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टीम इंडिया के लिए फिटनेस पर सख्ती, BCCI ने लागू किए नए नियम; ब्रोंको टेस्ट और 2KM रन अब बड़ी चुनौती
स्पोर्ट्स डेस्क
खराब प्रदर्शन और बढ़ती इंजरी के बाद फिटनेस मानकों में बड़ा बदलाव, खिलाड़ियों को बैक-टू-बैक ब्रोंको टेस्ट और 2 किलोमीटर दौड़ पास करनी होगी
भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना अब सिर्फ शानदार बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी या बेहतरीन फील्डिंग तक सीमित नहीं रहेगा। अब खिलाड़ियों को पहले से कहीं अधिक कठिन फिटनेस मानकों पर भी खरा उतरना होगा। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के प्रदर्शन, खिलाड़ियों की लगातार चोटों और फिटनेस को लेकर उठे सवालों के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों के लिए नए और अधिक चुनौतीपूर्ण फिटनेस नियम लागू करने का फैसला किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और मैदान पर उनकी गतिशीलता को बेहतर बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को अब केवल ब्रोंको टेस्ट पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके तुरंत बाद 2 किलोमीटर की दौड़ भी निर्धारित समय सीमा में पूरी करनी होगी। पहले दोनों टेस्ट अलग-अलग लिए जाते थे, लेकिन अब इन्हें लगातार कराया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों की वास्तविक फिटनेस और रिकवरी क्षमता का बेहतर आकलन किया जा सके।
ब्रोंको टेस्ट क्रिकेट समेत कई अंतरराष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों की सहनशक्ति मापने का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। इस टेस्ट में खिलाड़ी को लगातार पांच सेट पूरे करने होते हैं। हर सेट में 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की दूरी तय कर वापस लौटना होता है। इस तरह एक सेट में कुल 240 मीटर की दौड़ पूरी करनी पड़ती है और पूरे टेस्ट में कुल 1200 मीटर की दूरी तय की जाती है। पहले इस टेस्ट को पूरा करने के लिए खिलाड़ियों के पास 6 मिनट का समय होता था, लेकिन अब इसे घटाकर 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड के बीच कर दिया गया है। समय में यह कमी खिलाड़ियों के लिए चुनौती को कई गुना बढ़ा देती है।
ब्रोंको टेस्ट पूरा करने के तुरंत बाद खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर की दौड़ भी लगानी होगी। पहले यह दौड़ अलग टेस्ट के रूप में आयोजित होती थी और तेज गेंदबाजों के लिए 8 मिनट 15 सेकंड तथा अन्य खिलाड़ियों के लिए 8 मिनट 30 सेकंड का समय निर्धारित था। नए नियमों के अनुसार अब यह दौड़ ब्रोंको टेस्ट के बाद ही होगी और इसे 9 से 10 मिनट के भीतर पूरा करना होगा। हालांकि समय सीमा थोड़ी बढ़ाई गई है, लेकिन पहले से थके हुए शरीर के साथ यह दूरी तय करना कहीं अधिक कठिन होगा।
BCCI के सूत्रों के अनुसार पिछले एक वर्ष के दौरान फिटनेस टेस्ट के मानकों का सख्ती से पालन नहीं किया गया था। कुछ खिलाड़ियों को अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य दिए गए, जबकि कुछ मामलों में पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद उन्हें खेलने की अनुमति मिल गई। यही कारण है कि बोर्ड ने अब फिटनेस को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतने का फैसला किया है।
इंग्लैंड दौरे के दौरान तेज गेंदबाज हर्षित राणा को फिटनेस और अधिक वजन की वजह से टीम से वापस भेजना पड़ा था। उस समय उनका वजन लगभग 97 किलोग्राम बताया गया था। अब उनके लिए 96 किलोग्राम से कम वजन बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। हालिया जानकारी के अनुसार उनका वजन 94 किलोग्राम तक पहुंच चुका है और जल्द ही उन्हें पूरी तरह फिट घोषित किया जा सकता है। इसी तरह नीतीश कुमार रेड्डी को भी पहले फिटनेस क्लियरेंस दिए जाने पर सवाल उठे थे।
