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'ये IPL नहीं है' वाले ताने का वैभव सूर्यवंशी ने दिया करारा जवाब, श्रीलंका ए के खिलाफ 29 गेंदों में मचाया तूफान
Sports News
दांबुला में खेले गए ट्राई सीरीज के फाइनल मुकाबले में भारत ए के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक क्रिकेट जगत में होती रहेगी। महज 15 साल की उम्र में वैभव ने श्रीलंका ए के गेंदबाजों पर ऐसा हमला बोला कि कुछ दिन पहले मिला तंज भी फीका पड़ गया। जिस टीम के खिलाड़ियों ने उन्हें कहा था, “ये IPL नहीं है”, उसी टीम के खिलाफ वैभव ने बल्ले से ऐसा जवाब दिया कि पूरा स्टेडियम उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी का गवाह बन गया।
ट्राई सीरीज के दौरान भारत ए और श्रीलंका ए के बीच मुकाबले पहले भी काफी चर्चा में रहे थे। खासकर वह मैच जिसमें फैसला सुपर ओवर तक पहुंचा था। उस मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे और भारत ए को हार का सामना करना पड़ा था। मैच के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच कहासुनी भी हुई थी। बताया गया कि उसी दौरान श्रीलंका ए के कुछ खिलाड़ियों ने वैभव पर तंज कसते हुए कहा था कि “ये IPL नहीं है।” युवा बल्लेबाज के लिए यह बात निश्चित रूप से आसान नहीं रही होगी। हालांकि उस समय मामला शांत हो गया, लेकिन लगता है कि वैभव ने उस टिप्पणी को अपने अंदर कहीं संभालकर रखा था।
फाइनल मुकाबले में जब एक बार फिर दोनों टीमें आमने-सामने आईं तो वैभव सूर्यवंशी का अंदाज बिल्कुल अलग नजर आया। शुरुआत से ही उन्होंने आक्रामक रुख अपनाया और श्रीलंका ए के गेंदबाजों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। पहली ही गेंद से उन्होंने साफ कर दिया कि वह इस बार किसी दबाव में नहीं हैं। मैदान के चारों ओर लगाए गए उनके शॉट्स ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। श्रीलंकाई गेंदबाज लगातार लाइन और लेंथ बदलते रहे, लेकिन वैभव के सामने उनकी कोई रणनीति काम नहीं आई।
सबसे ज्यादा मार उस गेंदबाज को पड़ी जिसने सीरीज के शुरुआती मुकाबले में वैभव का विकेट लिया था। मोहम्मद शिराज को युवा बल्लेबाज ने पूरी तरह निशाने पर रखा। आंकड़े बताते हैं कि शिराज की सिर्फ आठ गेंदों पर ही वैभव ने 34 रन बटोर लिए। हालात ऐसे बन गए कि कप्तान को उन्हें गेंदबाजी आक्रमण से हटाना पड़ा। हर चौका और छक्का मानो उस पुराने ताने का जवाब बनता जा रहा था।
वैभव सूर्यवंशी ने अपनी अर्धशतकीय पारी को जिस अंदाज में पूरा किया, उसने रिकॉर्ड बुक में नया अध्याय जोड़ दिया। उन्होंने केवल 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया, जो लिस्ट-ए क्रिकेट का नया विश्व रिकॉर्ड बताया जा रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी तेज रफ्तार से अर्धशतक लगाना किसी भी स्तर पर असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। खास बात यह रही कि रिकॉर्ड बनाने के बाद भी वैभव नहीं रुके। उनका आक्रमण लगातार जारी रहा और कुछ समय के लिए ऐसा लगने लगा कि वह सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं।
दांबुला के मैदान पर मौजूद दर्शकों के लिए यह किसी तूफानी बल्लेबाजी से कम नहीं था। चौकों और छक्कों की बरसात के बीच श्रीलंका ए के खिलाड़ी पूरी तरह दबाव में नजर आए। वैभव ने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए। इस पारी में उन्होंने 10 चौके और 8 शानदार छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 324.13 का रहा, जो अपने आप में उनकी बल्लेबाजी की आक्रामकता को दिखाता है। हालांकि वह शतक से सिर्फ छह रन दूर रह गए, लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने बल्लेबाजी की, उसने उनकी पारी को यादगार बना दिया।
इस विस्फोटक प्रदर्शन का असर पूरी सीरीज के आंकड़ों पर भी दिखाई दिया। फाइनल में लगाए गए आठ छक्कों की बदौलत वैभव सूर्यवंशी ट्राई सीरीज में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 11 छक्के लगाए। दिलचस्प बात यह रही कि कोई दूसरा बल्लेबाज उनके आसपास भी नहीं पहुंच सका। पूरे टूर्नामेंट में दहाई के आंकड़े तक पहुंचने वाले वह अकेले खिलाड़ी रहे।
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी की यह पारी केवल रन बनाने तक सीमित नहीं थी। यह एक युवा खिलाड़ी की मानसिक मजबूती का भी उदाहरण थी। कई बार आलोचना या विरोधी टीम की टिप्पणियां खिलाड़ियों पर दबाव बना देती हैं, लेकिन वैभव ने उसे प्रेरणा में बदल दिया। उन्होंने प्रतिक्रिया शब्दों से नहीं बल्कि अपने प्रदर्शन से दी। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर भी उनकी पारी की जमकर चर्चा हो रही है।
