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चार साल बाद घर में टेस्ट सीरीज जीता वेस्टइंडीज, श्रीलंका को 1-0 से हराया
स्पोर्ट्स डेस्क
एंटीगुआ टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन पहले मैच की बड़ी जीत के दम पर वेस्टइंडीज ने सीरीज अपने नाम की। जॉन कैंपबेल और ब्रैंडन किंग की नाबाद साझेदारी ने आखिरी दिन हार का खतरा भी टाल दिया।
करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद वेस्टइंडीज ने अपने घरेलू मैदान पर टेस्ट सीरीज जीतने का स्वाद चखा है। कैरेबियाई टीम ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में श्रीलंका को 1-0 से हराकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। एंटीगुआ के नॉर्थ साउंड में खेला गया दूसरा और अंतिम टेस्ट ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन पहले टेस्ट में पारी और 217 रन की विशाल जीत ने वेस्टइंडीज को सीरीज का विजेता बना दिया। यह टीम की 2023 के बाद किसी भी टेस्ट सीरीज में पहली जीत भी है, जिससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
दूसरे टेस्ट के पांचवें और अंतिम दिन श्रीलंका ने 92 रन पर दो विकेट से अपनी दूसरी पारी आगे बढ़ाई। टीम का इरादा तेजी से रन बनाकर वेस्टइंडीज को चुनौतीपूर्ण लक्ष्य देने का था और बल्लेबाजों ने उसी अंदाज में शुरुआत भी की। पहले सत्र में श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने तेज रन बटोरे और स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया। दिनेश चांदीमल ने जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए 71 रन बनाए, जबकि कामिंडु मेंडिस ने भी आक्रामक अंदाज में रन जुटाए। दोनों बल्लेबाजों ने रन गति को लगातार ऊंचा रखा और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की।
हालांकि तेजी से रन बनाने के प्रयास में श्रीलंका ने लगातार विकेट भी गंवाए। पहले सत्र के 24 ओवरों में टीम ने 139 रन जोड़ दिए, लेकिन इसी दौरान छह बल्लेबाज पवेलियन भी लौट गए। कामिंडु मेंडिस को जेडेन सील्स ने आउट किया, जबकि कप्तान धनंजय डी सिल्वा कैच देकर चलते बने। दिनेश चांदीमल और कुसल मेंडिस भी बड़ी पारी को और आगे नहीं बढ़ा सके। सोनल दिनुषा दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हो गए। लगातार विकेट गिरने के बावजूद श्रीलंका ने 251 रन पर नौ विकेट के स्कोर पर अपनी दूसरी पारी घोषित कर दी और वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए 302 रन का लक्ष्य रखा।
लंच के बाद लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद संतुलित रही। ओपनर जॉन कैंपबेल और ब्रैंडन किंग ने जल्दबाजी दिखाने के बजाय विकेट बचाने को प्राथमिकता दी। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंका के तेज गेंदबाजों के साथ-साथ अनुभवी स्पिनर प्रभात जयसूर्या का भी धैर्यपूर्वक सामना किया। दोनों ने जोखिम भरे शॉट खेलने से बचते हुए रन गति को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। टी ब्रेक तक वेस्टइंडीज का स्कोर बिना किसी नुकसान के 65 रन हो चुका था और टीम पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में नजर आ रही थी।
आखिरी सत्र में मौसम ने भी कुछ देर के लिए खेल में बाधा डाली। हल्की बारिश के कारण मुकाबला लगभग दस मिनट तक रुका रहा। खेल दोबारा शुरू होने पर वेस्टइंडीज ने बिना विकेट गंवाए 109 रन बना लिए थे। दोनों ओपनरों ने शानदार संयम दिखाया और श्रीलंका को कोई सफलता नहीं मिलने दी। इसके बाद जब परिणाम की संभावना लगभग समाप्त हो गई तो दोनों टीमों के कप्तानों ने आपसी सहमति से मैच ड्रॉ घोषित करने का फैसला किया। इस तरह दूसरा टेस्ट बराबरी पर समाप्त हुआ, जबकि सीरीज का खिताब वेस्टइंडीज के नाम रहा।
मैच के दौरान ब्रैंडन किंग दो बार एलबीडब्ल्यू अपील में फंसे, लेकिन दोनों मौकों पर उन्हें जीवनदान मिला। पहली बार डीआरएस में पता चला कि गेंद स्टंप के ऊपर से निकल रही थी, जबकि दूसरी बार अंपायर्स कॉल के कारण फैसला बल्लेबाज के पक्ष में गया। इन दोनों मौकों का फायदा उठाते हुए किंग ने अपनी पारी संभाली और अंत तक नाबाद लौटे। दूसरी ओर जॉन कैंपबेल ने भी जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए साझेदारी को टूटने नहीं दिया। दोनों की ओपनिंग जोड़ी ने साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य और तकनीक कितनी अहम होती है।
इस सीरीज में वेस्टइंडीज की सफलता का सबसे बड़ा आधार उसकी पहली टेस्ट में मिली एकतरफा जीत रही। पहले मुकाबले में टीम ने श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराया था। उस मैच में बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया था। उसी जीत ने सीरीज में बढ़त दिलाई और दूसरे टेस्ट में ड्रॉ भी वेस्टइंडीज के लिए पर्याप्त साबित हुआ। सीरीज के सबसे बड़े सितारे जस्टिन ग्रीव्स रहे। उन्हें दूसरे टेस्ट में 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। ग्रीव्स ने पहली पारी में शानदार 180 रन की यादगार पारी खेली, जिसने वेस्टइंडीज को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने गेंदबाजी में भी योगदान देते हुए एक विकेट हासिल किया। पूरे सीरीज में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का पुरस्कार भी दिया गया। उन्होंने तीन पारियों में कुल 183 रन बनाए और चार विकेट भी अपने नाम किए।
