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कॉमनवेल्थ से लौटे भारतीय खिलाड़ियों का भव्य स्वागत, बॉक्सिंग-जूडो सितारों ने एशियन गेम्स पर साधा निशाना
स्पोर्ट्स डेस्क
दिल्ली एयरपोर्ट पर ढोल-नगाड़ों और तिरंगे के साथ हुआ स्वागत, खिलाड़ियों ने कहा- अब अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाना
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर भारत लौटे खिलाड़ियों का सोमवार को राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। बॉक्सिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स में देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में खेल प्रेमी, परिवार के सदस्य, कोच, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA), स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघों के अधिकारी मौजूद रहे। एयरपोर्ट परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। खिलाड़ियों के स्वागत के लिए तिरंगे लहराए गए, ढोल-नगाड़े बजाए गए और फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया गया। खिलाड़ियों ने भी इस सम्मान के लिए सभी का आभार जताते हुए कहा कि यह प्यार और समर्थन उन्हें भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।
इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहे। बॉक्सिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए। खिलाड़ियों ने कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि पूरे कोचिंग स्टाफ, सहयोगी टीम और देशवासियों के विश्वास का नतीजा है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। 14 मुक्केबाजों के दल में से 10 खिलाड़ियों ने पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक शामिल रहे। इस तरह भारतीय टीम ने लगभग 71 प्रतिशत मेडल कन्वर्जन रेट हासिल किया, जो पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स की तुलना में काफी बेहतर रहा। महिला 51 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली साक्षी चौधरी ने एयरपोर्ट पर कहा कि यह पल उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि देशवासियों का प्यार और स्वागत देखकर वह बेहद भावुक हैं। साक्षी ने कहा कि भारतीय बॉक्सिंग का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है और अब पूरी टीम का लक्ष्य एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतना होगा।
स्वर्ण पदक विजेता प्रिया घनघस ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उनके खेल जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना गर्व की बात है और अब वह एशियन गेम्स में भी इसी प्रदर्शन को दोहराने का प्रयास करेंगी। एक अन्य स्वर्ण पदक विजेता जैस्मिन लंबोरिया ने कहा कि एयरपोर्ट पर परिवार और कोच को देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी मेहनत को और अधिक मजबूत बनाएगा और भविष्य में भी वह भारत के लिए ज्यादा से ज्यादा पदक जीतने का प्रयास करेंगी।
वहीं हेवीवेट वर्ग में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल ने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी तैयारी स्वर्ण पदक जीतने की थी, लेकिन रजत पदक भी उनके लिए सीख और प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि अब पूरा ध्यान एशियन गेम्स की तैयारी पर रहेगा।
इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडो टीम ने भी नया इतिहास रच दिया। पहली बार भारत ने जूडो में दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। महिला जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने कहा कि यह उपलब्धि केवल खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय जूडो समुदाय की जीत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सफलता के बाद देश में जूडो को नई पहचान मिलेगी और बड़ी संख्या में युवा इस खेल को अपनाने के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार अच्छे प्रदर्शन से भारत में जूडो का स्तर और लोकप्रियता दोनों बढ़ेंगे। उनका मानना है कि भविष्य में भारत इस खेल में और भी बड़े परिणाम हासिल कर सकता है। हालांकि भारतीय जूडो टीम को प्रतियोगिता से पहले झटका भी लगा था, जब दो खिलाड़ियों को डोपिंग मामलों के कारण बाहर होना पड़ा। इसके बावजूद टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की।
पैरा स्पोर्ट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। स्वर्ण पदक विजेता सोमन राणा ने कहा कि यह पदक केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे देश, भारतीय सेना और उनके राज्य का सम्मान है। उन्होंने कहा कि आज पैरा स्पोर्ट्स को पहले की तुलना में अधिक पहचान मिल रही है और इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और पैरालंपिक में भारत के लिए और अधिक सफलता हासिल करना है। रजत पदक विजेता मोहम्मद बासिल ने बताया कि यह उनके करियर की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी। उन्होंने कहा कि पहली ही प्रतियोगिता में पदक जीतना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतियोगिता के दौरान मौसम चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इस अनुभव से उन्हें भविष्य की तैयारियों में काफी मदद मिलेगी।
