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भारतमाला मुआवजा घोटाला: राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर 40 करोड़ की बंदरबांट
रायपुर (छ.ग.)
EOW ने तीन पटवारियों के खिलाफ पेश किया पहला पूरक चालान, सरकारी जमीन को निजी बताकर दिलाया गया था मुआवजा
छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में हुए बड़े मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अहम कार्रवाई करते हुए तीन पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान अदालत में पेश किया है। जांच में सामने आया है कि इन राजस्व कर्मचारियों ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी भूमि को निजी दर्शाया और दस्तावेजों में हेराफेरी कर करीब 40 करोड़ रुपये का अवैध मुआवजा पास कराया।
यह मामला रायपुर–विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ा है, जहां भारतमाला परियोजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया था। EOW के अनुसार, आरोपियों ने मूल खसरा रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर बैकडेट में नामांतरण, खाता विभाजन और स्वामित्व परिवर्तन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
तीन पटवारी न्यायिक हिरासत में
EOW ने जिन तीन पटवारियों के खिलाफ पूरक चालान दाखिल किया है, उनमें दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे शामिल हैं। इन्हें 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इनकी भूमिका मुआवजा निर्धारण और रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया में निर्णायक थी।
कैसे सामने आया पूरा खेल
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि अभनपुर क्षेत्र के ग्राम नायकबांधा और उरला में भूमि सर्वे से ठीक पहले एक ही परिवार की जमीन को कई हिस्सों में विभाजित कर दर्जनों लोगों के नाम रिकॉर्ड में जोड़ दिए गए। इस प्रक्रिया से जमीन का मूल्य कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया गया और वास्तविक मुआवजा राशि से कई गुना अधिक भुगतान कर दिया गया।
एक जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि करीब चार एकड़ भूमि, जो पहले एक परिवार के नाम थी, उसे 14 सदस्यों में बांटकर 70 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा जारी कर दिया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से की गई।
NHAI ने भी जताई थी आपत्ति
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर में मुआवजा वितरण को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद राजस्व विभाग को रिपोर्ट भेजी गई और शेष भुगतान पर रोक लगाई गई। वर्तमान में लगभग 78 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान स्थगित है।
पहले भी हुई थी छापेमारी
EOW ने अप्रैल 2025 में रायपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में एक साथ छापेमारी कर 20 से अधिक अधिकारियों और निजी संस्थाओं के ठिकानों से दस्तावेज जब्त किए थे। जांच के दायरे में SDM, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और निजी कंपनियां भी शामिल हैं।
EOW का कहना है कि यह घोटाला केवल तीन पटवारियों तक सीमित नहीं है। जांच के अगले चरण में अन्य राजस्व अधिकारियों, मध्यस्थों और लाभार्थियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
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रायपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में हुए बड़े मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अहम कार्रवाई करते हुए तीन पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान अदालत में पेश किया है। जांच में सामने आया है कि इन राजस्व कर्मचारियों ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी भूमि को निजी दर्शाया और दस्तावेजों में हेराफेरी कर करीब 40 करोड़ रुपये का अवैध मुआवजा पास कराया।
यह मामला रायपुर–विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ा है, जहां भारतमाला परियोजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया था। EOW के अनुसार, आरोपियों ने मूल खसरा रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर बैकडेट में नामांतरण, खाता विभाजन और स्वामित्व परिवर्तन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
तीन पटवारी न्यायिक हिरासत में
EOW ने जिन तीन पटवारियों के खिलाफ पूरक चालान दाखिल किया है, उनमें दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे शामिल हैं। इन्हें 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इनकी भूमिका मुआवजा निर्धारण और रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया में निर्णायक थी।
कैसे सामने आया पूरा खेल
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि अभनपुर क्षेत्र के ग्राम नायकबांधा और उरला में भूमि सर्वे से ठीक पहले एक ही परिवार की जमीन को कई हिस्सों में विभाजित कर दर्जनों लोगों के नाम रिकॉर्ड में जोड़ दिए गए। इस प्रक्रिया से जमीन का मूल्य कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया गया और वास्तविक मुआवजा राशि से कई गुना अधिक भुगतान कर दिया गया।
एक जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि करीब चार एकड़ भूमि, जो पहले एक परिवार के नाम थी, उसे 14 सदस्यों में बांटकर 70 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा जारी कर दिया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से की गई।
NHAI ने भी जताई थी आपत्ति
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर में मुआवजा वितरण को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद राजस्व विभाग को रिपोर्ट भेजी गई और शेष भुगतान पर रोक लगाई गई। वर्तमान में लगभग 78 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान स्थगित है।
पहले भी हुई थी छापेमारी
EOW ने अप्रैल 2025 में रायपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में एक साथ छापेमारी कर 20 से अधिक अधिकारियों और निजी संस्थाओं के ठिकानों से दस्तावेज जब्त किए थे। जांच के दायरे में SDM, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और निजी कंपनियां भी शामिल हैं।
EOW का कहना है कि यह घोटाला केवल तीन पटवारियों तक सीमित नहीं है। जांच के अगले चरण में अन्य राजस्व अधिकारियों, मध्यस्थों और लाभार्थियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
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