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स्पेन का झटका, केप वर्डे से वर्ल्ड कप में 0-0 ड्रॉ
स्पोर्ट्स डेस्क
लॉस एंजेलिस में खेले गए मुकाबले में स्पेन 27 शॉट्स के बावजूद गोल नहीं कर सका, युवा स्टार यामाल की कमी साफ दिखी
लॉस एंजेलिस में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप मुकाबले में स्पेन और केप वर्डे के बीच 0-0 का हैरान करने वाला ड्रॉ दर्ज हुआ, जहां मुकाबले से पहले स्पेन को साफ तौर पर मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मैदान पर कहानी बिल्कुल अलग नजर आई। यूरोपीय चैंपियन स्पेन ने पूरे मैच में दबदबा बनाए रखा, 27 शॉट्स लगाए और कई मौके बनाए, लेकिन इसके बावजूद गेंद गोल लाइन पार नहीं कर सकी। दूसरी तरफ केप वर्डे की टीम ने अनुशासित डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग के दम पर बड़ा उलटफेर करने से रोक दिया। मैच में सबसे बड़ा नाम केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा रहे, जिन्होंने 40 साल की उम्र में सात बेहतरीन सेव करते हुए टीम को हार से बचा लिया। स्पेन की टीम से सबसे ज्यादा उम्मीद युवा स्टार लामिन यामाल को लेकर थी, लेकिन वह शुरुआती 70 मिनट तक मैदान पर नहीं उतरे, जिसका असर टीम के खेल पर साफ दिखा। स्पेन ने शुरुआत से ही गेंद पर नियंत्रण रखा और लगभग 700 से ज्यादा पास पूरे किए, लेकिन यह पासिंग अधिकतर साइडवेज ही रही और आक्रामकता की कमी दिखी। फर्नान टोरेस और मार्क कुकुरेला ने बाएं फ्लैंक से कुछ मौके बनाए, लेकिन फिनिशिंग में टीम बार-बार चूकती रही। पहले हाफ में टोरेस का एक शॉट बार से टकराया और ओयार्जाबल का रिबाउंड भी गोलकीपर ने शानदार तरीके से रोक लिया। इसके अलावा आयमेरिक लापोर्टे का हेडर भी गोल के बेहद करीब जाकर बाहर निकल गया।
कोच लुइस डे ला फुएंते ने मैच से पहले ही कहा था कि यामाल फिट हैं लेकिन शुरुआत से खेलने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी फैसले ने मैच की दिशा प्रभावित की, क्योंकि जब तक यामाल मैदान पर आए, तब तक खेल का रुख काफी हद तक स्थिर हो चुका था। उनके आते ही स्पेन के खेल में थोड़ी तेजी और रचनात्मकता आई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। यामाल ने पहले ही टच में डिफेंडर को छकाने की कोशिश की और एक अच्छा मौका भी बनाया, लेकिन टीम उसे गोल में तब्दील नहीं कर सकी। बाद में निको विलियम्स को भी देर से मैदान पर उतारा गया, जिससे स्पेन का अटैक और देर से सक्रिय हुआ। दूसरी तरफ केप वर्डे की टीम ने पूरे मैच में बेहद संगठित और अनुशासित प्रदर्शन किया। फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर अपनी क्षमता साबित करते हुए उन्होंने स्पेन के लगातार हमलों को रोकने के लिए शानदार रणनीति अपनाई। टीम के कोच बुबिस्टा ने मैच के बाद कहा कि उनकी टीम ने बिना डर के खेल दिखाया और हर खिलाड़ी ने अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई। यह नतीजा केप वर्डे जैसे छोटे देश के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, जिसने दुनिया की टॉप टीमों में से एक को गोल करने से रोक दिया। स्पेन के लिए यह ड्रॉ चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि टीम को टूर्नामेंट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि कोच ने बाद में कहा कि यह एक लंबा टूर्नामेंट है और टीम धीरे-धीरे बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्पेन ने पिछले 32 मैचों में हार नहीं झेली है, जिससे टीम का आत्मविश्वास बना हुआ है। अब स्पेन का अगला मुकाबला सऊदी अरब के खिलाफ होगा, जहां टीम पर जीत दर्ज करने का दबाव और बढ़ गया है।