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चार साल बाद घर में टेस्ट सीरीज जीता वेस्टइंडीज, श्रीलंका को 1-0 से हराया
स्पोर्ट्स डेस्क
करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद वेस्टइंडीज ने अपने घरेलू मैदान पर टेस्ट सीरीज जीतने का स्वाद चखा है। कैरेबियाई टीम ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में श्रीलंका को 1-0 से हराकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। एंटीगुआ के नॉर्थ साउंड में खेला गया दूसरा और अंतिम टेस्ट ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन पहले टेस्ट में पारी और 217 रन की विशाल जीत ने वेस्टइंडीज को सीरीज का विजेता बना दिया। यह टीम की 2023 के बाद किसी भी टेस्ट सीरीज में पहली जीत भी है, जिससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
दूसरे टेस्ट के पांचवें और अंतिम दिन श्रीलंका ने 92 रन पर दो विकेट से अपनी दूसरी पारी आगे बढ़ाई। टीम का इरादा तेजी से रन बनाकर वेस्टइंडीज को चुनौतीपूर्ण लक्ष्य देने का था और बल्लेबाजों ने उसी अंदाज में शुरुआत भी की। पहले सत्र में श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने तेज रन बटोरे और स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया। दिनेश चांदीमल ने जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए 71 रन बनाए, जबकि कामिंडु मेंडिस ने भी आक्रामक अंदाज में रन जुटाए। दोनों बल्लेबाजों ने रन गति को लगातार ऊंचा रखा और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की।
हालांकि तेजी से रन बनाने के प्रयास में श्रीलंका ने लगातार विकेट भी गंवाए। पहले सत्र के 24 ओवरों में टीम ने 139 रन जोड़ दिए, लेकिन इसी दौरान छह बल्लेबाज पवेलियन भी लौट गए। कामिंडु मेंडिस को जेडेन सील्स ने आउट किया, जबकि कप्तान धनंजय डी सिल्वा कैच देकर चलते बने। दिनेश चांदीमल और कुसल मेंडिस भी बड़ी पारी को और आगे नहीं बढ़ा सके। सोनल दिनुषा दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हो गए। लगातार विकेट गिरने के बावजूद श्रीलंका ने 251 रन पर नौ विकेट के स्कोर पर अपनी दूसरी पारी घोषित कर दी और वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए 302 रन का लक्ष्य रखा।
लंच के बाद लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद संतुलित रही। ओपनर जॉन कैंपबेल और ब्रैंडन किंग ने जल्दबाजी दिखाने के बजाय विकेट बचाने को प्राथमिकता दी। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंका के तेज गेंदबाजों के साथ-साथ अनुभवी स्पिनर प्रभात जयसूर्या का भी धैर्यपूर्वक सामना किया। दोनों ने जोखिम भरे शॉट खेलने से बचते हुए रन गति को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। टी ब्रेक तक वेस्टइंडीज का स्कोर बिना किसी नुकसान के 65 रन हो चुका था और टीम पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में नजर आ रही थी।
आखिरी सत्र में मौसम ने भी कुछ देर के लिए खेल में बाधा डाली। हल्की बारिश के कारण मुकाबला लगभग दस मिनट तक रुका रहा। खेल दोबारा शुरू होने पर वेस्टइंडीज ने बिना विकेट गंवाए 109 रन बना लिए थे। दोनों ओपनरों ने शानदार संयम दिखाया और श्रीलंका को कोई सफलता नहीं मिलने दी। इसके बाद जब परिणाम की संभावना लगभग समाप्त हो गई तो दोनों टीमों के कप्तानों ने आपसी सहमति से मैच ड्रॉ घोषित करने का फैसला किया। इस तरह दूसरा टेस्ट बराबरी पर समाप्त हुआ, जबकि सीरीज का खिताब वेस्टइंडीज के नाम रहा।
मैच के दौरान ब्रैंडन किंग दो बार एलबीडब्ल्यू अपील में फंसे, लेकिन दोनों मौकों पर उन्हें जीवनदान मिला। पहली बार डीआरएस में पता चला कि गेंद स्टंप के ऊपर से निकल रही थी, जबकि दूसरी बार अंपायर्स कॉल के कारण फैसला बल्लेबाज के पक्ष में गया। इन दोनों मौकों का फायदा उठाते हुए किंग ने अपनी पारी संभाली और अंत तक नाबाद लौटे। दूसरी ओर जॉन कैंपबेल ने भी जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए साझेदारी को टूटने नहीं दिया। दोनों की ओपनिंग जोड़ी ने साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य और तकनीक कितनी अहम होती है।
इस सीरीज में वेस्टइंडीज की सफलता का सबसे बड़ा आधार उसकी पहली टेस्ट में मिली एकतरफा जीत रही। पहले मुकाबले में टीम ने श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराया था। उस मैच में बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया था। उसी जीत ने सीरीज में बढ़त दिलाई और दूसरे टेस्ट में ड्रॉ भी वेस्टइंडीज के लिए पर्याप्त साबित हुआ। सीरीज के सबसे बड़े सितारे जस्टिन ग्रीव्स रहे। उन्हें दूसरे टेस्ट में 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। ग्रीव्स ने पहली पारी में शानदार 180 रन की यादगार पारी खेली, जिसने वेस्टइंडीज को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने गेंदबाजी में भी योगदान देते हुए एक विकेट हासिल किया। पूरे सीरीज में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का पुरस्कार भी दिया गया। उन्होंने तीन पारियों में कुल 183 रन बनाए और चार विकेट भी अपने नाम किए।
