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कॉलेज फ्रेंड से किया दुष्कर्म, फिर शादी से कर दिया इनकार, कृषि अधिकारी को हुई उम्रकैद
रायपुर/बालोद (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ में कृषि अधिकारी देवनारायण साहू को रेप और एससी-एसटी एक्ट केस में उम्रकैद मिली। कोर्ट ने शादी का झांसा देकर शोषण का दोषी माना।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के रहने वाले ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को रेप और एससी-एसटी एक्ट के मामले में रायपुर की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला कॉलेज की दोस्ती, लंबे रिश्ते और शादी के झांसे में शारीरिक शोषण से जुड़ा है। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने पीड़िता से संबंध बनाते समय शादी का भरोसा दिया, लेकिन सरकारी नौकरी लगते ही जाति का हवाला देकर शादी से इनकार कर दिया। 2 मई को सुनाए गए फैसले में अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को उम्रकैद के साथ दूसरी धाराओं में भी सजा दी है।
सरकारी वकील उमाशंकर वर्मा के मुताबिक पीड़िता बिलासपुर जिले की रहने वाली है और जगदलपुर के एग्रीकल्चर कॉलेज में आरोपी की सहपाठी थी। बाद में दोनों रायपुर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान फिर करीब आए। पीड़िता ने अदालत को बताया कि शुरुआत में उसने रिश्ते से इनकार किया था, क्योंकि दोनों की जाति अलग थी और उसे शादी की उम्मीद नहीं थी। बताया जा रहा है कि आरोपी ने तब भरोसा दिलाया कि नौकरी लगने के बाद वह शादी करेगा। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार फरवरी 2021 में आरोपी ने पीड़िता को रायपुर के धरमपुरा स्थित अपने किराए के मकान में बुलाया और शादी का भरोसा देकर पहली बार शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद 2023 और 2024 के दौरान भी वह लगातार शादी का वादा कर संबंध बनाता रहा।
मामले में मोड़ तब आया जब 2024 में देवनारायण साहू की सरकारी नौकरी लग गई। पीड़िता के मुताबिक नौकरी मिलने के बाद आरोपी का रवैया बदल गया। वह उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने लगा और ‘नीची जाति की सतनामी’ कहकर शादी से बचने लगा। आरोप है कि नवंबर 2025 में आरोपी ने उसे मानपुर बुलाया और वहां भी शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। कुछ दिन बाद 4 दिसंबर 2025 को रायपुर बुलाकर साफ कह दिया कि वह उससे शादी नहीं करेगा, क्योंकि उसके समाज में सतनामी लड़की से शादी नहीं होती। इतना ही नहीं, उसने दूसरी लड़की से शादी करने की बात भी कही। इसके बाद पीड़िता ने मामला दर्ज कराया।
अदालत में पीड़िता की मां और भाई ने भी उसके बयान का समर्थन किया। दोनों ने कहा कि युवती ने उन्हें आरोपी की ओर से शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और बाद में जाति के नाम पर शादी से इनकार करने की बात बताई थी। मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर ने भी अदालत में बताया कि पीड़िता ने लंबे समय तक शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए जाने की बात कही थी। अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोपी शुरू से पीड़िता की जाति जानता था, इसके बावजूद उसने शादी का झूठा भरोसा देकर उसका शोषण किया। विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने आरोपी को एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) में उम्रकैद, बीएनएस की धारा 64(2)(एम) और धारा 69 में 10-10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही 6 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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कॉलेज फ्रेंड से किया दुष्कर्म, फिर शादी से कर दिया इनकार, कृषि अधिकारी को हुई उम्रकैद
रायपुर/बालोद (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के रहने वाले ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को रेप और एससी-एसटी एक्ट के मामले में रायपुर की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला कॉलेज की दोस्ती, लंबे रिश्ते और शादी के झांसे में शारीरिक शोषण से जुड़ा है। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने पीड़िता से संबंध बनाते समय शादी का भरोसा दिया, लेकिन सरकारी नौकरी लगते ही जाति का हवाला देकर शादी से इनकार कर दिया। 2 मई को सुनाए गए फैसले में अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को उम्रकैद के साथ दूसरी धाराओं में भी सजा दी है।
सरकारी वकील उमाशंकर वर्मा के मुताबिक पीड़िता बिलासपुर जिले की रहने वाली है और जगदलपुर के एग्रीकल्चर कॉलेज में आरोपी की सहपाठी थी। बाद में दोनों रायपुर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान फिर करीब आए। पीड़िता ने अदालत को बताया कि शुरुआत में उसने रिश्ते से इनकार किया था, क्योंकि दोनों की जाति अलग थी और उसे शादी की उम्मीद नहीं थी। बताया जा रहा है कि आरोपी ने तब भरोसा दिलाया कि नौकरी लगने के बाद वह शादी करेगा। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार फरवरी 2021 में आरोपी ने पीड़िता को रायपुर के धरमपुरा स्थित अपने किराए के मकान में बुलाया और शादी का भरोसा देकर पहली बार शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद 2023 और 2024 के दौरान भी वह लगातार शादी का वादा कर संबंध बनाता रहा।
मामले में मोड़ तब आया जब 2024 में देवनारायण साहू की सरकारी नौकरी लग गई। पीड़िता के मुताबिक नौकरी मिलने के बाद आरोपी का रवैया बदल गया। वह उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने लगा और ‘नीची जाति की सतनामी’ कहकर शादी से बचने लगा। आरोप है कि नवंबर 2025 में आरोपी ने उसे मानपुर बुलाया और वहां भी शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। कुछ दिन बाद 4 दिसंबर 2025 को रायपुर बुलाकर साफ कह दिया कि वह उससे शादी नहीं करेगा, क्योंकि उसके समाज में सतनामी लड़की से शादी नहीं होती। इतना ही नहीं, उसने दूसरी लड़की से शादी करने की बात भी कही। इसके बाद पीड़िता ने मामला दर्ज कराया।
अदालत में पीड़िता की मां और भाई ने भी उसके बयान का समर्थन किया। दोनों ने कहा कि युवती ने उन्हें आरोपी की ओर से शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और बाद में जाति के नाम पर शादी से इनकार करने की बात बताई थी। मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर ने भी अदालत में बताया कि पीड़िता ने लंबे समय तक शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए जाने की बात कही थी। अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोपी शुरू से पीड़िता की जाति जानता था, इसके बावजूद उसने शादी का झूठा भरोसा देकर उसका शोषण किया। विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने आरोपी को एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) में उम्रकैद, बीएनएस की धारा 64(2)(एम) और धारा 69 में 10-10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही 6 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
