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शराब घोटाला मामला: भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को हाईकोर्ट से जमानत, DGP को फटकार—‘चुनिंदा कार्रवाई’ पर सवाल
रायपुर (छ.ग.)
ED-EOW केस में बड़ी राहत, कोर्ट ने कहा—वारंट के बावजूद सह-आरोपी को न पकड़ना जांच की पारदर्शिता पर धब्बा
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। इस फैसले के साथ ही अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कानून का “चुनिंदा इस्तेमाल” जांच की निष्पक्षता को कमजोर करता है।
क्या है मामला और कब मिली राहत
चैतन्य बघेल जुलाई 2025 से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उन्हें पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत गिरफ्तार किया था, जबकि बाद में छत्तीसगढ़ एंटी-करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) ने भ्रष्टाचार के मामले में उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की। जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न किए जाने पर तीखी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जब बंसल के खिलाफ स्थायी वारंट जारी था और अभियोजन पक्ष उसके बयान पर भरोसा कर रहा है, तो उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे “कानून का गंभीर उल्लंघन” बताते हुए कहा कि आरोपी को खुलेआम घूमने देना जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
हाईकोर्ट ने DGP को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
जांच एजेंसियों के आरोप
ED के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच हुए शराब घोटाले में सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपये के लेन-देन को संभाला। ACB/EOW का कहना है कि उन्हें इस घोटाले से 200 से 250 करोड़ रुपये का हिस्सा मिला, जबकि कुल घोटाले की राशि 3,200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
बचाव पक्ष की दलील
चैतन्य बघेल के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि गिरफ्तारी केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर की गई, जबकि चैतन्य को कभी समन तक नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पूरा सहयोग किया गया, डिजिटल उपकरण जब्त किए गए और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, इसके बावजूद सीधे गिरफ्तारी की गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” फैसले के बाद उनके समर्थकों ने बिलासपुर और रायपुर में पटाखे फोड़कर खुशी जताई। वहीं, मामले ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।
हालांकि जमानत से चैतन्य बघेल को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन ED और EOW की जांच जारी रहेगी। कोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब जांच की निष्पक्षता और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। इस फैसले के साथ ही अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कानून का “चुनिंदा इस्तेमाल” जांच की निष्पक्षता को कमजोर करता है।
क्या है मामला और कब मिली राहत
चैतन्य बघेल जुलाई 2025 से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उन्हें पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत गिरफ्तार किया था, जबकि बाद में छत्तीसगढ़ एंटी-करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) ने भ्रष्टाचार के मामले में उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की। जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न किए जाने पर तीखी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जब बंसल के खिलाफ स्थायी वारंट जारी था और अभियोजन पक्ष उसके बयान पर भरोसा कर रहा है, तो उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे “कानून का गंभीर उल्लंघन” बताते हुए कहा कि आरोपी को खुलेआम घूमने देना जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
हाईकोर्ट ने DGP को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
जांच एजेंसियों के आरोप
ED के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच हुए शराब घोटाले में सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपये के लेन-देन को संभाला। ACB/EOW का कहना है कि उन्हें इस घोटाले से 200 से 250 करोड़ रुपये का हिस्सा मिला, जबकि कुल घोटाले की राशि 3,200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
बचाव पक्ष की दलील
चैतन्य बघेल के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि गिरफ्तारी केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर की गई, जबकि चैतन्य को कभी समन तक नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पूरा सहयोग किया गया, डिजिटल उपकरण जब्त किए गए और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, इसके बावजूद सीधे गिरफ्तारी की गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” फैसले के बाद उनके समर्थकों ने बिलासपुर और रायपुर में पटाखे फोड़कर खुशी जताई। वहीं, मामले ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।
हालांकि जमानत से चैतन्य बघेल को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन ED और EOW की जांच जारी रहेगी। कोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब जांच की निष्पक्षता और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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