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बड़े नक्सल लीडर्स के सेफ जोन में घुसेंगे अमित शाह! जानें कितना खतरनाक है दो स्टेट के बॉर्डर का ये इलाका
CG
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज सोमवार को नक्सलियों के बड़े लीडर के सेफ जोन घुसेंगे. आइए जानते हैं दो स्टेट के बॉर्डर का ये इलाका कितना खतरनाक है?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं. वे कल रविवार से ही बस्तर में रुके हुए हैं. आज सोमवार को नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों में घुसने का कार्यक्रम तय हुआ है. आइए जानते हैं इस गांव में उनके पहुंचने का कार्यक्रम लगभग तय है.
अमित शाह के बस्तर दौरे पर पूरे संभागभर में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान मुस्तैद हैं. रविवार को वे जगदलपुर में ही थे. आज दूसरे दिन का कार्यक्रम बड़े नक्सल लीडर्स के सबसे ज़्यादा सेफ जोन में खुले सुरक्षाबलों के कैंप में जाकर जवानों और इलाके के ग्रामीणों से बातचीत करने का है.सुरक्षागत कारणों से प्रशासन ने उनके इस कार्यक्रम का खुलासा नहीं किया है. लेकिन एनडीटीवी को खबर मिली है कि अमित शाह नक्सलियों के कोर इलाके गुंडम में जा सकते हैं. ये इलाका नक्सलियों की तेलंगाना स्टेट कमेटी के सेकेट्री दामोदर , डीकेएसजेडसी के नेता विकास, सुजाता सहित बड़े नक्सल लीडर्स का सबसे सेफ जोन है.
तैयारियां पूरी
दरअसल बीजापुर-सुकमा जिले के बॉर्डर पर पूवर्ती , जिड़पल्ली 1 , दारावरम और गुंडम में अमित शाह के पहुंचने की चर्चा जोरों पर थी. इनमें से गुंडम गांव में खुले सुरक्षाबलों के कैंप में प्रशासन ने अमित शाह के पहुंचने की तैयारी की है. इस गांव और आसपास के इलाके को जवानों ने घेरकर रखा है. पूरा इलाका छावनी में तब्दील है.
बेहद खतरनाक इलाका है गुंडम
बीजापुर जिले का गुंडम और इसके आसपास का इलाका नक्सलियों का सबसे बड़ा सेफ जोन है. यहां दो स्टेट के नक्सलियों का डेरा होता है. ये इलाका नक्सलियों की बटालियन, डीकेएसजेडसी के बड़े नताओं , प्लाटून नंबर 9 और 10 पामेड़ और जगरगुंडा एरिया कमेटी का है. इस इलाके में तेलंगाना स्टेट कमेटी के सेकेट्री दामोदर भी सक्रिय है. यहां सेंट्रल कमेटी के नक्सली जुटकर जवानों के खिलाफ साजिश रचते हैं. 3 अगस्त 2021 को गुंडम से 15 किमी की दूरी पर कोमटपल्ली नक्सलियों ने शहीदी सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया था. इसमें 500-600 की संख्या में नक्सली जुटे थे. 10000 ग्रामीणों की भीड़ भी यहां थी. इसी गांव से 5-6 किमी दूर टेकलगुडम में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर अटैक किया था. जिसमें सीआरपीएफ के 21 जवानों की शहादत हुई थी. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये इलाका कितना खतरनाक है. इन इलाकों में सुरक्षाबलों के कैंप को खोला गया है.
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बड़े नक्सल लीडर्स के सेफ जोन में घुसेंगे अमित शाह! जानें कितना खतरनाक है दो स्टेट के बॉर्डर का ये इलाका
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं. वे कल रविवार से ही बस्तर में रुके हुए हैं. आज सोमवार को नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों में घुसने का कार्यक्रम तय हुआ है. आइए जानते हैं इस गांव में उनके पहुंचने का कार्यक्रम लगभग तय है.
अमित शाह के बस्तर दौरे पर पूरे संभागभर में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान मुस्तैद हैं. रविवार को वे जगदलपुर में ही थे. आज दूसरे दिन का कार्यक्रम बड़े नक्सल लीडर्स के सबसे ज़्यादा सेफ जोन में खुले सुरक्षाबलों के कैंप में जाकर जवानों और इलाके के ग्रामीणों से बातचीत करने का है.सुरक्षागत कारणों से प्रशासन ने उनके इस कार्यक्रम का खुलासा नहीं किया है. लेकिन एनडीटीवी को खबर मिली है कि अमित शाह नक्सलियों के कोर इलाके गुंडम में जा सकते हैं. ये इलाका नक्सलियों की तेलंगाना स्टेट कमेटी के सेकेट्री दामोदर , डीकेएसजेडसी के नेता विकास, सुजाता सहित बड़े नक्सल लीडर्स का सबसे सेफ जोन है.
तैयारियां पूरी
दरअसल बीजापुर-सुकमा जिले के बॉर्डर पर पूवर्ती , जिड़पल्ली 1 , दारावरम और गुंडम में अमित शाह के पहुंचने की चर्चा जोरों पर थी. इनमें से गुंडम गांव में खुले सुरक्षाबलों के कैंप में प्रशासन ने अमित शाह के पहुंचने की तैयारी की है. इस गांव और आसपास के इलाके को जवानों ने घेरकर रखा है. पूरा इलाका छावनी में तब्दील है.
बेहद खतरनाक इलाका है गुंडम
बीजापुर जिले का गुंडम और इसके आसपास का इलाका नक्सलियों का सबसे बड़ा सेफ जोन है. यहां दो स्टेट के नक्सलियों का डेरा होता है. ये इलाका नक्सलियों की बटालियन, डीकेएसजेडसी के बड़े नताओं , प्लाटून नंबर 9 और 10 पामेड़ और जगरगुंडा एरिया कमेटी का है. इस इलाके में तेलंगाना स्टेट कमेटी के सेकेट्री दामोदर भी सक्रिय है. यहां सेंट्रल कमेटी के नक्सली जुटकर जवानों के खिलाफ साजिश रचते हैं. 3 अगस्त 2021 को गुंडम से 15 किमी की दूरी पर कोमटपल्ली नक्सलियों ने शहीदी सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया था. इसमें 500-600 की संख्या में नक्सली जुटे थे. 10000 ग्रामीणों की भीड़ भी यहां थी. इसी गांव से 5-6 किमी दूर टेकलगुडम में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर अटैक किया था. जिसमें सीआरपीएफ के 21 जवानों की शहादत हुई थी. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये इलाका कितना खतरनाक है. इन इलाकों में सुरक्षाबलों के कैंप को खोला गया है.
