडियन वूमन रेसलर अकाउंट ने भी अमन की जीत की सराहना की और लिखा, “जब मेहनत सोना बन जाए और खामोशी सम्मान में बदल जाए, तब चैंपियन की कहानी खुद बोलती है।”
अगले वर्ष 2026 में अमन का ध्यान अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने पर रहेगा। उनके संघर्ष और जीत की कहानी इस बात का संदेश देती है कि कठिन समय में धैर्य, हौसला और भरोसा किसी भी खिलाड़ी को ऊंचाई तक ले जा सकता है।
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अमन के इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास किसी भी कठिनाई को मात दे सकता है। उन्होंने पहले राउंड में अधित नारायण को 12-1, क्वार्टरफाइनल में ललित को 10-0, और सेमीफाइनल में अनुज कुमार को 13-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।
इस वर्ष क्रोएशिया में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान वेट-इन में ओवरवेट पाए जाने पर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया था और भारतीय कुश्ती महासंघ ने उन्हें एक साल के लिए निलंबित किया था। निलंबन हटने के बाद यह स्वर्ण पदक उनके लिए संघर्ष और विश्वास की वापसी का प्रतीक बन गया।
अमन ने इंस्टाग्राम पर पांच तस्वीरों के साथ भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने सपोर्ट स्टाफ, प्रशिक्षकों और साथियों का आभार जताया। उन्होंने लिखा, “यह जीत मेरे लिए गर्व का क्षण है। पिछले एक साल की गिरावट और आत्म-संदेह के बाद यह केवल एक जीत नहीं, बल्कि कभी हार न मानने वाले विश्वास की वापसी है। जब हालात मेरे खिलाफ थे, तब भी कुछ लोगों का भरोसा मेरे साथ रहा।’’
अमन ने इस प्रतियोगिता में वजन घटाने के दबाव से बचने के लिए 61 किलोग्राम वर्ग में उतरने का फैसला किया और इसी निर्णय के बावजूद उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि घरेलू सपोर्ट और सकारात्मक लोगों का साथ उनके लिए अतिरिक्त ताकत साबित हुआ।
इस स्वर्ण पदक ने अमन सहरावत को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर फिर से मजबूत किया है, बल्कि देश के युवा पहलवानों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनाया है। सीनियर नेशनल कुश्ती उनके करियर का पहला बड़ा राष्ट्रीय मंच है, जो पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद उनके लिए सफलता की नई शुरुआत है।
इंडियन वूमन रेसलर अकाउंट ने भी अमन की जीत की सराहना की और लिखा, “जब मेहनत सोना बन जाए और खामोशी सम्मान में बदल जाए, तब चैंपियन की कहानी खुद बोलती है।”
अगले वर्ष 2026 में अमन का ध्यान अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने पर रहेगा। उनके संघर्ष और जीत की कहानी इस बात का संदेश देती है कि कठिन समय में धैर्य, हौसला और भरोसा किसी भी खिलाड़ी को ऊंचाई तक ले जा सकता है।
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