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बस्तर में NIA की बड़ी कार्रवाई: अरनपुर IED ब्लास्ट मामले में 12 ठिकानों पर छापा, लेवी वसूली से जुड़े दस्तावेज बरामद
Jagdalpur, CG
दंतेवाड़ा-सुकमा में की गई छापेमारी; 11 जवानों की शहादत वाले हमले से जुड़ा है मामला, संदिग्धों के डिजिटल उपकरण और नकदी जब्त
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में एक साथ 12 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई अरनपुर IED ब्लास्ट से जुड़े 2023 के एक मामले में की गई, जिसमें 11 सुरक्षा जवान शहीद हुए थे। NIA की यह छापेमारी प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के सक्रिय सदस्यों और समर्थकों के खिलाफ की गई, जिन पर हमले की साजिश, लेवी वसूली और वित्तीय नेटवर्क संचालित करने का आरोप है।
IED ब्लास्ट से जुड़ी कड़ी में नई दस्तावेजी जानकारी मिली
NIA ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि तलाशी अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, हस्तलिखित पत्र, लेवी वसूली की रसीदें और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नकदी और माओवादियों के संपर्क से जुड़े कई सबूत भी मिले हैं। एजेंसी का कहना है कि ये सामग्री सीधे अरनपुर हमले में शामिल सशस्त्र कैडरों से संबंधित है।
अब तक इस मामले में 27 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, और दो आरोपपत्र दायर किए गए हैं। NIA का कहना है कि जांच अब भी जारी है और बरामद दस्तावेजों के आधार पर और गिरफ्तारियां संभव हैं।
क्या था अरनपुर ब्लास्ट मामला
26 अप्रैल 2023 को दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर क्षेत्र में नक्सलियों ने IED विस्फोट कर DRG जवानों से भरी गाड़ी उड़ा दी थी। इस हमले में 10 जवान और एक चालक शहीद हुए थे। जांच में खुलासा हुआ कि सड़क किनारे पहले से 50 किलो से अधिक विस्फोटक प्लांट किया गया था।
IED को सड़क से करीब 70 मीटर लंबी वायरिंग के जरिए रिमोट से उड़ाया गया। धमाका इतना भीषण था कि सड़क पर 7 फीट गहरा गड्ढा हो गया और वाहन के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए। बाद में NIA ने इस मामले को अपने हाथ में लेकर आतंकी साजिश और फंडिंग नेटवर्क की दिशा में जांच शुरू की थी।
माओवादियों की फंडिंग चेन पर NIA की नजर
छापेमारी के दौरान मिले लेवी वसूली के दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य से यह स्पष्ट हुआ है कि नक्सली संगठन अब भी स्थानीय स्तर पर कर-संग्रह जैसी समानांतर व्यवस्था चला रहा था। सूत्रों के मुताबिक, बरामद सामग्री में ऐसे नाम भी हैं जो स्थानीय कारोबारियों और ठेकेदारों से वसूली के मामलों में संदिग्ध हैं।
NIA अब इस दिशा में जांच कर रही है कि हमले के लिए फंड और सामग्री सप्लाई किस चैनल के माध्यम से की गई थी। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में राज्य और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
NIA की सख्त निगरानी जारी
NIA अधिकारियों के अनुसार, यह तलाशी अभियान माओवादियों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में बड़ा कदम है। एजेंसी अब बरामद डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच कर रही है। फिलहाल सभी बरामद वस्तुओं को जब्त कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
अरनपुर ब्लास्ट के बाद से बस्तर रेंज में सुरक्षा बलों की काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स की रणनीति में बड़ा बदलाव किया गया। DRG और CRPF की टीमें अब साझा अभियानों पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि NIA की यह कार्रवाई न केवल माओवादियों की फंडिंग चेन पर असर डालेगी बल्कि स्थानीय सहयोगी नेटवर्क को भी कमजोर करेगी।
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बस्तर में NIA की बड़ी कार्रवाई: अरनपुर IED ब्लास्ट मामले में 12 ठिकानों पर छापा, लेवी वसूली से जुड़े दस्तावेज बरामद
Jagdalpur, CG
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में एक साथ 12 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई अरनपुर IED ब्लास्ट से जुड़े 2023 के एक मामले में की गई, जिसमें 11 सुरक्षा जवान शहीद हुए थे। NIA की यह छापेमारी प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के सक्रिय सदस्यों और समर्थकों के खिलाफ की गई, जिन पर हमले की साजिश, लेवी वसूली और वित्तीय नेटवर्क संचालित करने का आरोप है।
IED ब्लास्ट से जुड़ी कड़ी में नई दस्तावेजी जानकारी मिली
NIA ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि तलाशी अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, हस्तलिखित पत्र, लेवी वसूली की रसीदें और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नकदी और माओवादियों के संपर्क से जुड़े कई सबूत भी मिले हैं। एजेंसी का कहना है कि ये सामग्री सीधे अरनपुर हमले में शामिल सशस्त्र कैडरों से संबंधित है।
अब तक इस मामले में 27 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, और दो आरोपपत्र दायर किए गए हैं। NIA का कहना है कि जांच अब भी जारी है और बरामद दस्तावेजों के आधार पर और गिरफ्तारियां संभव हैं।
क्या था अरनपुर ब्लास्ट मामला
26 अप्रैल 2023 को दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर क्षेत्र में नक्सलियों ने IED विस्फोट कर DRG जवानों से भरी गाड़ी उड़ा दी थी। इस हमले में 10 जवान और एक चालक शहीद हुए थे। जांच में खुलासा हुआ कि सड़क किनारे पहले से 50 किलो से अधिक विस्फोटक प्लांट किया गया था।
IED को सड़क से करीब 70 मीटर लंबी वायरिंग के जरिए रिमोट से उड़ाया गया। धमाका इतना भीषण था कि सड़क पर 7 फीट गहरा गड्ढा हो गया और वाहन के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए। बाद में NIA ने इस मामले को अपने हाथ में लेकर आतंकी साजिश और फंडिंग नेटवर्क की दिशा में जांच शुरू की थी।
माओवादियों की फंडिंग चेन पर NIA की नजर
छापेमारी के दौरान मिले लेवी वसूली के दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य से यह स्पष्ट हुआ है कि नक्सली संगठन अब भी स्थानीय स्तर पर कर-संग्रह जैसी समानांतर व्यवस्था चला रहा था। सूत्रों के मुताबिक, बरामद सामग्री में ऐसे नाम भी हैं जो स्थानीय कारोबारियों और ठेकेदारों से वसूली के मामलों में संदिग्ध हैं।
NIA अब इस दिशा में जांच कर रही है कि हमले के लिए फंड और सामग्री सप्लाई किस चैनल के माध्यम से की गई थी। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में राज्य और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
NIA की सख्त निगरानी जारी
NIA अधिकारियों के अनुसार, यह तलाशी अभियान माओवादियों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में बड़ा कदम है। एजेंसी अब बरामद डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच कर रही है। फिलहाल सभी बरामद वस्तुओं को जब्त कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
अरनपुर ब्लास्ट के बाद से बस्तर रेंज में सुरक्षा बलों की काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स की रणनीति में बड़ा बदलाव किया गया। DRG और CRPF की टीमें अब साझा अभियानों पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि NIA की यह कार्रवाई न केवल माओवादियों की फंडिंग चेन पर असर डालेगी बल्कि स्थानीय सहयोगी नेटवर्क को भी कमजोर करेगी।
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