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छत्तीसगढ़ बजट सत्र शुरू: कवासी लखमा ने एक साल बाद सदन में दी उपस्थिति, आर्थिक सर्वेक्षण पेश
छत्तीसगढ़
भाजपा नेताओं से गले मिलने, बजट और विधेयक पर सियासी नजरें टिकी
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया। पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण हुआ, जिसमें सरकार ने विकास परियोजनाओं और सुरक्षा उपलब्धियों का विवरण दिया। राज्यपाल ने कहा कि रायपुर में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनाया जाएगा और पिछले दो वर्षों में 532 नक्सली न्यूट्रलाइज्ड किए गए हैं।
कवासी लखमा की वापसी
करीब एक साल जेल में रहने के बाद पूर्व मंत्री कवासी लखमा पहली बार सदन में दिखाई दिए। लखमा ने भाजपा नेताओं अजय चंद्राकर, रामविचार नेताम और धर्मजीत सिंह से गले मिलकर अभिवादन किया। इस दौरान चंद्राकर ने उनके कंधे थप-थपाई कर स्वागत किया। लखमा को जमानत मिलने के बाद विधानसभा में शामिल होने की अनुमति मिली है, लेकिन उनकी गतिविधियाँ केवल सदन तक सीमित रहेंगी और वे अपने केस पर कोई बयान नहीं दे सकते।
आर्थिक सर्वेक्षण और बजट की तैयारी
वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण सदन में पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की GSDP स्थिर कीमतों पर 8.11% वृद्धि दर्ज कर सकती है और प्रति व्यक्ति आय 1,79,244 रुपये तक पहुंचने की संभावना है, जो पिछले वर्ष 1,62,848 रुपये थी।
आर्थिक सर्वेक्षण ने राज्य की वृद्धि को तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया:
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कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र: 7.49%
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उद्योग क्षेत्र: 7.21%
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सेवा क्षेत्र: 9.11%
वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मंगलवार को पेश किया जाएगा। इस बार का बजट इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, उद्योग, युवा, महिला और किसान कल्याण पर केंद्रित रहेगा। जिलों में नालंदा लाइब्रेरी, शहरों में स्टेडियम और रिंग रोड निर्माण, तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव है।
सदन की कार्यवाही और राजनीतिक परिदृश्य
सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस सत्र में 2813 प्रश्न, 61 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 13 अशासकीय संकल्प और 112 याचिकाएं विचारार्थ प्रस्तुत हैं। विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।
महत्वपूर्ण विधेयक
सत्र में दो अहम विधेयक पेश किए जाएंगे:
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026
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छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026
कवासी लखमा की सदन में उपस्थिति सशर्त है। उन्हें केवल बजट और सामान्य विषयों पर चर्चा की अनुमति है, अपने केस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उनकी आवाजाही पर सदन सचिव की निगरानी रहेगी और किसी क्षेत्रीय कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकेंगे।
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