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अब क्रिकेटर नहीं छुपा सकेंगे असली उम्र, BCCI लाया सख्त एज-वेरिफिकेशन सिस्टम
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उम्र में हेराफेरी यानी एज फ्रॉड पर नकेल कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब क्रिकेटरों की उम्र की जांच सिर्फ कागज़ी नहीं होगी, बल्कि मेडिकल स्तर तक जाएगी।
बोर्ड ने खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र की पुष्टि के लिए एक नई टू-टियर एज वेरिफिकेशन प्रणाली को लागू करने की तैयारी कर ली है।
क्या है टू-टियर एज वेरिफिकेशन सिस्टम?
इस प्रणाली में दो स्तर पर जांच की जाएगी:
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पहला स्तर – दस्तावेज़ों की जांच: जैसे कि आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, और मतदाता पहचान पत्र।
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दूसरा स्तर – मेडिकल जांच: इसमें हड्डियों का TW3 टेस्ट (टैनर-व्हाइटहाउस-3) किया जाएगा, जिससे शरीर की उम्र का अनुमान लगाया जा सकेगा।
ये जांच अंडर-16 लड़कों और अंडर-15 लड़कियों के लिए अनिवार्य होगी।
बाहरी एजेंसी करेगी उम्र की जांच
BCCI ने इस जांच के लिए एक प्रोफेशनल बाहरी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए बोर्ड ने RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी कर दी है, जिसमें एजेंसियों से बोली मांगी गई है। अगस्त के अंत तक एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
पुराने मामले जो बने मिसाल
BCCI पहले भी कई खिलाड़ियों को एज फ्रॉड में पकड़ चुका है:
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नीतीश राणा को एज ग्रुप क्रिकेट से निलंबित किया गया था।
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मनजोत कालरा को 2020 में दो साल के लिए बैन किया गया था।
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राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी संदेह रहे हैं, हालांकि उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए।
हर राज्य में होगी सख्त निगरानी
नई एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी पहुंच देशभर के शहरी और ग्रामीण इलाकों तक हो। BCCI चाहता है कि हर खिलाड़ी की उम्र की डिजिटल और फिजिकल जांच संभव हो सके। खासकर, जरूरत पड़ने पर फील्ड विजिट भी की जाए।
कौन बन सकती है एजेंसी?
BCCI ने कुछ खास मानदंड तय किए हैं:
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कम से कम 3 साल का अनुभव,
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बड़ी कंपनियों, बोर्ड्स या संस्थानों के साथ काम किया हो,
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सभी राज्यों में नेटवर्क और काम करने की क्षमता हो।
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अब क्रिकेटर नहीं छुपा सकेंगे असली उम्र, BCCI लाया सख्त एज-वेरिफिकेशन सिस्टम
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बोर्ड ने खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र की पुष्टि के लिए एक नई टू-टियर एज वेरिफिकेशन प्रणाली को लागू करने की तैयारी कर ली है।
क्या है टू-टियर एज वेरिफिकेशन सिस्टम?
इस प्रणाली में दो स्तर पर जांच की जाएगी:
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पहला स्तर – दस्तावेज़ों की जांच: जैसे कि आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, और मतदाता पहचान पत्र।
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दूसरा स्तर – मेडिकल जांच: इसमें हड्डियों का TW3 टेस्ट (टैनर-व्हाइटहाउस-3) किया जाएगा, जिससे शरीर की उम्र का अनुमान लगाया जा सकेगा।
ये जांच अंडर-16 लड़कों और अंडर-15 लड़कियों के लिए अनिवार्य होगी।
बाहरी एजेंसी करेगी उम्र की जांच
BCCI ने इस जांच के लिए एक प्रोफेशनल बाहरी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए बोर्ड ने RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी कर दी है, जिसमें एजेंसियों से बोली मांगी गई है। अगस्त के अंत तक एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
पुराने मामले जो बने मिसाल
BCCI पहले भी कई खिलाड़ियों को एज फ्रॉड में पकड़ चुका है:
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नीतीश राणा को एज ग्रुप क्रिकेट से निलंबित किया गया था।
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मनजोत कालरा को 2020 में दो साल के लिए बैन किया गया था।
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राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी संदेह रहे हैं, हालांकि उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए।
हर राज्य में होगी सख्त निगरानी
नई एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी पहुंच देशभर के शहरी और ग्रामीण इलाकों तक हो। BCCI चाहता है कि हर खिलाड़ी की उम्र की डिजिटल और फिजिकल जांच संभव हो सके। खासकर, जरूरत पड़ने पर फील्ड विजिट भी की जाए।
कौन बन सकती है एजेंसी?
BCCI ने कुछ खास मानदंड तय किए हैं:
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कम से कम 3 साल का अनुभव,
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बड़ी कंपनियों, बोर्ड्स या संस्थानों के साथ काम किया हो,
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सभी राज्यों में नेटवर्क और काम करने की क्षमता हो।
