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बिलासपुर ट्रेन हादसा: प्रमोशन के एक महीने बाद लोको पायलट ने संभाली पैसेंजर ट्रेन, शुरुआती जांच में सिग्नल-जंप बना कारण
Bilaspur, CG
रेलवे की प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा — हादसे के वक्त लोको पायलट ने गलत लाइन का सिग्नल देखकर स्पीड बढ़ाई, सामने मालगाड़ी दिखी तो कंट्रोल नहीं कर पाए; CRS टीम करेगी विस्तृत जांच, 19 कर्मचारियों से होगी पूछताछ।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे को लेकर रेलवे की पांच सदस्यीय जांच टीम ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। जांच में सामने आया है कि लोको पायलट विद्या सागर, जो हाल ही में मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन चलाने के लिए प्रमोट हुए थे, ने गलत सिग्नल देखकर स्पीड बढ़ाई, जिससे यह भीषण दुर्घटना हुई।
घटना के बाद अब कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की टीम ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। संरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा बिलासपुर पहुंच चुके हैं और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के 19 अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
घुमावदार ट्रैक पर हुआ हादसा
रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार, लालखदान-गतौरा के बीच ट्रैक में घुमाव (कर्व) है, जिससे सिग्नल की दृश्यता सीमित रहती है। आशंका जताई गई है कि लोको पायलट ने दूसरी लाइन का सिग्नल देखकर ट्रेन की रफ्तार बढ़ा दी, लेकिन जब सामने मालगाड़ी दिखी तो ब्रेक लगाने के बावजूद टक्कर नहीं टल सकी।
यह दुर्घटना रविवार शाम करीब 6:45 बजे हुई थी, जब गेवरा रोड मेमू लोकल ट्रेन (68733) बिलासपुर की ओर बढ़ रही थी और सामने मालगाड़ी खड़ी थी। मेमू ट्रेन का मोटर कोच मालगाड़ी के वैगन के ऊपर चढ़ गया, जिससे टक्कर की तीव्रता बेहद भयावह रही।
11 यात्रियों की मौत, 20 घायल
हादसे में अब तक 11 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को बिलासपुर और रायगढ़ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्थानीय प्रशासन और NDRF टीमों ने रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी यात्रियों को बाहर निकाला।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मृतकों के परिजनों को मानवता के आधार पर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे सुरक्षा आयुक्त की जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
CRS जांच और 19 कर्मचारियों से पूछताछ
CRS टीम ने आज सुबह से जांच शुरू कर दी है। DRM कार्यालय में बुलाए गए 19 कर्मचारियों में सिग्नलमैन, कंट्रोल ऑफिसर, स्टेशन मास्टर और तकनीकी स्टाफ शामिल हैं। उनसे घटना के वक्त की ड्यूटी स्थिति, सिग्नल संचालन और संचार रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारियां मांगी जा रही हैं।
संरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा ने कहा, “प्रारंभिक निष्कर्ष में मानवीय त्रुटि की संभावना दिख रही है, परंतु अंतिम रिपोर्ट तथ्यों के विश्लेषण के बाद ही दी जाएगी।”
लोको पायलट हाल ही में हुए थे प्रमोट
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, लोको पायलट विद्या सागर पिछले कई वर्षों से मालगाड़ी चला रहे थे। करीब एक महीने पहले उन्हें पैसेंजर ट्रेन संचालन के लिए प्रमोशन मिला था। ट्रेन संचालन में बदलाव के बाद उन्हें सीमित अनुभव के साथ ही ड्यूटी सौंपी गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभव की कमी और सिग्नल भ्रम इस दुर्घटना का प्रमुख कारण बन सकता है। फिलहाल CRS जांच पूरी होने तक रेलवे ने इस रूट पर संचालन संबंधी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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Bilaspur, CG
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे को लेकर रेलवे की पांच सदस्यीय जांच टीम ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। जांच में सामने आया है कि लोको पायलट विद्या सागर, जो हाल ही में मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन चलाने के लिए प्रमोट हुए थे, ने गलत सिग्नल देखकर स्पीड बढ़ाई, जिससे यह भीषण दुर्घटना हुई।
घटना के बाद अब कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की टीम ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। संरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा बिलासपुर पहुंच चुके हैं और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के 19 अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
घुमावदार ट्रैक पर हुआ हादसा
रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार, लालखदान-गतौरा के बीच ट्रैक में घुमाव (कर्व) है, जिससे सिग्नल की दृश्यता सीमित रहती है। आशंका जताई गई है कि लोको पायलट ने दूसरी लाइन का सिग्नल देखकर ट्रेन की रफ्तार बढ़ा दी, लेकिन जब सामने मालगाड़ी दिखी तो ब्रेक लगाने के बावजूद टक्कर नहीं टल सकी।
यह दुर्घटना रविवार शाम करीब 6:45 बजे हुई थी, जब गेवरा रोड मेमू लोकल ट्रेन (68733) बिलासपुर की ओर बढ़ रही थी और सामने मालगाड़ी खड़ी थी। मेमू ट्रेन का मोटर कोच मालगाड़ी के वैगन के ऊपर चढ़ गया, जिससे टक्कर की तीव्रता बेहद भयावह रही।
11 यात्रियों की मौत, 20 घायल
हादसे में अब तक 11 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को बिलासपुर और रायगढ़ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्थानीय प्रशासन और NDRF टीमों ने रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी यात्रियों को बाहर निकाला।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मृतकों के परिजनों को मानवता के आधार पर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे सुरक्षा आयुक्त की जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
CRS जांच और 19 कर्मचारियों से पूछताछ
CRS टीम ने आज सुबह से जांच शुरू कर दी है। DRM कार्यालय में बुलाए गए 19 कर्मचारियों में सिग्नलमैन, कंट्रोल ऑफिसर, स्टेशन मास्टर और तकनीकी स्टाफ शामिल हैं। उनसे घटना के वक्त की ड्यूटी स्थिति, सिग्नल संचालन और संचार रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारियां मांगी जा रही हैं।
संरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा ने कहा, “प्रारंभिक निष्कर्ष में मानवीय त्रुटि की संभावना दिख रही है, परंतु अंतिम रिपोर्ट तथ्यों के विश्लेषण के बाद ही दी जाएगी।”
लोको पायलट हाल ही में हुए थे प्रमोट
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, लोको पायलट विद्या सागर पिछले कई वर्षों से मालगाड़ी चला रहे थे। करीब एक महीने पहले उन्हें पैसेंजर ट्रेन संचालन के लिए प्रमोशन मिला था। ट्रेन संचालन में बदलाव के बाद उन्हें सीमित अनुभव के साथ ही ड्यूटी सौंपी गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभव की कमी और सिग्नल भ्रम इस दुर्घटना का प्रमुख कारण बन सकता है। फिलहाल CRS जांच पूरी होने तक रेलवे ने इस रूट पर संचालन संबंधी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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