BCCI सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बड़े बदलाव की तैयारी, A+ ग्रेड हटाने का प्रस्ताव

स्पोर्ट्स डेस्क

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फॉर्मेट भागीदारी बनेगी नई कसौटी, वनडे तक सीमित खिलाड़ियों की ग्रेडिंग घट सकती है

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। बोर्ड की चयन समिति ने मौजूदा चार-स्तरीय ग्रेड संरचना में शामिल A+ कैटेगरी को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो भविष्य में खिलाड़ियों को केवल A, B और C—तीन ग्रेड में बांटा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य खिलाड़ियों की तीनों फॉर्मेट में सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता देना है।

मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव जल्द होने वाली BCCI की एपेक्स काउंसिल बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा। अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बोर्ड के भीतर इस पर गंभीर मंथन चल रहा है।

A+ ग्रेड क्यों निशाने पर

फिलहाल A+ ग्रेड में शामिल खिलाड़ियों को सालाना 7 करोड़ रुपए मिलते हैं। इस कैटेगरी में वही खिलाड़ी रखे जाते हैं, जो सभी फॉर्मेट—टेस्ट, वनडे और टी-20—में नियमित रूप से भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में कुछ सीनियर खिलाड़ी सीमित फॉर्मेट खेल रहे हैं, जिससे बोर्ड की नीति पर सवाल खड़े हुए हैं।

रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टी-20 वर्ल्ड कप 2024 जीतने के बाद टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। दोनों फिलहाल केवल वनडे फॉर्मेट में सक्रिय हैं। ऐसे में यदि नया स्ट्रक्चर लागू होता है, तो इन दिग्गजों को A+ की जगह B ग्रेड में रखा जा सकता है।

नए मॉडल में क्या बदलेगा

प्रस्तावित मॉडल में तीनों फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसका सीधा असर सैलरी स्ट्रक्चर और ग्रेडिंग पर पड़ेगा। बोर्ड का मानना है कि इससे युवा खिलाड़ियों को सभी फॉर्मेट में खुद को साबित करने का प्रोत्साहन मिलेगा और सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट अधिक प्रदर्शन-आधारित बनेगा।

वर्तमान में जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा भी A+ ग्रेड का हिस्सा हैं। दोनों खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में नियमित रूप से चयन के दावेदार रहे हैं, लेकिन नए नियम लागू होने पर उनकी स्थिति भी बोर्ड की नई कसौटी पर निर्भर करेगी।

पहले भी बदली है नीति

यह पहली बार नहीं है जब BCCI ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सख्त रुख अपनाया हो। महेंद्र सिंह धोनी इसका बड़ा उदाहरण हैं। टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बावजूद धोनी कुछ समय तक A+ ग्रेड में बने रहे, लेकिन 2019-20 सत्र में उन्हें A ग्रेड में स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पूरी तरह संन्यास लेने के बाद वे कॉन्ट्रैक्ट सूची से बाहर हो गए।

विमेंस क्रिकेट में पहले से तीन ग्रेड

गौरतलब है कि महिला क्रिकेट में BCCI पहले से ही तीन-ग्रेड सिस्टम लागू कर चुका है। वहां फॉर्मेट भागीदारी और प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को ग्रेड A, B और C में रखा जाता है। माना जा रहा है कि पुरुष क्रिकेट के लिए प्रस्तावित मॉडल इसी ढांचे से प्रेरित है।

यदि एपेक्स काउंसिल इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो 2025-26 सीजन से नया सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लागू हो सकता है। इससे न सिर्फ सैलरी ढांचा बदलेगा, बल्कि टीम चयन और खिलाड़ियों की प्राथमिकताओं पर भी दूरगामी असर पड़ेगा।

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www.dainikjagranmpcg.com
20 Jan 2026 By Nitin Trivedi

BCCI सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बड़े बदलाव की तैयारी, A+ ग्रेड हटाने का प्रस्ताव

स्पोर्ट्स डेस्क

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। बोर्ड की चयन समिति ने मौजूदा चार-स्तरीय ग्रेड संरचना में शामिल A+ कैटेगरी को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो भविष्य में खिलाड़ियों को केवल A, B और C—तीन ग्रेड में बांटा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य खिलाड़ियों की तीनों फॉर्मेट में सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता देना है।

मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव जल्द होने वाली BCCI की एपेक्स काउंसिल बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा। अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बोर्ड के भीतर इस पर गंभीर मंथन चल रहा है।

A+ ग्रेड क्यों निशाने पर

फिलहाल A+ ग्रेड में शामिल खिलाड़ियों को सालाना 7 करोड़ रुपए मिलते हैं। इस कैटेगरी में वही खिलाड़ी रखे जाते हैं, जो सभी फॉर्मेट—टेस्ट, वनडे और टी-20—में नियमित रूप से भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में कुछ सीनियर खिलाड़ी सीमित फॉर्मेट खेल रहे हैं, जिससे बोर्ड की नीति पर सवाल खड़े हुए हैं।

रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टी-20 वर्ल्ड कप 2024 जीतने के बाद टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। दोनों फिलहाल केवल वनडे फॉर्मेट में सक्रिय हैं। ऐसे में यदि नया स्ट्रक्चर लागू होता है, तो इन दिग्गजों को A+ की जगह B ग्रेड में रखा जा सकता है।

नए मॉडल में क्या बदलेगा

प्रस्तावित मॉडल में तीनों फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसका सीधा असर सैलरी स्ट्रक्चर और ग्रेडिंग पर पड़ेगा। बोर्ड का मानना है कि इससे युवा खिलाड़ियों को सभी फॉर्मेट में खुद को साबित करने का प्रोत्साहन मिलेगा और सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट अधिक प्रदर्शन-आधारित बनेगा।

वर्तमान में जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा भी A+ ग्रेड का हिस्सा हैं। दोनों खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में नियमित रूप से चयन के दावेदार रहे हैं, लेकिन नए नियम लागू होने पर उनकी स्थिति भी बोर्ड की नई कसौटी पर निर्भर करेगी।

पहले भी बदली है नीति

यह पहली बार नहीं है जब BCCI ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सख्त रुख अपनाया हो। महेंद्र सिंह धोनी इसका बड़ा उदाहरण हैं। टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बावजूद धोनी कुछ समय तक A+ ग्रेड में बने रहे, लेकिन 2019-20 सत्र में उन्हें A ग्रेड में स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पूरी तरह संन्यास लेने के बाद वे कॉन्ट्रैक्ट सूची से बाहर हो गए।

विमेंस क्रिकेट में पहले से तीन ग्रेड

गौरतलब है कि महिला क्रिकेट में BCCI पहले से ही तीन-ग्रेड सिस्टम लागू कर चुका है। वहां फॉर्मेट भागीदारी और प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को ग्रेड A, B और C में रखा जाता है। माना जा रहा है कि पुरुष क्रिकेट के लिए प्रस्तावित मॉडल इसी ढांचे से प्रेरित है।

यदि एपेक्स काउंसिल इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो 2025-26 सीजन से नया सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लागू हो सकता है। इससे न सिर्फ सैलरी ढांचा बदलेगा, बल्कि टीम चयन और खिलाड़ियों की प्राथमिकताओं पर भी दूरगामी असर पड़ेगा।

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