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ISL पर अनिश्चितता, खिलाड़ियों ने FIFA से लगाई मदद की गुहार
स्पोर्ट्स डेस्क
AIFF और FSDL के बीच अधिकारों को लेकर जारी विवाद के चलते इंडियन सुपर लीग का नया सीजन शुरू नहीं हो सका, खिलाड़ियों ने FIFA से हस्तक्षेप की अपील की
इंडियन सुपर लीग (ISL) के 2025-26 सीजन को लेकर बनी अनिश्चितता अब खुलकर सामने आ गई है। जनवरी का महीना बीतने के बावजूद देश की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी फुटबॉल लीग की शुरुआत नहीं हो सकी है। इस स्थिति से चिंतित भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्था FIFA से हस्तक्षेप की मांग की है। खिलाड़ियों का कहना है कि लगातार बनी असमंजस की स्थिति उनके करियर, मानसिक स्थिति और आजीविका पर सीधा असर डाल रही है।
भारतीय फुटबॉल टीम के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री, कप्तान गुरप्रीत सिंह संधू और सीनियर डिफेंडर संदेश झिंगन ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात सार्वजनिक की। साझा किए गए वीडियो संदेशों में खिलाड़ियों ने साफ कहा कि वे सिर्फ जवाब और स्पष्टता चाहते हैं। सुनील छेत्री ने कहा कि खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ और फैंस—सभी को यह जानने का हक है कि आगे क्या होने वाला है और भारतीय फुटबॉल किस दिशा में जा रहा है।
गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि आमतौर पर जनवरी के समय ISL अपने चरम पर होती है और खिलाड़ी मैदान पर होते हैं, लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग है। उन्होंने इसे डर और निराशा से भरा समय बताया। संदेश झिंगन ने भी चिंता जताते हुए कहा कि अनिश्चितता ने खिलाड़ियों को मानसिक दबाव में डाल दिया है और भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ISL के ठप होने की मुख्य वजह ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और आयोजनकर्ता कंपनी फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL) के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (MRA) को लेकर जारी विवाद है। दोनों पक्षों के बीच नया समझौता अभी तक नहीं हो सका है, जिसके चलते लीग के आयोजन पर ब्रेक लग गया है। यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी बन चुका है।
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने AIFF और FSDL को आपसी मतभेद सुलझाने की सलाह दी थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी समाधान सामने नहीं आया। कोर्ट ने AIFF को यह निर्देश भी दिया है कि अंतिम फैसले तक वह FSDL के साथ कोई नया करार न करे। इसी वजह से लीग का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
गौरतलब है कि AIFF और FSDL के बीच वर्ष 2010 में 15 साल का समझौता हुआ था। इसके तहत FSDL हर साल AIFF को करीब 50 करोड़ रुपये का भुगतान करता है और बदले में उसे भारतीय फुटबॉल—जिसमें ISL और राष्ट्रीय टीम शामिल हैं—के प्रसारण, प्रबंधन और प्रचार के अधिकार मिले थे। अब इस एग्रीमेंट की अवधि पूरी हो चुकी है और नवीनीकरण पर सहमति नहीं बन पा रही है।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर भारतीय फुटबॉल की साख, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट और युवा प्रतिभाओं के विकास पर पड़ेगा। फैंस भी सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब सभी की नजरें AIFF, FSDL और FIFA पर टिकी हैं कि इस संकट से भारतीय फुटबॉल को कब और कैसे बाहर निकाला जाएगा।
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स्पोर्ट्स डेस्क
इंडियन सुपर लीग (ISL) के 2025-26 सीजन को लेकर बनी अनिश्चितता अब खुलकर सामने आ गई है। जनवरी का महीना बीतने के बावजूद देश की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी फुटबॉल लीग की शुरुआत नहीं हो सकी है। इस स्थिति से चिंतित भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्था FIFA से हस्तक्षेप की मांग की है। खिलाड़ियों का कहना है कि लगातार बनी असमंजस की स्थिति उनके करियर, मानसिक स्थिति और आजीविका पर सीधा असर डाल रही है।
भारतीय फुटबॉल टीम के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री, कप्तान गुरप्रीत सिंह संधू और सीनियर डिफेंडर संदेश झिंगन ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात सार्वजनिक की। साझा किए गए वीडियो संदेशों में खिलाड़ियों ने साफ कहा कि वे सिर्फ जवाब और स्पष्टता चाहते हैं। सुनील छेत्री ने कहा कि खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ और फैंस—सभी को यह जानने का हक है कि आगे क्या होने वाला है और भारतीय फुटबॉल किस दिशा में जा रहा है।
गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि आमतौर पर जनवरी के समय ISL अपने चरम पर होती है और खिलाड़ी मैदान पर होते हैं, लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग है। उन्होंने इसे डर और निराशा से भरा समय बताया। संदेश झिंगन ने भी चिंता जताते हुए कहा कि अनिश्चितता ने खिलाड़ियों को मानसिक दबाव में डाल दिया है और भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ISL के ठप होने की मुख्य वजह ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और आयोजनकर्ता कंपनी फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL) के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (MRA) को लेकर जारी विवाद है। दोनों पक्षों के बीच नया समझौता अभी तक नहीं हो सका है, जिसके चलते लीग के आयोजन पर ब्रेक लग गया है। यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी बन चुका है।
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने AIFF और FSDL को आपसी मतभेद सुलझाने की सलाह दी थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी समाधान सामने नहीं आया। कोर्ट ने AIFF को यह निर्देश भी दिया है कि अंतिम फैसले तक वह FSDL के साथ कोई नया करार न करे। इसी वजह से लीग का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
गौरतलब है कि AIFF और FSDL के बीच वर्ष 2010 में 15 साल का समझौता हुआ था। इसके तहत FSDL हर साल AIFF को करीब 50 करोड़ रुपये का भुगतान करता है और बदले में उसे भारतीय फुटबॉल—जिसमें ISL और राष्ट्रीय टीम शामिल हैं—के प्रसारण, प्रबंधन और प्रचार के अधिकार मिले थे। अब इस एग्रीमेंट की अवधि पूरी हो चुकी है और नवीनीकरण पर सहमति नहीं बन पा रही है।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर भारतीय फुटबॉल की साख, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट और युवा प्रतिभाओं के विकास पर पड़ेगा। फैंस भी सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब सभी की नजरें AIFF, FSDL और FIFA पर टिकी हैं कि इस संकट से भारतीय फुटबॉल को कब और कैसे बाहर निकाला जाएगा।
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