अंबिकापुर में ट्रिपल तलाक का मामला, दहेज प्रताड़ना की शिकायत के बीच पति पर केस दर्ज

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महिला का आरोप- पांच लाख रुपए अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर पति ने रिश्तेदारों के सामने तीन तलाक कहा, पुलिस ने जांच शुरू की।

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में ट्रिपल तलाक और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा एक मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही उसके पति और ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज की मांग की जाने लगी थी। जब परिवार के लोगों ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की, तब पति ने रिश्तेदारों के सामने तीन बार तलाक बोलकर उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। घटना के बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, मोमिनपुरा निवासी 31 वर्षीय सहाना बानो का निकाह 18 जून 2022 को सदर रोड निवासी शोएब खान के साथ हुआ था। शोएब व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। महिला का कहना है कि विवाह के समय उसके परिजनों ने अपनी क्षमता के अनुसार घरेलू सामान के साथ तीन लाख रुपये नकद भी दिए थे। शुरुआत में कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन शादी के करीब तीन महीने बाद ही अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू हो गई। महिला का आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये और लाने के लिए लगातार दबाव बनाया जाने लगा। शिकायत में कहा गया है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। परिवार में आए दिन विवाद होने लगे। महिला का कहना है कि उसने कई बार स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ। इस बीच उसके घर बेटी का जन्म हुआ। पीड़िता का आरोप है कि बेटी के जन्म के बाद विवाद और बढ़ गया तथा उसके साथ व्यवहार पहले से अधिक खराब होने लगा। लगातार तनावपूर्ण माहौल के कारण उसने अपनी ढाई साल की बेटी के साथ मायके में रहने का फैसला किया।

मायके पहुंचने के बाद महिला ने महिला थाने में दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया। अधिकारियों का उद्देश्य था कि यदि संभव हो तो आपसी बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जाए। कई दौर की बातचीत के बाद भी मामला सुलझ नहीं सका। इसके बाद परिवार के लोगों और मोहल्ले के कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की एक और कोशिश की। महिला के अनुसार, छह जून को उसके परिवार के कुछ सदस्य उसे और उसकी बेटी को लेकर पति के घर पहुंचे। वहां दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई। रिश्तेदारों ने पति-पत्नी को साथ रहने और विवाद खत्म करने की सलाह दी। पीड़िता का आरोप है कि बातचीत के दौरान पति ने उसे अपने साथ रखने से साफ इनकार कर दिया और मौजूद लोगों के सामने तीन बार तलाक बोल दिया। महिला का कहना है कि इसके बाद समझौते की सभी संभावनाएं समाप्त हो गईं। घटना के बाद महिला ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने किसी भी पक्ष के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और घटना के समय मौजूद लोगों के बयान भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए सभी संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो काउंसलिंग से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बनाए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम किस प्रकार हुआ और किन परिस्थितियों में विवाद इस स्तर तक पहुंचा।  गौरतलब है कि अगस्त 2019 में संसद द्वारा पारित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम लागू होने के बाद तत्काल तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति एक साथ तीन तलाक कहकर विवाह समाप्त करने की कोशिश करता है तो इसे अपराध माना जाता है। कानून में ऐसे मामलों के लिए सजा और अन्य कानूनी प्रावधान भी निर्धारित किए गए हैं। इस कानून के अनुसार पीड़ित महिला को गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा से जुड़े मामलों में भी अदालत आवश्यक आदेश दे सकती है। आरोपी को जमानत देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है और जमानत पर फैसला करते समय पीड़ित महिला का पक्ष भी सुना जाता है। कानून का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें एकतरफा तत्काल तलाक जैसी प्रथा से सुरक्षा देना है।अंबिकापुर पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। 

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26 Jun 2026 By Vaishnavi.J

अंबिकापुर में ट्रिपल तलाक का मामला, दहेज प्रताड़ना की शिकायत के बीच पति पर केस दर्ज

Digital Desk

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में ट्रिपल तलाक और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा एक मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही उसके पति और ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज की मांग की जाने लगी थी। जब परिवार के लोगों ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की, तब पति ने रिश्तेदारों के सामने तीन बार तलाक बोलकर उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। घटना के बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, मोमिनपुरा निवासी 31 वर्षीय सहाना बानो का निकाह 18 जून 2022 को सदर रोड निवासी शोएब खान के साथ हुआ था। शोएब व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। महिला का कहना है कि विवाह के समय उसके परिजनों ने अपनी क्षमता के अनुसार घरेलू सामान के साथ तीन लाख रुपये नकद भी दिए थे। शुरुआत में कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन शादी के करीब तीन महीने बाद ही अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू हो गई। महिला का आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये और लाने के लिए लगातार दबाव बनाया जाने लगा। शिकायत में कहा गया है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। परिवार में आए दिन विवाद होने लगे। महिला का कहना है कि उसने कई बार स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ। इस बीच उसके घर बेटी का जन्म हुआ। पीड़िता का आरोप है कि बेटी के जन्म के बाद विवाद और बढ़ गया तथा उसके साथ व्यवहार पहले से अधिक खराब होने लगा। लगातार तनावपूर्ण माहौल के कारण उसने अपनी ढाई साल की बेटी के साथ मायके में रहने का फैसला किया।

मायके पहुंचने के बाद महिला ने महिला थाने में दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया। अधिकारियों का उद्देश्य था कि यदि संभव हो तो आपसी बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जाए। कई दौर की बातचीत के बाद भी मामला सुलझ नहीं सका। इसके बाद परिवार के लोगों और मोहल्ले के कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की एक और कोशिश की। महिला के अनुसार, छह जून को उसके परिवार के कुछ सदस्य उसे और उसकी बेटी को लेकर पति के घर पहुंचे। वहां दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई। रिश्तेदारों ने पति-पत्नी को साथ रहने और विवाद खत्म करने की सलाह दी। पीड़िता का आरोप है कि बातचीत के दौरान पति ने उसे अपने साथ रखने से साफ इनकार कर दिया और मौजूद लोगों के सामने तीन बार तलाक बोल दिया। महिला का कहना है कि इसके बाद समझौते की सभी संभावनाएं समाप्त हो गईं। घटना के बाद महिला ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने किसी भी पक्ष के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और घटना के समय मौजूद लोगों के बयान भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए सभी संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो काउंसलिंग से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बनाए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम किस प्रकार हुआ और किन परिस्थितियों में विवाद इस स्तर तक पहुंचा।  गौरतलब है कि अगस्त 2019 में संसद द्वारा पारित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम लागू होने के बाद तत्काल तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति एक साथ तीन तलाक कहकर विवाह समाप्त करने की कोशिश करता है तो इसे अपराध माना जाता है। कानून में ऐसे मामलों के लिए सजा और अन्य कानूनी प्रावधान भी निर्धारित किए गए हैं। इस कानून के अनुसार पीड़ित महिला को गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा से जुड़े मामलों में भी अदालत आवश्यक आदेश दे सकती है। आरोपी को जमानत देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है और जमानत पर फैसला करते समय पीड़ित महिला का पक्ष भी सुना जाता है। कानून का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें एकतरफा तत्काल तलाक जैसी प्रथा से सुरक्षा देना है।अंबिकापुर पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/case-of-triple-talaq-in-ambikapur-case-registered-against-husband/article-57032

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