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US सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले के बाद India-US Trade Deal पर पुनर्विचार करे मोदी सरकार? जानिए विशेषज्ञ की राय
Digital Desk
US सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले के बाद India-US Trade Deal पर अनिश्चितता। क्या मोदी सरकार बदलेगी अपनी रणनीति?
US सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले के बाद India-US Trade Deal पर पुनर्विचार करे मोदी सरकार? जानिए विशेषज्ञ की राय
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में नई हलचल पैदा कर दी है। 20 फरवरी 2026 को आए US Supreme Court टैरिफ फैसला में पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को बिना कांग्रेस की मंजूरी व्यापक टैरिफ लगाने की शक्ति देने से इनकार कर दिया गया। इस फैसले का सीधा असर चल रही India-US Trade Deal वार्ताओं पर पड़ सकता है।
मुख्य न्यायाधीश John Roberts ने अपने बहुमत फैसले में कहा कि 1977 का International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) राष्ट्रपति को व्यापार नीति में असीमित अधिकार नहीं देता। इस निर्णय ने स्पष्ट किया कि व्यापार नीति तय करने का अधिकार मुख्य रूप से अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
फैसले के तुरंत बाद 15% टैरिफ की घोषणा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी प्रशासन ने Section 122 Trade Act के तहत अधिकतर आयातित वस्तुओं पर अस्थायी 10% टैरिफ (बाद में बढ़ाकर 15%) लगाने की घोषणा कर दी। यह टैरिफ 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए लागू होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका द्वारा व्यापार वार्ताओं में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश है। हालांकि कानूनी जानकारों के अनुसार Section 122 का उपयोग पहले कभी व्यापक स्तर पर नहीं हुआ, इसलिए इस पर भी कानूनी चुनौती की संभावना बनी हुई है।
India-US Trade Deal पर क्या असर?
इस घटनाक्रम के बाद India-US Trade Deal पर पुनर्विचार की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
1. भारतीय निर्यात को राहत
करीब 55% भारतीय निर्यात अब पहले प्रस्तावित 18–25% “रिसिप्रोकल टैरिफ” से मुक्त हो जाएगा। इन उत्पादों पर अब सामान्य MFN (Most Favoured Nation) दरें लागू होंगी।
2. कुछ टैरिफ जारी
स्टील और एल्युमिनियम पर 50% टैरिफ (Section 232 के तहत)
कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% टैरिफ
3. प्रमुख उत्पादों को छूट
भारत के लगभग 40% निर्यात — जैसे स्मार्टफोन, पेट्रोलियम उत्पाद और दवाइयाँ — पहले की तरह टैरिफ से मुक्त रहेंगे।
जरूरी है रणनीति पर पुनर्विचार?
भारत ने व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिका को कई रियायतें देने का संकेत दिया था, जैसे:
MFN टैरिफ में कटौती
अमेरिकी उत्पादों के लिए नियमों में ढील
अमेरिकी वस्तुओं की बड़ी खरीद का संकेत
ये रियायतें 18% कम टैरिफ दर के बदले दी जा रही थीं। लेकिन अब जब अधिकतर देशों पर 15% समान टैरिफ लागू है, तो इन रियायतों का महत्व कम हो गया है।
6 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान में यह प्रावधान भी शामिल था कि यदि कोई पक्ष टैरिफ दरों में बदलाव करता है, तो दूसरा पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस प्रावधान का रणनीतिक उपयोग करना चाहिए।
भारत के पास क्या विकल्प हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत के सामने तीन प्रमुख विकल्प हैं:
वार्ता को अस्थायी रूप से स्थगित करना
नई और अधिक संतुलित शर्तों की मांग करना
परिस्थितियाँ स्पष्ट होने तक इंतजार करना
निष्कर्ष: संतुलित रणनीति की जरूरत
India-US Trade Deal इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जहां कुछ राहत मिली है, वहीं 15% टैरिफ ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए जरूरी है कि वह जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और रणनीतिक कदम उठाए।
2026 में बदलते वैश्विक व्यापार माहौल के बीच भारत के लिए समझदारी भरा पुनर्मूल्यांकन ही सबसे मजबूत विकल्प साबित हो सकता है।