लगातार खिलाड़ियों के चोटिल होने और मैदान पर मांसपेशियों में खिंचाव की बढ़ती घटनाओं के बाद टीम इंडिया के फिजियो कमलेश जैन से भी जवाब-तलब किया गया है। BCCI सचिव देवजीत सैकिया और टीम प्रबंधन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी खिलाड़ी की फिटनेस में कमी दिखाई दे तो उसके नाम या स्टार स्टेटस की परवाह किए बिना इसकी जानकारी तुरंत दी जाए। बोर्ड का मानना है कि मैदान पर कई खिलाड़ियों की गतिशीलता पहले की तुलना में कम हुई है और लंबे समय तक बल्लेबाजी के दौरान रन लेने में भी परेशानी देखने को मिली है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) और टीम मैनेजमेंट के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठे हैं। जसप्रीत बुमराह को श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले फिट करने की योजना सफल नहीं हो सकी, जिसके चलते वह शुरुआती मुकाबले से बाहर हो गए। इसके अलावा कई खिलाड़ियों को नए फिटनेस मानकों की जानकारी भी समय पर नहीं मिल सकी। तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज जब श्रीलंका दौरे से पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे तो उन्हें अचानक ब्रोंको और 2 किलोमीटर रन टेस्ट देना पड़ा।
अब यह व्यवस्था केवल राष्ट्रीय टीम तक सीमित नहीं रहेगी। BCCI चाहता है कि घरेलू क्रिकेट और भारत-ए टीम के खिलाड़ी भी इन्हीं फिटनेस मानकों के अनुरूप तैयारी करें ताकि राष्ट्रीय टीम में आने पर उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इससे खिलाड़ियों की फिटनेस का स्तर पूरे सिस्टम में एक समान रखने की कोशिश की जाएगी।
हालांकि खेल विज्ञान से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने इस नई व्यवस्था को लेकर सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा फिटनेस टेस्ट और प्रशिक्षण का दबाव डाला गया तो मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ सकती है। लगातार अधिक वर्कलोड से बर्नआउट और चोट का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए फिटनेस और रिकवरी के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।
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टीम इंडिया के लिए फिटनेस पर सख्ती, BCCI ने लागू किए नए नियम; ब्रोंको टेस्ट और 2KM रन अब बड़ी चुनौती
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना अब सिर्फ शानदार बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी या बेहतरीन फील्डिंग तक सीमित नहीं रहेगा। अब खिलाड़ियों को पहले से कहीं अधिक कठिन फिटनेस मानकों पर भी खरा उतरना होगा। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के प्रदर्शन, खिलाड़ियों की लगातार चोटों और फिटनेस को लेकर उठे सवालों के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों के लिए नए और अधिक चुनौतीपूर्ण फिटनेस नियम लागू करने का फैसला किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और मैदान पर उनकी गतिशीलता को बेहतर बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को अब केवल ब्रोंको टेस्ट पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके तुरंत बाद 2 किलोमीटर की दौड़ भी निर्धारित समय सीमा में पूरी करनी होगी। पहले दोनों टेस्ट अलग-अलग लिए जाते थे, लेकिन अब इन्हें लगातार कराया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों की वास्तविक फिटनेस और रिकवरी क्षमता का बेहतर आकलन किया जा सके।
ब्रोंको टेस्ट क्रिकेट समेत कई अंतरराष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों की सहनशक्ति मापने का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। इस टेस्ट में खिलाड़ी को लगातार पांच सेट पूरे करने होते हैं। हर सेट में 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की दूरी तय कर वापस लौटना होता है। इस तरह एक सेट में कुल 240 मीटर की दौड़ पूरी करनी पड़ती है और पूरे टेस्ट में कुल 1200 मीटर की दूरी तय की जाती है। पहले इस टेस्ट को पूरा करने के लिए खिलाड़ियों के पास 6 मिनट का समय होता था, लेकिन अब इसे घटाकर 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड के बीच कर दिया गया है। समय में यह कमी खिलाड़ियों के लिए चुनौती को कई गुना बढ़ा देती है।
