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धरा गया उच्च शिक्षा विभाग को 18 लाख का चूना लगाने वाला बाबू
Raipur, CG
उच्च शिक्षा विभाग को 18 लाख रुपए का चूना लगाने वाले आरोपी क्लर्क आकाश श्रीवास्तव को आखिरकार रायपुर पुलिस ने भोपाल से धरदबोचा है. विभागीय जांच में अफरा-तफरी के खुलासे के बाद आरोपी क्लर्क के खिलाफ अपर संचालक ने सरस्वती नगर पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज कराया था.
जानकारी के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के रीजनल ऑफिस में पदस्थ ग्रेड 2 क्लर्क आकाश श्रीवास्तव ने 2023 से 2025 के बीच पद पर रहते हुए 18 लाख रुपए सरकारी राशि अपने व रिश्तेदारों के खाते में जमाकर निजी उपयोग किया था. उच्च शिक्षा विभाग को जब क्लर्क की हरकतों का पता चला तो पहले 11 मार्च को निलंबित किया गया, इसके बाद 18 मार्च को उसके खिलाफ आनन-फानन में सरस्वती नगर थाने में अपराध दर्ज कराया गया था.
दरअसल, आकाश श्रीवास्तव ने सुनियोजित तरीके से कूटरचना कर शासकीय धन को विभिन्न बैंक खातों में फर्जी तरीके से जमा किया, और बाद में उन पैसों को अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से ट्रांसफर कर लिया. अपने बैंक खातों के अलावा आरोपी ने दो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के खातों में भी शासकीय धन को गबन करने के लिए जमा करने के बाद ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिया था.
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धरा गया उच्च शिक्षा विभाग को 18 लाख का चूना लगाने वाला बाबू
Raipur, CG
उच्च शिक्षा विभाग को 18 लाख रुपए का चूना लगाने वाले आरोपी क्लर्क आकाश श्रीवास्तव को आखिरकार रायपुर पुलिस ने भोपाल से धरदबोचा है. विभागीय जांच में अफरा-तफरी के खुलासे के बाद आरोपी क्लर्क के खिलाफ अपर संचालक ने सरस्वती नगर पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज कराया था.
जानकारी के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के रीजनल ऑफिस में पदस्थ ग्रेड 2 क्लर्क आकाश श्रीवास्तव ने 2023 से 2025 के बीच पद पर रहते हुए 18 लाख रुपए सरकारी राशि अपने व रिश्तेदारों के खाते में जमाकर निजी उपयोग किया था. उच्च शिक्षा विभाग को जब क्लर्क की हरकतों का पता चला तो पहले 11 मार्च को निलंबित किया गया, इसके बाद 18 मार्च को उसके खिलाफ आनन-फानन में सरस्वती नगर थाने में अपराध दर्ज कराया गया था.
दरअसल, आकाश श्रीवास्तव ने सुनियोजित तरीके से कूटरचना कर शासकीय धन को विभिन्न बैंक खातों में फर्जी तरीके से जमा किया, और बाद में उन पैसों को अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से ट्रांसफर कर लिया. अपने बैंक खातों के अलावा आरोपी ने दो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के खातों में भी शासकीय धन को गबन करने के लिए जमा करने के बाद ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिया था.