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कॉमनवेल्थ से लौटे भारतीय खिलाड़ियों का भव्य स्वागत, बॉक्सिंग-जूडो सितारों ने एशियन गेम्स पर साधा निशाना
स्पोर्ट्स डेस्क
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर भारत लौटे खिलाड़ियों का सोमवार को राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। बॉक्सिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स में देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में खेल प्रेमी, परिवार के सदस्य, कोच, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA), स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघों के अधिकारी मौजूद रहे। एयरपोर्ट परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। खिलाड़ियों के स्वागत के लिए तिरंगे लहराए गए, ढोल-नगाड़े बजाए गए और फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया गया। खिलाड़ियों ने भी इस सम्मान के लिए सभी का आभार जताते हुए कहा कि यह प्यार और समर्थन उन्हें भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।
इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहे। बॉक्सिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए। खिलाड़ियों ने कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि पूरे कोचिंग स्टाफ, सहयोगी टीम और देशवासियों के विश्वास का नतीजा है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। 14 मुक्केबाजों के दल में से 10 खिलाड़ियों ने पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक शामिल रहे। इस तरह भारतीय टीम ने लगभग 71 प्रतिशत मेडल कन्वर्जन रेट हासिल किया, जो पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स की तुलना में काफी बेहतर रहा। महिला 51 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली साक्षी चौधरी ने एयरपोर्ट पर कहा कि यह पल उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि देशवासियों का प्यार और स्वागत देखकर वह बेहद भावुक हैं। साक्षी ने कहा कि भारतीय बॉक्सिंग का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है और अब पूरी टीम का लक्ष्य एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतना होगा।
स्वर्ण पदक विजेता प्रिया घनघस ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उनके खेल जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना गर्व की बात है और अब वह एशियन गेम्स में भी इसी प्रदर्शन को दोहराने का प्रयास करेंगी। एक अन्य स्वर्ण पदक विजेता जैस्मिन लंबोरिया ने कहा कि एयरपोर्ट पर परिवार और कोच को देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी मेहनत को और अधिक मजबूत बनाएगा और भविष्य में भी वह भारत के लिए ज्यादा से ज्यादा पदक जीतने का प्रयास करेंगी।
वहीं हेवीवेट वर्ग में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल ने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी तैयारी स्वर्ण पदक जीतने की थी, लेकिन रजत पदक भी उनके लिए सीख और प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि अब पूरा ध्यान एशियन गेम्स की तैयारी पर रहेगा।
इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडो टीम ने भी नया इतिहास रच दिया। पहली बार भारत ने जूडो में दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। महिला जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने कहा कि यह उपलब्धि केवल खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय जूडो समुदाय की जीत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सफलता के बाद देश में जूडो को नई पहचान मिलेगी और बड़ी संख्या में युवा इस खेल को अपनाने के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार अच्छे प्रदर्शन से भारत में जूडो का स्तर और लोकप्रियता दोनों बढ़ेंगे। उनका मानना है कि भविष्य में भारत इस खेल में और भी बड़े परिणाम हासिल कर सकता है। हालांकि भारतीय जूडो टीम को प्रतियोगिता से पहले झटका भी लगा था, जब दो खिलाड़ियों को डोपिंग मामलों के कारण बाहर होना पड़ा। इसके बावजूद टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की।
पैरा स्पोर्ट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। स्वर्ण पदक विजेता सोमन राणा ने कहा कि यह पदक केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे देश, भारतीय सेना और उनके राज्य का सम्मान है। उन्होंने कहा कि आज पैरा स्पोर्ट्स को पहले की तुलना में अधिक पहचान मिल रही है और इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और पैरालंपिक में भारत के लिए और अधिक सफलता हासिल करना है। रजत पदक विजेता मोहम्मद बासिल ने बताया कि यह उनके करियर की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी। उन्होंने कहा कि पहली ही प्रतियोगिता में पदक जीतना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतियोगिता के दौरान मौसम चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इस अनुभव से उन्हें भविष्य की तैयारियों में काफी मदद मिलेगी।
