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छत्तीसगढ़ में मेडिकल PG में MBBS छात्रों को 50% मेरिट आधारित आरक्षण: हाईकोर्ट ने अपने पुराने आदेश में किया संशोधन
छत्तीसगढ़
हाईकोर्ट के नए आदेश से संस्थागत कोटे के तहत MBBS छात्रों को PG में आरक्षण वैध, राज्य सरकार करेगी नियमों का पालन
बिलासपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट (PG) एडमिशन को लेकर अपने पहले के आदेश में बड़ा संशोधन किया है। अब प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों को संस्थागत कोटे के तहत मेरिट के आधार पर 50 प्रतिशत सीटों का आरक्षण देना वैधानिक रूप से मान्य होगा।
क्या हुआ था मामला
इससे पहले शुभम विहार निवासी डॉ. समृद्धि दुबे ने छत्तीसगढ़ मेडिकल PG प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(a) और 11(b) को चुनौती दी थी। इन नियमों के तहत MBBS करने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जा रही थी। 20 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिससे छात्रों में असमंजस और काउंसलिंग में गड़बड़ी उत्पन्न हो गई।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश:
राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। 18 दिसंबर 2025 को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट में जाकर संस्थागत कोटे के लिए उचित सीटें तय करने के लिए स्पष्टीकरण मांगे। इसी के आधार पर राज्य शासन ने हाईकोर्ट में आवेदन किया।
हाईकोर्ट का नया आदेश
डिवीजन बेंच के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु ने अपने पिछले आदेश की उस लाइन को हटा दिया जिसमें राज्य सरकार को उम्मीदवारों के बीच अंतर करने से रोका गया था। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि PG सीटों पर निवास आधारित भेदभाव गलत है, लेकिन MBBS करने वाले छात्रों को संस्थागत प्राथमिकता देना सीमित रूप से वैध है।
सरकार का स्पष्टीकरण
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने बताया कि अब केवल संस्थान आधारित वरीयता लागू होगी। उन्होंने यह भी कहा कि MBBS के लगभग 50% छात्र ऑल इंडिया कोटे से आते हैं, इसलिए निवास आधारित भेदभाव नहीं हो रहा। 1 दिसंबर 2025 को नियमों में संशोधन कर 50% सीटें संस्थागत कोटे और 50% ओपन मेरिट के लिए निर्धारित की जा चुकी हैं।
छत्तीसगढ़ी छात्रों को मिली राहत
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि नियमों को तुरंत लागू किया जाए और MBBS छात्रों का हित सुनिश्चित किया जाए।
इस आदेश के बाद राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के तन्वी बहल केस के फैसले के अनुरूप संस्थागत आरक्षण लागू कर सकेगी। हाईकोर्ट के नए आदेश से PG काउंसलिंग पर पहले लगी रोक भी प्रभावी रूप से समाप्त होने की संभावना है।
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