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'ये IPL नहीं है' वाले ताने का वैभव सूर्यवंशी ने दिया करारा जवाब, श्रीलंका ए के खिलाफ 29 गेंदों में मचाया तूफान
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ट्राई सीरीज के दौरान भारत ए और श्रीलंका ए के बीच मुकाबले पहले भी काफी चर्चा में रहे थे। खासकर वह मैच जिसमें फैसला सुपर ओवर तक पहुंचा था। उस मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे और भारत ए को हार का सामना करना पड़ा था। मैच के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच कहासुनी भी हुई थी। बताया गया कि उसी दौरान श्रीलंका ए के कुछ खिलाड़ियों ने वैभव पर तंज कसते हुए कहा था कि “ये IPL नहीं है।” युवा बल्लेबाज के लिए यह बात निश्चित रूप से आसान नहीं रही होगी। हालांकि उस समय मामला शांत हो गया, लेकिन लगता है कि वैभव ने उस टिप्पणी को अपने अंदर कहीं संभालकर रखा था।
फाइनल मुकाबले में जब एक बार फिर दोनों टीमें आमने-सामने आईं तो वैभव सूर्यवंशी का अंदाज बिल्कुल अलग नजर आया। शुरुआत से ही उन्होंने आक्रामक रुख अपनाया और श्रीलंका ए के गेंदबाजों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। पहली ही गेंद से उन्होंने साफ कर दिया कि वह इस बार किसी दबाव में नहीं हैं। मैदान के चारों ओर लगाए गए उनके शॉट्स ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। श्रीलंकाई गेंदबाज लगातार लाइन और लेंथ बदलते रहे, लेकिन वैभव के सामने उनकी कोई रणनीति काम नहीं आई।
सबसे ज्यादा मार उस गेंदबाज को पड़ी जिसने सीरीज के शुरुआती मुकाबले में वैभव का विकेट लिया था। मोहम्मद शिराज को युवा बल्लेबाज ने पूरी तरह निशाने पर रखा। आंकड़े बताते हैं कि शिराज की सिर्फ आठ गेंदों पर ही वैभव ने 34 रन बटोर लिए। हालात ऐसे बन गए कि कप्तान को उन्हें गेंदबाजी आक्रमण से हटाना पड़ा। हर चौका और छक्का मानो उस पुराने ताने का जवाब बनता जा रहा था।
वैभव सूर्यवंशी ने अपनी अर्धशतकीय पारी को जिस अंदाज में पूरा किया, उसने रिकॉर्ड बुक में नया अध्याय जोड़ दिया। उन्होंने केवल 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया, जो लिस्ट-ए क्रिकेट का नया विश्व रिकॉर्ड बताया जा रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी तेज रफ्तार से अर्धशतक लगाना किसी भी स्तर पर असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। खास बात यह रही कि रिकॉर्ड बनाने के बाद भी वैभव नहीं रुके। उनका आक्रमण लगातार जारी रहा और कुछ समय के लिए ऐसा लगने लगा कि वह सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं।
दांबुला के मैदान पर मौजूद दर्शकों के लिए यह किसी तूफानी बल्लेबाजी से कम नहीं था। चौकों और छक्कों की बरसात के बीच श्रीलंका ए के खिलाड़ी पूरी तरह दबाव में नजर आए। वैभव ने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए। इस पारी में उन्होंने 10 चौके और 8 शानदार छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 324.13 का रहा, जो अपने आप में उनकी बल्लेबाजी की आक्रामकता को दिखाता है। हालांकि वह शतक से सिर्फ छह रन दूर रह गए, लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने बल्लेबाजी की, उसने उनकी पारी को यादगार बना दिया।
इस विस्फोटक प्रदर्शन का असर पूरी सीरीज के आंकड़ों पर भी दिखाई दिया। फाइनल में लगाए गए आठ छक्कों की बदौलत वैभव सूर्यवंशी ट्राई सीरीज में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 11 छक्के लगाए। दिलचस्प बात यह रही कि कोई दूसरा बल्लेबाज उनके आसपास भी नहीं पहुंच सका। पूरे टूर्नामेंट में दहाई के आंकड़े तक पहुंचने वाले वह अकेले खिलाड़ी रहे।
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी की यह पारी केवल रन बनाने तक सीमित नहीं थी। यह एक युवा खिलाड़ी की मानसिक मजबूती का भी उदाहरण थी। कई बार आलोचना या विरोधी टीम की टिप्पणियां खिलाड़ियों पर दबाव बना देती हैं, लेकिन वैभव ने उसे प्रेरणा में बदल दिया। उन्होंने प्रतिक्रिया शब्दों से नहीं बल्कि अपने प्रदर्शन से दी। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर भी उनकी पारी की जमकर चर्चा हो रही है।
