भारतमाला परियोजना भूमि घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, SDM-पटवारी-लैंड माफिया गठजोड़ पर 9 ठिकानों में छापे

रायपुर (छ.ग.)

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रायपुर-विशाखापत्तनम कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में 43 करोड़ की धोखाधड़ी, मुआवजे को कागजों में 78 करोड़ तक बढ़ाया गया

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना में हुए कथित भूमि घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी की रायपुर जोनल टीम ने छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद जिलों में कुल नौ ठिकानों पर छापेमारी कर जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा घोटाले की जांच तेज कर दी है। यह कार्रवाई रायपुर से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम तक प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि में हुई अनियमितताओं के सिलसिले में की गई।

ईडी के अनुसार, छापेमारी उन लोगों और परिसरों पर की गई, जिन पर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में मुआवजा भुगतान में हेराफेरी करने का संदेह है। इनमें हरमीत सिंह खनूजा, उनके सहयोगी, कुछ सरकारी अधिकारी और जमीन से जुड़े निजी पक्ष शामिल हैं। एजेंसी ने तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के दौरान दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं।

जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में लगभग 43 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। आरोप है कि जमीन के बड़े टुकड़ों को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया और राजस्व रिकॉर्ड में पुरानी तारीखों के दस्तावेज तैयार कर मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ा दी गई। इस प्रक्रिया के जरिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को 78 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा दिखाया गया, जबकि वास्तविक मूल्य इससे काफी कम था।

सूत्रों के मुताबिक, इस कथित घोटाले में एसडीएम, पटवारी और स्थानीय लैंड माफिया का संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। अभनपुर क्षेत्र के नायकबंधा और उरला गांवों में जमीन को 159 प्लॉट में विभाजित कर उसका मूल्य 29.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 78 करोड़ रुपये तक दर्शाया गया। केवल अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर सड़क हिस्से के लिए मुआवजा 324 करोड़ रुपये तय किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि शेष 78 करोड़ रुपये फिलहाल रोके गए हैं।

इस मामले की गूंज राज्य विधानसभा तक भी पहुंच चुकी है। शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष ने भारतमाला परियोजना में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। वहीं, राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि रायपुर कलेक्टर की जांच में भूमि स्वामित्व हस्तांतरण और मुआवजा दावों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं।

जांच के निष्कर्षों के बाद सरकार ने नायब तहसीलदार और कई पटवारियों समेत कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया है। ईडी का कहना है कि धन शोधन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में पूछताछ व कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। भारतमाला परियोजना से जुड़ा यह मामला अब राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर एक बड़े पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में सामने आया है।

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www.dainikjagranmpcg.com
29 Dec 2025 By Nitin Trivedi

भारतमाला परियोजना भूमि घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, SDM-पटवारी-लैंड माफिया गठजोड़ पर 9 ठिकानों में छापे

रायपुर (छ.ग.)

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना में हुए कथित भूमि घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी की रायपुर जोनल टीम ने छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद जिलों में कुल नौ ठिकानों पर छापेमारी कर जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा घोटाले की जांच तेज कर दी है। यह कार्रवाई रायपुर से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम तक प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि में हुई अनियमितताओं के सिलसिले में की गई।

ईडी के अनुसार, छापेमारी उन लोगों और परिसरों पर की गई, जिन पर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में मुआवजा भुगतान में हेराफेरी करने का संदेह है। इनमें हरमीत सिंह खनूजा, उनके सहयोगी, कुछ सरकारी अधिकारी और जमीन से जुड़े निजी पक्ष शामिल हैं। एजेंसी ने तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के दौरान दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं।

जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में लगभग 43 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। आरोप है कि जमीन के बड़े टुकड़ों को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया और राजस्व रिकॉर्ड में पुरानी तारीखों के दस्तावेज तैयार कर मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ा दी गई। इस प्रक्रिया के जरिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को 78 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा दिखाया गया, जबकि वास्तविक मूल्य इससे काफी कम था।

सूत्रों के मुताबिक, इस कथित घोटाले में एसडीएम, पटवारी और स्थानीय लैंड माफिया का संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। अभनपुर क्षेत्र के नायकबंधा और उरला गांवों में जमीन को 159 प्लॉट में विभाजित कर उसका मूल्य 29.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 78 करोड़ रुपये तक दर्शाया गया। केवल अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर सड़क हिस्से के लिए मुआवजा 324 करोड़ रुपये तय किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि शेष 78 करोड़ रुपये फिलहाल रोके गए हैं।

इस मामले की गूंज राज्य विधानसभा तक भी पहुंच चुकी है। शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष ने भारतमाला परियोजना में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। वहीं, राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि रायपुर कलेक्टर की जांच में भूमि स्वामित्व हस्तांतरण और मुआवजा दावों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं।

जांच के निष्कर्षों के बाद सरकार ने नायब तहसीलदार और कई पटवारियों समेत कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया है। ईडी का कहना है कि धन शोधन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में पूछताछ व कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। भारतमाला परियोजना से जुड़ा यह मामला अब राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर एक बड़े पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में सामने आया है।

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