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बोरे-बासी पर खर्च हुए 9 करोड़: कांग्रेस सरकार में एक श्रमिक की थाली ₹32 की, लेकिन तामझाम में गया ₹1795
Raipur, CG
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए एक बड़े खर्च को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
पिछली सरकार द्वारा 1 मई 2023 को आयोजित 'बोरे-बासी तिहार' पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ये आयोजन श्रमिकों के लिए था, जिसमें 50 हजार लोगों को बोरे-बासी परोसी गई। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि एक व्यक्ति पर कुल खर्च ₹1795 बैठा, जबकि भोजन पर खर्च मात्र ₹32 था। बाकी पैसा प्रचार, पंडाल, पानी, टोपी और व्यवस्थाओं पर खर्च हो गया।
यह जानकारी विधानसभा में बीजेपी विधायक धर्मजीत सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आई, जिसका लिखित उत्तर वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने दिया।
आयोजन का उद्देश्य और हकीकत
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर ‘श्रमिक सम्मेलन’ के रूप में आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और जागरूक करना था। आयोजन की जिम्मेदारी प्रदेश के सभी जिला श्रम कार्यालयों को दी गई थी। हालांकि, लक्ष्य 1.30 लाख श्रमिकों को बुलाने का था, लेकिन वास्तव में शामिल हुए सिर्फ 50 हजार।
विधानसभा में दिए गए जवाब में बताया गया कि इस आयोजन पर कुल ₹8,97,98,621 खर्च हुए। आयोजन में शामिल लोगों के लिए 35 हजार कुर्सियां लगाई गईं और 1.10 करोड़ रुपये में छह विशाल डोम बनाए गए।
अजीब-अजीब खर्च: पानी पर ₹27 लाख, टोपी पर ₹80 लाख
इस कार्यक्रम से जुड़े खर्चों में कई अजीबोगरीब आंकड़े सामने आए हैं।
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सिर्फ पानी की बोतलों पर ₹27 लाख खर्च किए गए।
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टोपी और अन्य प्रचार सामग्री पर ₹80 लाख की राशि गई।
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सबसे ज्यादा खर्च रायपुर जिले में हुआ, जहां अकेले ₹8.5 करोड़ खर्च किए गए, जबकि बाकी जिलों में मिलाकर सिर्फ ₹47 लाख।
आयोजन बना राजनीतिक बहस का मुद्दा
कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्री-विधायक और कांग्रेस नेता शामिल हुए थे। अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। बीजेपी इस आयोजन को श्रमिकों के नाम पर ‘सरकारी पैसा बर्बाद करने’ का उदाहरण बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे ‘सामाजिक जागरूकता का प्रयास’ बता रही है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोजन की सभी जानकारियां जिलों के श्रम कार्यालयों में उपलब्ध हैं और आयोजन का उद्देश्य ‘योजनाओं की जानकारी और श्रमिक पंजीयन को बढ़ावा देना’ था।
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बोरे-बासी पर खर्च हुए 9 करोड़: कांग्रेस सरकार में एक श्रमिक की थाली ₹32 की, लेकिन तामझाम में गया ₹1795
Raipur, CG
पिछली सरकार द्वारा 1 मई 2023 को आयोजित 'बोरे-बासी तिहार' पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ये आयोजन श्रमिकों के लिए था, जिसमें 50 हजार लोगों को बोरे-बासी परोसी गई। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि एक व्यक्ति पर कुल खर्च ₹1795 बैठा, जबकि भोजन पर खर्च मात्र ₹32 था। बाकी पैसा प्रचार, पंडाल, पानी, टोपी और व्यवस्थाओं पर खर्च हो गया।
यह जानकारी विधानसभा में बीजेपी विधायक धर्मजीत सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आई, जिसका लिखित उत्तर वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने दिया।
आयोजन का उद्देश्य और हकीकत
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर ‘श्रमिक सम्मेलन’ के रूप में आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और जागरूक करना था। आयोजन की जिम्मेदारी प्रदेश के सभी जिला श्रम कार्यालयों को दी गई थी। हालांकि, लक्ष्य 1.30 लाख श्रमिकों को बुलाने का था, लेकिन वास्तव में शामिल हुए सिर्फ 50 हजार।
विधानसभा में दिए गए जवाब में बताया गया कि इस आयोजन पर कुल ₹8,97,98,621 खर्च हुए। आयोजन में शामिल लोगों के लिए 35 हजार कुर्सियां लगाई गईं और 1.10 करोड़ रुपये में छह विशाल डोम बनाए गए।
अजीब-अजीब खर्च: पानी पर ₹27 लाख, टोपी पर ₹80 लाख
इस कार्यक्रम से जुड़े खर्चों में कई अजीबोगरीब आंकड़े सामने आए हैं।
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सिर्फ पानी की बोतलों पर ₹27 लाख खर्च किए गए।
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टोपी और अन्य प्रचार सामग्री पर ₹80 लाख की राशि गई।
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सबसे ज्यादा खर्च रायपुर जिले में हुआ, जहां अकेले ₹8.5 करोड़ खर्च किए गए, जबकि बाकी जिलों में मिलाकर सिर्फ ₹47 लाख।
आयोजन बना राजनीतिक बहस का मुद्दा
कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्री-विधायक और कांग्रेस नेता शामिल हुए थे। अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। बीजेपी इस आयोजन को श्रमिकों के नाम पर ‘सरकारी पैसा बर्बाद करने’ का उदाहरण बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे ‘सामाजिक जागरूकता का प्रयास’ बता रही है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोजन की सभी जानकारियां जिलों के श्रम कार्यालयों में उपलब्ध हैं और आयोजन का उद्देश्य ‘योजनाओं की जानकारी और श्रमिक पंजीयन को बढ़ावा देना’ था।