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स्पेन का झटका, केप वर्डे से वर्ल्ड कप में 0-0 ड्रॉ
स्पोर्ट्स डेस्क
लॉस एंजेलिस में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप मुकाबले में स्पेन और केप वर्डे के बीच 0-0 का हैरान करने वाला ड्रॉ दर्ज हुआ, जहां मुकाबले से पहले स्पेन को साफ तौर पर मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मैदान पर कहानी बिल्कुल अलग नजर आई। यूरोपीय चैंपियन स्पेन ने पूरे मैच में दबदबा बनाए रखा, 27 शॉट्स लगाए और कई मौके बनाए, लेकिन इसके बावजूद गेंद गोल लाइन पार नहीं कर सकी। दूसरी तरफ केप वर्डे की टीम ने अनुशासित डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग के दम पर बड़ा उलटफेर करने से रोक दिया। मैच में सबसे बड़ा नाम केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा रहे, जिन्होंने 40 साल की उम्र में सात बेहतरीन सेव करते हुए टीम को हार से बचा लिया। स्पेन की टीम से सबसे ज्यादा उम्मीद युवा स्टार लामिन यामाल को लेकर थी, लेकिन वह शुरुआती 70 मिनट तक मैदान पर नहीं उतरे, जिसका असर टीम के खेल पर साफ दिखा। स्पेन ने शुरुआत से ही गेंद पर नियंत्रण रखा और लगभग 700 से ज्यादा पास पूरे किए, लेकिन यह पासिंग अधिकतर साइडवेज ही रही और आक्रामकता की कमी दिखी। फर्नान टोरेस और मार्क कुकुरेला ने बाएं फ्लैंक से कुछ मौके बनाए, लेकिन फिनिशिंग में टीम बार-बार चूकती रही। पहले हाफ में टोरेस का एक शॉट बार से टकराया और ओयार्जाबल का रिबाउंड भी गोलकीपर ने शानदार तरीके से रोक लिया। इसके अलावा आयमेरिक लापोर्टे का हेडर भी गोल के बेहद करीब जाकर बाहर निकल गया।
कोच लुइस डे ला फुएंते ने मैच से पहले ही कहा था कि यामाल फिट हैं लेकिन शुरुआत से खेलने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी फैसले ने मैच की दिशा प्रभावित की, क्योंकि जब तक यामाल मैदान पर आए, तब तक खेल का रुख काफी हद तक स्थिर हो चुका था। उनके आते ही स्पेन के खेल में थोड़ी तेजी और रचनात्मकता आई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। यामाल ने पहले ही टच में डिफेंडर को छकाने की कोशिश की और एक अच्छा मौका भी बनाया, लेकिन टीम उसे गोल में तब्दील नहीं कर सकी। बाद में निको विलियम्स को भी देर से मैदान पर उतारा गया, जिससे स्पेन का अटैक और देर से सक्रिय हुआ। दूसरी तरफ केप वर्डे की टीम ने पूरे मैच में बेहद संगठित और अनुशासित प्रदर्शन किया। फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर अपनी क्षमता साबित करते हुए उन्होंने स्पेन के लगातार हमलों को रोकने के लिए शानदार रणनीति अपनाई। टीम के कोच बुबिस्टा ने मैच के बाद कहा कि उनकी टीम ने बिना डर के खेल दिखाया और हर खिलाड़ी ने अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई। यह नतीजा केप वर्डे जैसे छोटे देश के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, जिसने दुनिया की टॉप टीमों में से एक को गोल करने से रोक दिया। स्पेन के लिए यह ड्रॉ चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि टीम को टूर्नामेंट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि कोच ने बाद में कहा कि यह एक लंबा टूर्नामेंट है और टीम धीरे-धीरे बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्पेन ने पिछले 32 मैचों में हार नहीं झेली है, जिससे टीम का आत्मविश्वास बना हुआ है। अब स्पेन का अगला मुकाबला सऊदी अरब के खिलाफ होगा, जहां टीम पर जीत दर्ज करने का दबाव और बढ़ गया है।