ब्रोंको टेस्ट पूरा करने के तुरंत बाद खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर की दौड़ भी लगानी होगी। पहले यह दौड़ अलग टेस्ट के रूप में आयोजित होती थी और तेज गेंदबाजों के लिए 8 मिनट 15 सेकंड तथा अन्य खिलाड़ियों के लिए 8 मिनट 30 सेकंड का समय निर्धारित था। नए नियमों के अनुसार अब यह दौड़ ब्रोंको टेस्ट के बाद ही होगी और इसे 9 से 10 मिनट के भीतर पूरा करना होगा। हालांकि समय सीमा थोड़ी बढ़ाई गई है, लेकिन पहले से थके हुए शरीर के साथ यह दूरी तय करना कहीं अधिक कठिन होगा।
BCCI के सूत्रों के अनुसार पिछले एक वर्ष के दौरान फिटनेस टेस्ट के मानकों का सख्ती से पालन नहीं किया गया था। कुछ खिलाड़ियों को अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य दिए गए, जबकि कुछ मामलों में पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद उन्हें खेलने की अनुमति मिल गई। यही कारण है कि बोर्ड ने अब फिटनेस को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतने का फैसला किया है।
इंग्लैंड दौरे के दौरान तेज गेंदबाज हर्षित राणा को फिटनेस और अधिक वजन की वजह से टीम से वापस भेजना पड़ा था। उस समय उनका वजन लगभग 97 किलोग्राम बताया गया था। अब उनके लिए 96 किलोग्राम से कम वजन बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। हालिया जानकारी के अनुसार उनका वजन 94 किलोग्राम तक पहुंच चुका है और जल्द ही उन्हें पूरी तरह फिट घोषित किया जा सकता है। इसी तरह नीतीश कुमार रेड्डी को भी पहले फिटनेस क्लियरेंस दिए जाने पर सवाल उठे थे।
लगातार खिलाड़ियों के चोटिल होने और मैदान पर मांसपेशियों में खिंचाव की बढ़ती घटनाओं के बाद टीम इंडिया के फिजियो कमलेश जैन से भी जवाब-तलब किया गया है। BCCI सचिव देवजीत सैकिया और टीम प्रबंधन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी खिलाड़ी की फिटनेस में कमी दिखाई दे तो उसके नाम या स्टार स्टेटस की परवाह किए बिना इसकी जानकारी तुरंत दी जाए। बोर्ड का मानना है कि मैदान पर कई खिलाड़ियों की गतिशीलता पहले की तुलना में कम हुई है और लंबे समय तक बल्लेबाजी के दौरान रन लेने में भी परेशानी देखने को मिली है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) और टीम मैनेजमेंट के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठे हैं। जसप्रीत बुमराह को श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले फिट करने की योजना सफल नहीं हो सकी, जिसके चलते वह शुरुआती मुकाबले से बाहर हो गए। इसके अलावा कई खिलाड़ियों को नए फिटनेस मानकों की जानकारी भी समय पर नहीं मिल सकी। तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज जब श्रीलंका दौरे से पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे तो उन्हें अचानक ब्रोंको और 2 किलोमीटर रन टेस्ट देना पड़ा।
अब यह व्यवस्था केवल राष्ट्रीय टीम तक सीमित नहीं रहेगी। BCCI चाहता है कि घरेलू क्रिकेट और भारत-ए टीम के खिलाड़ी भी इन्हीं फिटनेस मानकों के अनुरूप तैयारी करें ताकि राष्ट्रीय टीम में आने पर उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इससे खिलाड़ियों की फिटनेस का स्तर पूरे सिस्टम में एक समान रखने की कोशिश की जाएगी।
हालांकि खेल विज्ञान से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने इस नई व्यवस्था को लेकर सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा फिटनेस टेस्ट और प्रशिक्षण का दबाव डाला गया तो मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ सकती है। लगातार अधिक वर्कलोड से बर्नआउट और चोट का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए फिटनेस और रिकवरी के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।
