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विंध्यवासिनी मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर 1504 घी के मनोकामना ज्योत, नहीं जलाया जाता तेल का दीपक
Dhamtari, CG
चैत्र नवरात्रि 2025 पर धमतरी और दुर्ग के माता मंदिरों में मनोकामना ज्योत प्रज्ज्वलित किये गए.
चैत्र नवरात्र पर्व को लेकर पूरे देश भर में धूम है. शक्ति की भक्ति में लोग लीन है. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में विराजित स्वयंभू मां विंध्यवासिनी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गोधूलि बेला में ज्योत प्रज्वलित किया गया. 1504 घी के ज्योत प्रज्वलित किए गए. अपनी-अपनी मनोकामना को लेकर स्थानीय समेत देश-विदेश से भी देवी भक्त ज्योति कलश प्रज्वलित करवाए हैं.
विंध्यवासिनी मंदिर धमतरी में नवरात्र: इस बार नवरात्र में विंध्यवासिनी माता का नया स्वरूप लोगों का तो मन मोह ही रहा है तो वही मंदिर भी खास तौर पर नए रूप में नजर आ रहा है. भक्तों का कहना है कि इस बार विंध्यवासिनी मंदिर में आकर उन्हें खास तरह के सजावट और मंदिर का नया स्वरूप देखकर काफी अच्छा लग रहा है.
विंध्यवासिनी मां के दर्शन करने भक्तों की भीड़: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन रविवार को देवी मंदिरों में मां शैलपुत्री की पूजा हुई. नगर की आराध्य देवी बिलई माता विंध्यवासिनी मंदिर में सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ नजर आई. इस साल बिलई माता मंदिर में भक्तों ने 15 सौ 4 मनोकामना ज्योत जलाए हैं. मां विंध्यवासिनी मंदिर में नवरात्रि का खास महत्व है. नवरात्रि के दौरान दूर-दराज से श्रद्धालु देवी मां के दर्शन के लिए आते हैं. साथ ही नौ दिनों तक ज्योति प्रज्जवलित करते हैं. खास बात ये है कि मां विंध्यवासिनी मंदिर में सिर्फ घी के ज्योत जलाए जाते हैं. मान्यता है कि मंदिर में मांगी गई हर मुराद पूरी जरूर होती है.

मंदिर देखकर बहुत अच्छा लग रहा है. बचपन से देख रहीं हूं. इस बार मंदिर और मां के दर्शन कर बहुत अच्छा लग रहा है.- रोशनी साहू, भक्त
हर साल ज्योत प्रज्ज्वलित किए जाते हैं. यहां खुद ही अपना मनोकामना ज्योत जला सकते हैं. यहां आने के बाद एक अलग ही पॉजिटिव एनर्जी महसूस होती है. -नवीन सोनकर, भक्त
चैत्र नवरात्र पर इस बार 1500 से ज्यादा घी के मनोकामना ज्योत जलाए गए. जवारा बोया जाता है. नौ दिनों तक माता की विशेष पूजा की जा रही है. -आनंद पवार, मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष
दुर्ग भिलाई में नववर्ष: इधर दुर्ग जिले के खुर्सीपार स्थित श्री राम चौक पर बोल बम सेवा एवं कल्याण समिति ने 51000 दिए प्रज्ज्वलित करवाएं. इस भव्य आयोजन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए और महा आरती का आयोजन किया गया. इस अवसर पर भव्य प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़े हर्षोल्लास से हिस्सा लिया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख कौशलेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित हुए.
नवरात्रि पर 51000 दिए प्रज्ज्वलित: बोल बम सेवा एवं कल्याण समिति के प्रमुख दया सिंह ने इस अवसर पर कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हिंदू नव वर्ष को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. समिति का मुख्य उद्देश्य यह है कि हिंदू समाज अपने धर्म और संस्कृति को आत्मसात करें और सभी मिलकर भाईचारे को मजबूत करें. 51000 दीपों की जगमगाहट से पूरा क्षेत्र रोशन हो गया और माहौल भक्तिमय हो उठा.

