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एक डीजल की शीशी बनी मौत की वजह, कुम्हारी आगकांड में जांच रिपोर्ट ने खोले कई राज
दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)
दुर्ग के कुम्हारी अग्निकांड जांच में खुलासा हुआ कि गैस रिसाव और सिलेंडर ब्लास्ट से 4 लोगों की मौत हुई। डीजल की शीशी से आग तेजी से फैली।
12 मई को दुर्ग जिले के कुम्हारी इलाके के खपरी गांव में हुए भयानक अग्निकांड की जांच रिपोर्ट के बाद इस हादसे के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुरुआत में यह आशंका जताई गई थी कि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी थी, लेकिन अब प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ है कि घर में रखे गैस सिलेंडर के रेगुलेटर से गैस लीक हो रही थी। गैस कमरे में फैल गई और किसी चिंगारी के कारण अचानक आग लग गई। देखते ही देखते झोपड़ी आग की लपटों में घिर गई। रिपोर्ट के मुताबिक, महज ढाई मिनट के अंदर पूरा घर जलने लगा और चार लोगों की मौत हो गई। बताया गया है कि घर में रखी एक छोटी डीजल की बोतल ने आग को और भयानक बना दिया था।
शुरूआती जानकारी के अनुसार, अनिल वैष्णव ने उसी दिन सुबह गैस सिलेंडर भरवाकर घर लाया था। उनका परिवार कई दिनों से चूल्हे पर खाना बना रहा था क्योंकि घर में गैस खत्म हो गई थी। सिलेंडर को घर के अंदर रखने के कुछ समय बाद ही रेगुलेटर से गैस रिसने लगी। जांच टीम का मानना है कि गैस पूरे कमरे में फैल चुकी थी और इसी दौरान किसी कारणवश चिंगारी आई। फिर आग इतनी तेजी से फैल गई कि अंदर मौजूद लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। सिलेंडर के विस्फोट से स्थिति और भी बिगड़ गई। आसपास के लोगों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन लपटें बहुत तेज थीं। घटना पास के सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई महत्वपूर्ण सबूत मौके पर ही नष्ट हो गए। राख के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी बाकी है।
इस हादसे में अनिल वैष्णव, उनकी बेटियां लक्ष्मी और चांदनी, और दो साल की मासूम गोपिका की भी जलकर मौत हो गई थी। गोपिका कुछ महीने पहले ही अपनी नानी के घर आई थी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि बच्ची की आंखों में सफेद दाग की समस्या थी, जिसका इलाज रायपुर एम्स में होना था। उसके पिता नंदकिशोर आर्थिक तंगी के बावजूद उसकी चिकित्सा कराने की कोशिश कर रहे थे। हादसे वाले दिन भी वह वेतन लेने रायपुर गया था ताकि बेटी का इलाज करवा सके। वहीं, जांच टीम ने बिजली विभाग से भी जानकारी जुटाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 मई से 12 मई के बीच इलाके में बिजली के खंभों से चिंगारी निकलने या शॉर्ट सर्किट की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। मौके पर मिले बिजली के उपकरण भी सामान्य हालत में पाए गए। तहसीलदार रवि विश्वकर्मा की अध्यक्षता में गठित टीम ने आसपास के लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए। पुलिस जांच में किसी विवाद या आपराधिक एंगल की बात सामने नहीं आई है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा है कि अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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एक डीजल की शीशी बनी मौत की वजह, कुम्हारी आगकांड में जांच रिपोर्ट ने खोले कई राज
दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)
12 मई को दुर्ग जिले के कुम्हारी इलाके के खपरी गांव में हुए भयानक अग्निकांड की जांच रिपोर्ट के बाद इस हादसे के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुरुआत में यह आशंका जताई गई थी कि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी थी, लेकिन अब प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ है कि घर में रखे गैस सिलेंडर के रेगुलेटर से गैस लीक हो रही थी। गैस कमरे में फैल गई और किसी चिंगारी के कारण अचानक आग लग गई। देखते ही देखते झोपड़ी आग की लपटों में घिर गई। रिपोर्ट के मुताबिक, महज ढाई मिनट के अंदर पूरा घर जलने लगा और चार लोगों की मौत हो गई। बताया गया है कि घर में रखी एक छोटी डीजल की बोतल ने आग को और भयानक बना दिया था।
शुरूआती जानकारी के अनुसार, अनिल वैष्णव ने उसी दिन सुबह गैस सिलेंडर भरवाकर घर लाया था। उनका परिवार कई दिनों से चूल्हे पर खाना बना रहा था क्योंकि घर में गैस खत्म हो गई थी। सिलेंडर को घर के अंदर रखने के कुछ समय बाद ही रेगुलेटर से गैस रिसने लगी। जांच टीम का मानना है कि गैस पूरे कमरे में फैल चुकी थी और इसी दौरान किसी कारणवश चिंगारी आई। फिर आग इतनी तेजी से फैल गई कि अंदर मौजूद लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। सिलेंडर के विस्फोट से स्थिति और भी बिगड़ गई। आसपास के लोगों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन लपटें बहुत तेज थीं। घटना पास के सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई महत्वपूर्ण सबूत मौके पर ही नष्ट हो गए। राख के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी बाकी है।
इस हादसे में अनिल वैष्णव, उनकी बेटियां लक्ष्मी और चांदनी, और दो साल की मासूम गोपिका की भी जलकर मौत हो गई थी। गोपिका कुछ महीने पहले ही अपनी नानी के घर आई थी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि बच्ची की आंखों में सफेद दाग की समस्या थी, जिसका इलाज रायपुर एम्स में होना था। उसके पिता नंदकिशोर आर्थिक तंगी के बावजूद उसकी चिकित्सा कराने की कोशिश कर रहे थे। हादसे वाले दिन भी वह वेतन लेने रायपुर गया था ताकि बेटी का इलाज करवा सके। वहीं, जांच टीम ने बिजली विभाग से भी जानकारी जुटाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 मई से 12 मई के बीच इलाके में बिजली के खंभों से चिंगारी निकलने या शॉर्ट सर्किट की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। मौके पर मिले बिजली के उपकरण भी सामान्य हालत में पाए गए। तहसीलदार रवि विश्वकर्मा की अध्यक्षता में गठित टीम ने आसपास के लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए। पुलिस जांच में किसी विवाद या आपराधिक एंगल की बात सामने नहीं आई है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा है कि अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