लोकसभा सांसद विजय बघेल ने इस अवसर पर कहा कि हिंदू नव वर्ष को धूमधाम से मनाया जाना हमारे सनातन धर्म की समृद्धि और एकता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने हृदय में सनातन धर्म के मूल्यों को आत्मसात कर लें, तो भारत एक बार फिर से विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर होगा. 2047 तक भारत विश्व में पुनः एक शीर्ष स्थान प्राप्त करेगा और हिंदू संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को पूरी दुनिया स्वीकार करेगी.
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विंध्यवासिनी मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर 1504 घी के मनोकामना ज्योत, नहीं जलाया जाता तेल का दीपक
Dhamtari, CG
चैत्र नवरात्र पर्व को लेकर पूरे देश भर में धूम है. शक्ति की भक्ति में लोग लीन है. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में विराजित स्वयंभू मां विंध्यवासिनी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गोधूलि बेला में ज्योत प्रज्वलित किया गया. 1504 घी के ज्योत प्रज्वलित किए गए. अपनी-अपनी मनोकामना को लेकर स्थानीय समेत देश-विदेश से भी देवी भक्त ज्योति कलश प्रज्वलित करवाए हैं.
विंध्यवासिनी मंदिर धमतरी में नवरात्र: इस बार नवरात्र में विंध्यवासिनी माता का नया स्वरूप लोगों का तो मन मोह ही रहा है तो वही मंदिर भी खास तौर पर नए रूप में नजर आ रहा है. भक्तों का कहना है कि इस बार विंध्यवासिनी मंदिर में आकर उन्हें खास तरह के सजावट और मंदिर का नया स्वरूप देखकर काफी अच्छा लग रहा है.
विंध्यवासिनी मां के दर्शन करने भक्तों की भीड़: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन रविवार को देवी मंदिरों में मां शैलपुत्री की पूजा हुई. नगर की आराध्य देवी बिलई माता विंध्यवासिनी मंदिर में सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ नजर आई. इस साल बिलई माता मंदिर में भक्तों ने 15 सौ 4 मनोकामना ज्योत जलाए हैं. मां विंध्यवासिनी मंदिर में नवरात्रि का खास महत्व है. नवरात्रि के दौरान दूर-दराज से श्रद्धालु देवी मां के दर्शन के लिए आते हैं. साथ ही नौ दिनों तक ज्योति प्रज्जवलित करते हैं. खास बात ये है कि मां विंध्यवासिनी मंदिर में सिर्फ घी के ज्योत जलाए जाते हैं. मान्यता है कि मंदिर में मांगी गई हर मुराद पूरी जरूर होती है.

मंदिर देखकर बहुत अच्छा लग रहा है. बचपन से देख रहीं हूं. इस बार मंदिर और मां के दर्शन कर बहुत अच्छा लग रहा है.- रोशनी साहू, भक्त
हर साल ज्योत प्रज्ज्वलित किए जाते हैं. यहां खुद ही अपना मनोकामना ज्योत जला सकते हैं. यहां आने के बाद एक अलग ही पॉजिटिव एनर्जी महसूस होती है. -नवीन सोनकर, भक्त
चैत्र नवरात्र पर इस बार 1500 से ज्यादा घी के मनोकामना ज्योत जलाए गए. जवारा बोया जाता है. नौ दिनों तक माता की विशेष पूजा की जा रही है. -आनंद पवार, मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष
दुर्ग भिलाई में नववर्ष: इधर दुर्ग जिले के खुर्सीपार स्थित श्री राम चौक पर बोल बम सेवा एवं कल्याण समिति ने 51000 दिए प्रज्ज्वलित करवाएं. इस भव्य आयोजन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए और महा आरती का आयोजन किया गया. इस अवसर पर भव्य प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़े हर्षोल्लास से हिस्सा लिया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख कौशलेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित हुए.
नवरात्रि पर 51000 दिए प्रज्ज्वलित: बोल बम सेवा एवं कल्याण समिति के प्रमुख दया सिंह ने इस अवसर पर कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हिंदू नव वर्ष को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. समिति का मुख्य उद्देश्य यह है कि हिंदू समाज अपने धर्म और संस्कृति को आत्मसात करें और सभी मिलकर भाईचारे को मजबूत करें. 51000 दीपों की जगमगाहट से पूरा क्षेत्र रोशन हो गया और माहौल भक्तिमय हो उठा.

लोकसभा सांसद विजय बघेल ने इस अवसर पर कहा कि हिंदू नव वर्ष को धूमधाम से मनाया जाना हमारे सनातन धर्म की समृद्धि और एकता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने हृदय में सनातन धर्म के मूल्यों को आत्मसात कर लें, तो भारत एक बार फिर से विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर होगा. 2047 तक भारत विश्व में पुनः एक शीर्ष स्थान प्राप्त करेगा और हिंदू संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को पूरी दुनिया स्वीकार करेगी.
